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Board Exam. पेपर लीक मामलाः घर के बाहर ताला डालकर अंदर ही छिपी थी सरगना, गिरफ्तार

10वीं बोर्ड परीक्षा का पेपर लीक मामले में दमोह जिले के तेंदूखेड़ा गुरूकुल स्कूल की संचालिका को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। वह घर के अंदर ही फरारी काट रहीं थी।

10वीं पेपर लीक मामले की मास्टर माइंड स्कूल संचालिका गिरफ्तार


मध्य प्रदेश के दमोह जिले में 10वीं बोर्ड परीक्षा के विज्ञान, गणित व अंग्रेजी का पेपर लीक कांड में मुख्य आरोपी निजी स्कूल गुरूकुल की संचालिका सुधा त्रिपाठी आखिरकार पुलिस के हत्थे चढ़ ही गईं। वहीं प्राचार्य व केंद्राध्यक्ष केएल शाक्य अभी फरार ही बताया जा रहा है। बता दें कि सैलबाड़ा पेपर लीक मामले में पुलिस के हाथ कई अहम सुराग लगे हैं, जिसके बाद पुलिस ने पेपर लीक मामले की मास्टर माइंड सुधा त्रिपाठी को गिरफ्तार कर लिया है। जिसे शाम को तेन्दूखेड़ा न्यायालय में पेश किया जहां से उसे जेल भेज दिया गया है।

तेन्दूखेड़ा पुलिस ने सुधा त्रिपाठी को उनके घर से ही गिरफ्तार किया है। पेपर लीक होने के बाद ही इनके घर के मुख्य दरवाजा पर बाहर से एक बड़ा ताला नजर आ रहा था। जिसमें माना जा रहा था कि सुधा त्रिपाठी अपने कुनबे के साथ फरार हो गई हैं। पिछले चार दिनों से घर का कोई सदस्य बाहर भी नहीं निकल रहा था। तेन्दूखेड़ा पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली तो पुलिस ने बाहर पड़ा ताला तुड़वाया और घर के अंदर प्रवेश करते हुए तलाशी ली तो एक कमरे में मैडम दुबकी मिलीं। साथ गई महिला पुलिस ने उन्हें तत्काल दबोच लिया। थाने में पूछताछ के बाद शाम को तेन्दूखेड़ा न्यायाधीश जगमोहन की कोर्ट में पेश किया गयाए जहां से जेल भेज दिया गया है। बताया जा रहा है कि सुधा त्रिपाठी की गिरफ्तारी पूर्व में गिरफ्तार चार आरोपियों के बयानों के आधार पर की गई है। जिन्होंने भी अपने बयानों में पेपर लीक, नकल व पास कराए जाने का मास्टर माइंड सुधा त्रिपाठी व केएल चौकसे को ही बताया था। इन बयानों के आधार पर पर्याप्त सबूतों के बाद ही सुधा त्रिपाठी को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है।

10वीं पेपर लीक मामले की मास्टर माइंड स्कूल संचालिका गिरफ्तार

शिक्षा माफिया के रुप में 15 सालों से पास कराने का चल रहा खेल
संचालिका सुधा त्रिपाठी एक बड़ी शिक्षा माफिया के रूप में पिछले 15 सालों से कमजोर विद्यार्थियों को बगैर पढ़ाई अच्छे अंकों से पास कराने का गोरखधंधा चला रही थीं। शिक्षा विभाग में दमोह से लेकर भोपाल तक तथा प्रदेश से बाहर यूपी व बिहार तक फैला बताया जा रहा है। जिसमें मोटी फीस लेकर नियमित एडमिशन कराया जाता था। साल भर स्कूल नहीं लगता था। एक भी विद्यार्थी कक्षाओं में नहीं पहुंचता था। परीक्षा के दौरान ही बाहरी परीक्षार्थी तेन्दूखेड़ा आते थे। जिन्हें लीक पेपर उपलब्ध कराने के साथ ही परीक्षा कक्षों में नकल की व्यवस्था भी कराई जाती थी।

दमोह में रुके थे यूपी व बिहार के विद्यार्थी
दमोह शहर की विभिन्न होटलों में यूपी व बिहार के कई विद्यार्थी परीक्षा के दौरान रूके रहे हैं। जिनके नाम व पते होटल के रजिस्टर में दर्ज हैं। साथ ही होटलों में इनके आधार कार्डों की फोटो काॅपियां उपलब्ध हैं, जिन्हें पुलिस अपनी आगे की विवेचना में ले सकती है। इसके अलावा जबलपुर से भी अपडाउन करते थे। जो जबलपुर से टैक्सियां लेकर आते थे। पहले दिन की परीक्षा के दौरान जेडी सागर मनीष वर्मा ने दबिश दी तो नकल न करा पाए बाहरी छात्रों ने गुरुकुल स्कूल में तोड़फोड़ की थी। इसके दूसरे पेपर के दौरान भी नकल न कर पाने का आक्रोश इनके घर पर फूटा था, जिसमें संचालिका सुधा त्रिपाठी के साथ मारपीट के साथ तोड़फोड़ की बात सामने आई थी।

नकल पर नकेल से ही पेपर लीक का खेल
विश्वस्त सूत्रों की मानें तो गुरुकुल स्कूल संचालिका सुधा त्रिपाठी व सीएम राइज स्कूल प्राचार्य केएल चौकसे ने ही जंगल में सुनसान में बने सैलबाड़ा परीक्षा केन्द्र को पेपर लीक का जरिया बनाया। मामला इसलिए भी सेट हो गया, क्योंकि सैलबाड़ा के केन्द्राध्यक्ष फागूलाल पटेल पहले जब गुरूकुल स्कूल परीक्षा केन्द्र बनता था तब वह केन्द्राध्यक्ष रह चुका था जिसके बाद भृत्य छोटू रजक के साथ अन्य कड़िया जुड़ती गई और पेपर लीक होकर परीक्षार्थियों तक पहुंचते रहे हैं।

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    स्कूल में आवेदन देकर फरार
    सीएम राइज स्कूल के प्राचार्य केएल चौकसे पेपर लीक कांड खुलने के दौरान स्कूल में थे। जैसे ही छोटी मछलियां दबोचने की खबर इन तक पहुंची तो वह स्कूल में नागपुर में इलाज कराने के नाम पर 4 दिन का आवेदन रखकर चले गए है। सूत्रों से जानकारी मिल रही है कि सुधा त्रिपाठी की तरह ही केएल चौकसे भी अपने नातेदारों के घर में छिपकर पेपर लीक मामले से बेदाग होने के रास्ते तलाश रहे हैं। जबकि पूर्व में गिरफ्तार आरोपियों ने इनको ही मुख्य सरगना बताया है।

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