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MP News: भोपाल-जबलपुर हाईवे पर कैसे हुआ हादसा, शादी से लौट रहे परिवार की कार खाई में गिरी, छह की मौत

MP News: मध्य प्रदेश के रायसेन जिले से सोमवार सुबह एक हृदय विदारक सड़क हादसे की खबर सामने आई, जिसने एक खुशहाल परिवार को पलभर में मातम में डुबो दिया।

भोपाल-जबलपुर नेशनल हाइवे-45 पर सुल्तानपुर थाना क्षेत्र के बम्होरी ढाबे के पास बंदर वाली पुलिया के नजदीक एक तेज रफ्तार टेंपो ट्रैवलर (एसयूवी) अनियंत्रित होकर करीब 10 फीट गहरी खाई में जा गिरी। इस दुर्घटना में इंदौर के छह लोगों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि तीन अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए हैं।

Accident on Bhopal-Jabalpur highway car of a family returning from a wedding fell into a ditch

हादसे के वक्त वाहन में सवार सभी लोग बिहार के सुपौल जिले में एक शादी समारोह में शामिल होकर लौट रहे थे। उनमें से दो - दीपक और संगीता - नवविवाहित जोड़ा हैं, जिनकी शादी महज कुछ घंटे पहले ही संपन्न हुई थी।

हादसे का विवरण: नींद और रफ्तार ने छीनी छह जिंदगियां

सुल्तानपुर थाना प्रभारी संतोष रघुवंशी के अनुसार, प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि टेंपो ट्रैवलर का चालक नींद की हालत में था, जिससे उसने वाहन से नियंत्रण खो दिया और वह पुलिया की रेलिंग से टकराकर सीधा खाई में गिर गया। हादसे का समय सुबह 6:30 से 7:00 बजे के बीच का बताया जा रहा है, जब अधिकांश यात्री गहरी नींद में थे।

धमाके जैसी आवाज सुनकर आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे। पुलिस को भी तुरंत सूचना दी गई। स्थानीय लोगों और पुलिस बल ने मिलकर शवों और घायलों को खाई से बाहर निकाला। सभी को सुल्तानपुर के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां से गंभीर घायलों को रायसेन जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया।

मृतकों की पहचान: एक मासूम समेत छह की गई जान, हादसे में जान गंवाने वालों की पहचान इस प्रकार हुई है:

  • मोहनलाल कुरील (68)
  • चंदा देवी (60)
  • नरेंद्र चोपड़ा (30)
  • सरिता (25)
  • तास्वी उर्फ चिनू (2)
  • चालक सुनील (35)

घायलों में दीपक चोपड़ा, उनकी पत्नी संगीता (25) और संगीता का भाई रवि खोलवाल शामिल हैं। तीनों की हालत गंभीर बनी हुई है, और उन्हें ICU में भर्ती किया गया है।

MP News: खुशियों का कारवां मातम में बदल गया

इंदौर के चंदननगर क्षेत्र के रहने वाले यह सभी लोग शादी की खुशी लेकर लौट रहे थे, लेकिन रास्ते में ही यह यात्रा जिंदगी का सबसे बड़ा झटका बन गई। खासकर मासूम तास्वी की मौत ने सभी को झकझोर कर रख दिया है। उसके पिता रवि, जो खुद घायल हैं, बेटी की मौत से सदमे में हैं और बार-बार बेहोश हो जा रहे हैं।

MP News: स्थानीय लोगों का मानवता भरा प्रयास

बम्होरी ढाबे के पास रहने वाले रामू साहू ने बताया,"सुबह तेज आवाज आई, जैसे कुछ बहुत भारी चीज गिर गई हो। हम दौड़े और देखा कि गाड़ी खाई में उलटी पड़ी है। कुछ लोग अंदर फंसे हुए थे। बिना सोचे-समझे नीचे उतर गए और पुलिस आने तक मदद करते रहे।"

ग्रामीणों की तत्परता और साहस ने कई घायलों की जान बचाई, प्रशासनिक कार्रवाई और मुआवजा घोषणा

रायसेन के कलेक्टर और एसपी ने मौके पर पहुंचकर हालात का जायजा लिया। कलेक्टर ने घायलों के इलाज के लिए सभी आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं तुरंत उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। प्रशासन ने मृतकों के परिजनों को आर्थिक सहायता और अंतिम संस्कार के लिए सहायता राशि देने की घोषणा की है।

मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने भी इस हादसे पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए ट्वीट किया: "रायसेन में हुए सड़क हादसे का समाचार अत्यंत दुखद है। दिवंगत आत्माओं को श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं और घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना करता हूं।"

नेशनल हाइवे 45: हादसों की हाइवे?

यह पहला हादसा नहीं है जो NH-45 पर हुआ है। मार्च 2024 में भी इसी क्षेत्र में एक तेज रफ्तार ट्रक ने बारातियों को कुचल दिया था, जिसमें पांच लोगों की मौत हुई थी। स्थानीय लोग बम्होरी ढाबे के पास की पुलिया को 'डेंजर जोन' मानते हैं, जहां आए दिन हादसे होते हैं।

सड़क सुरक्षा विशेषज्ञ रमेश ठाकुर कहते हैं: "इस क्षेत्र में सड़क डिजाइन खराब है, संकेतक नहीं हैं, रात में रोशनी नहीं है और पुलिया पर रैलिंग भी जर्जर है। ऐसे में वाहन चालकों के लिए खतरा हर मोड़ पर है।"

परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल

इंदौर के चंदननगर में जैसे ही हादसे की खबर पहुंची, पूरे मोहल्ले में सन्नाटा पसर गया। मोहनलाल और चंदा देवी के घर पर लोग सांत्वना देने के लिए पहुंच रहे हैं, लेकिन वहां केवल मातम और सिसकियों की आवाजें सुनाई देती हैं। परिजन सदमे में हैं और बार-बार एक ही सवाल पूछ रहे हैं - "आखिर क्यों?"

सुल्तानपुर थाना प्रभारी संतोष रघुवंशी ने जनता से अपील की है: "लंबी यात्रा पर जाने से पहले चालक को पर्याप्त नींद और विश्राम जरूर दें। तेज रफ्तार से बचें और दुर्घटनाओं से सतर्क रहें। एक पल की लापरवाही, पूरे जीवन को बदल सकती है।"

जब एक पुलिया पर टूट जाती है सात जिंदगियों की डोर

यह हादसा केवल एक समाचार नहीं, बल्कि एक त्रासदी का प्रतीक है, जो बताती है कि कैसे एक छोटी सी चूक, लापरवाही या सरकारी अनदेखी लोगों की खुशियों को मातम में बदल देती है। वो नवविवाहित जोड़ा, जो नई जिंदगी की शुरुआत कर रहा था, आज आईसीयू में जिंदगी और मौत से जूझ रहा है। वो परिवार, जो गीतों और हंसी के साथ लौट रहा था, अब गम और खामोशी में डूब गया है।

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