बीएमसी में लापरवाही: 7 साल की बच्ची को बुखार था, फिर भी घुटने का ऑपरेशन कर दिया, आंखों की रोशनी चली गई
सागर, 30 जुलाई। मप्र के सागर में बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज के हड्डीरोग विभाग में सात साल की बच्ची के पैर के सेकंड ऑपरेशन के दौरान लापरवाही का मामला सामने आया है। ऑपरेशन के बाद से बच्ची दोनों आंखों से दिखना बंद हो गया। अब डॉक्टर अपनी गलती को छिपाने के लिए उसे जबरन भोपाल ले जाने का दबाव बना रहे हैं।

जानकारी अनुसार बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में तीन महीने पहले एक एक्सीडेंट में घायल हुई सात वर्षीय बच्ची रिया पिता माखन लोधी निवासी बंडा के पैर का ऑपरेशन कर घुटने से जांघ के बीच हड्डी का ऑपरेशन कर रॉड (इम्प्लांट) डाला गया था। करीब नौ दिन पहले गुरुवार को उसे दोबारा से भर्ती कर सेकंड ऑपरेशन होना था, जिसमें उसके पैर में हड्डी जुडने के बाद रॉड (इम्प्लांट) निकाला जाना था। उसे बुखार था, यह बात रात में स्टाफ को बताई थी, लेकिन उन्होंने अनसुना कर दिया। सुबह डॉक्टरों ने उसका ऑपरेशन कर दिया। बच्ची का नौ बजे से लेकर 11 बजे तक ऑपरेशन चला, लेकिन उसे ओटी से बाहर नहीं लाए। दोपहर बाद उसे सीधे PICU में भर्ती कराया गया।

होश आया तो दिखना बंद हो चुका था
मरीज रिया लोधी की मां सविता लोधी ने बताया कि डॉक्टरों ने ऑपरेशन के दौरान लापरवाही की है। वह बुखार में थी और उसका ऑपरेशन कर दिया। बेटी को जब दो दिन बाद होश आया तो उसे कुछ भी दिख नहीं रहा था। 9 दिन बाद उसको करीब एक फीट के पास का हल्का हल्का दिखना शुरू हुआ है, लेकिन यह बहुत काफी कम हैं। वह घबरा भी रही है।

ओटी में पल्स, हॉर्टबीट चली गई थी
रिया की मां सविता के अनुसार शुक्रवार को ऑपरेशन थिएटर में जब चार घंटे तक बेटी को बाहर नहीं लाए तो स्टाफ और डॉक्टरों से पूछा तो बताया कि ऑपरेशन तो ठीक हो गया था, बच्ची के दिल की धडकन, पल्स बंद हो गई थी, बमुश्किल उसे वापस लाए हैं। डॉक्टरों ने अपनी गलती उल्टे परिजन पर डाल दी कि आप लोगों ने बताया नहीं कि बच्ची को बुखार था। जबकि ऑपरेशन से पहले दर्जनों जांचे कराते हैं।
ब्रेन में ब्लड क्लॉटिंग है, इस कारण रोशनी कम हुई
रिया की आंखों की रोशनी चली गई, यह मामला मेरी जानकारी में आया है। पैर का ऑपरेशन सेकंड यूनिट के डॉक्टरों ने किया है। लापरवाही जैसी कोई बात नहीं है। बच्ची की एमआरआई कराई है, उसमें ब्रेन में ब्लड क्लॉटिंग है, जिस कारण आंखों में दिक्कत हुई है। इलाज चल रहा है। ऑपरेशन में मरीज के परिजन से इसलिए सहमति पत्र पर हस्ताक्षर कराए जाते हैं।
- डॉ. राजेश जैन, एचओडी, ऑर्थोपेडिक्स विभाग, बीएमसी, सागर












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