दुर्दांत विकास दुबे की पत्नी रिचा ने जताया न्याय प्रणाली पर भरोसा, कहा- पुलिस ने पहले किया इस्तेमाल और फिर...
लखनऊ। दुर्दांत विकास दुबे एनकाउंटर की न्यायिक जांच शुरू होने के बाद उसकी पत्नी रिचा दुबे ने न्याय प्रणाली पर भरोसा जताया है। रिचा दुबे ने कहा कि उसे भरोसा है उसके पति के साथ न्याय होगा। दरअसल, विकास दुबे एनकाउंटर के 12 दिन बाद उसकी पत्नी रिचा दुबे सामने आई है। इस दौरान रिचा दुबे ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। रिचा ने कहा कि पुलिस ने विकास दुबे का इस्तेमाल किया और फिर उसे खत्म कर दिया।

न्याय की होगी जीत: रिचा दुबे
एनबीटी ऑनलाइन की खबर के मुताबिक, विकास दुबे की पत्नी रिचा दुबे ने दावा किया कि कोरोना वायरस के कारण लागू लॉकडाउन के दौरान पुलिसकर्मी बिकरू गांव में लंच और डिनर करते थे। रिचा ने बताया कि कई पुलिसकर्मी तो रात को भी उनके घर पर ही रुकते थे। उसने कहा, 'पुलिस ने उनका इस्तेमाल किया औऱ उसके बाद उन्हें खत्म कर दिया। मुझे देश के संविधान और न्याय पालिका पर पूरा भरोसा है और न्याय की जीत होगी।'

'विकास ने कहा था- लखनऊ वाले घर से भाग जाओ..'
विकास दुबे की पत्नी रिचा दुबे ने कहा कि जिस रात आठ पुलिसकर्मी मारे गए थे, उस रात लगभग दो बजे उनका (विकास दुबे) का फोन आया था। वो फोन आखिरी था, जब उनसे (विकास दुबे) से बात हुई थी। रिचा ने कहा, 'उन्होंने मुझसे कहा कि अपने लखनऊ वाले घर से तत्काल भाग जाओ, क्योंकि बिकरू में कई पुलिसकर्मी मारे गए हैं। मैं भाग गई औऱ एक मित्र के यहां मुझे शरण मिली। उन्होंने मुझसे वह अंतिम बार बात की थी और उसके बाद मुझे टीवी खबरो और अखबारों से ही सारी जानकारी मिली।'

'उतने क्रूर नहीं थे विकास, जितना उन्हें दिखाया गया'
रिचा दुबे ने कहा कि विकास दुबे उतने क्रूर नहीं थे, जितना उन्हें पुलिस और मीडिया द्वारा पेश किया गया। उसने कहा, 'वह अपराधी हो सकते हैं, लेकिन वह एक ख्याल रखने वाले पति और पिता थे। वह अपने दोनों बच्चों से बेहद प्यार करते थे।' हालांकि रिचा ने कहा कि 'मुझे नहीं पता कि उस रात बिकरू में क्या हुआ और क्यों हुआ। मेरे पति मर चुके हैं, लेकिन मेरी उम्मीद जिंदा है।'

'चाहते थे कि बच्चे बेहतर जिंदगी जीएं'
रिचा दुबे ने कहा, 'मेरी उनसे (विकास दुबे) मुलाकात 1990 में हुई थी। वो मेरे भाई राजू निगम के एक अच्छे मित्र थे। मेरे भाई ने ही हमारी शादी उनसे कराई थी। बताया कि विकास अपने गांव में विवादों को सुलझाने में लोगों की मदद करते थे और लोग अपनी समस्याओं को लेकर उनके पास आते थे। बिकरू में जो वह कहते थे, वही अंतिम शब्द होता था।' ऋचा ने आगे कहा कि अपनी आपराधिक प्रोफाइल के कारण दुबे ने 2004 में लखनऊ में एक घर बनाने का निर्णय लिया, ताकि बच्चे स्थानीय राजनीति से दूर रह सकें।












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