क्या होगा अगर स्वामी प्रसाद मौर्य की हुई सपा में एंट्री?
जी हां, स्वामी प्रसाद मौर्या के सपा में जाने की अटकलों के बीच ये सवाल लोगों के जहन में आना लाज़मी है। जहां कुछ लोग स्वामी के सपा में पलायन को लेकर समाजवादी पार्टी के पक्ष में फायदे की उम्मीद पालकर बैठे हैं, वहीं तथ्य यह भी है कि यदि वाकई स्वामी सपा में चले जाते हैं तो वे अपने समर्पित कार्यकर्ताओं को विधानसभा चुनाव में टिकट का भरोसा भी दिलाएंगे।
पढ़ें- लखनऊ से चारों दिशाओं में निकलेंगे फोर-लेन हाईवे

यदि टिकट दिया गया तो समाजवादी पार्टी के साथ बीते कई वर्षों से कार्य कर रहे सक्रिय कार्यकर्ताओं को नजरंदाज भी किया जा सकता है। इस स्थिति में समाजवादी पार्टी को नफा की बजाए नुकसान होने की पूरी संभावना है।
पलायन से क्या हो रहा है अंदरूनी प्रभाव?
बीते माह कभी कांग्रेस के साथ जुड़े रहे बेनी प्रसाद वर्मा कांग्रेस का दामन छोड़कर सपा के पाले में शामिल हो गए थे। जिसके बाद सपा के एक खेमे में जश्न का माहौल दिखा तो वहीं एक खेमा अपनी शक्ति खो देने की वजह से सन्नाटे में नजर आया। दरअसल बाराबंकी जिले के रामनगर क्षेत्र से अरविंद सिंह गोप मौजूदा सपा सरकार में ग्राम्य विकास मंत्री के पद पर हैं।
पढ़ें- किसमें होगी स्वामी की एंट्री- सपा या भाजपा?
माना जाता है कि बेनी प्रसाद वर्मा के सपा में आने से पूर्व अरविंद सिंह गोप का कद बाराबंकी में सबसे ऊपर था लेकिन बेनी बाबू के आ जाने के बाद अरविंद का कद घट गया है। सपा में शामिल होते ही बाराबंकी में कई होर्डिंग में बेनी प्रसाद वर्मा के साथ अरविंद सिंह गोप नदारद रहे। कहीं न कहीं इससे राजनीति की गुटबाजी का अंदाजा लगाया जा सकता है।
विश्लेषकों की क्या है राय?
इसके इतर चुनावी विश्लेषकों की मानें तो उनका साफ तौर पर कहना है कि कहीं न कहीं मौर्या वोट बसपा, सपा के पाले से फिसलकर भाजपा खेमे में आ जाएगा। क्योंकि सपा से मौर्या वोट खुद को अलग रखकर देखता रहा है।
ऐसे में जो खेमा बसपा के साथ स्वामी प्रसाद मौर्या की वजह से जुड़ा था उसका एक अलग दल के साथ जाना स्वाभाविक है। बहरहाल खामियाजे की बात हो या फिर फायदे की...दोनों पर से तस्वीरें चुनावों के परिणामों के दौरान ही साफ हो पाएंगी।












Click it and Unblock the Notifications