जनसंख्या नियंत्रण बिल: यूपी लॉ कमीशन के चेयरमैन ने दिया हर सवाल का जवाब, पढ़िए खास बातचीत
लखनऊ, 17 अगस्त। उत्तर प्रदेश राज्य विधि आयोग ने यूपी जनसंख्या नियंत्रण कानून का मसौदा बनाकर मुख्यमंत्री आदित्यनाथ को सौंप दिया है। इस मसौदे की टाइमिंग को लेकर हालांकि विपक्ष सवाल उठा रहा है। हालांकि आयोग के चेयरमैन जस्टिस आदित्यनाथ मित्तल ने बिल को लेकर फैले भ्रम पर विस्तार से बात की। इस दौरान उन्होंने अयोग के मसौदे पर सवाल खड़े करने वालों को आडे़ हाथों लेते हुए कहा कि इस बिल को लेकर एक समुदाय विशेष के मन में वही लोग भ्रम फैलाने का काम कर रहे हैं जो नागरिक कानून (एनआरसी) और कोविड वैक्सीनेशन को लेकर फैला रहा है।
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यूपी लॉ कमीशन के चेयरमैन ने वन इंडिया डॉट कॉम से एक्सक्लूसिव बातचीत के दौरान यह बातें कही। उन्होंने कहा, '' सवाल उठाने वालों को पहले इस रिपोर्ट को पढ़ना चाहिए। लोग एनआरसी और वैक्सीनेशन पर भी लोगों के बीच भ्रम फैला रहे थे। आप ही बताइए, नागिरकता कानून से कितने लोगों की नागरिकता गई है, वैक्सीनेशन ड्राइव से कितने लोग नपुसंक हुए हैं। जनता के बीच भ्रम फैलाने की बजाए लोगों को जागरुक करने की जरुरत है।''
प्रस्तुत है आदित्यनाथ मित्तल से बातचीत के प्रमुख अंश
सवाल- जनसंख्या नियंत्रण के मसौदे को आपने सीएम को सौंपा है। इसमें क्या क्या प्रावधान किए गए हैं
जवाब- जनसंख्या नियंत्रण कानून का मसौदा तैयार करने के बाद सीएम को सौंप दिया गया है। यूपी में जनसंख्या को नियंत्रण के लिए कदम उठाए जाने चाहिए। प्रदेश में ही नहीं पूरे देश में विभिन्न तरह की समस्याएं उत्पन्न होती है। इसलिए एक कानून की जरुरत महसूस की जा रही थी। इसके बाद ही इस दिशा में कदम उठाया जा रहा है। हमने रिपोर्ट में कहा है कि इस कानून का पालन करने वालों को सरकार कुछ सुविधाएं मुहैया कराए तथा जो इसका पालन नहीं करेंगे उनकी सुविधाओं में कटौती की जाएगी। सुविधाएं देने में सरकारी सेवा में हैं तो दो एडिशनल इंक्रीमेंट और सरकारी योजनाओं का लाभ दिया जाए। जो एक बच्च्े की पॉलिसी लेते हैं तो उस बच्चे के नाम से एक एफडी कर दी जाए वो सरकार तय करेगी। जो इसका पालन नहीं करेंगे उनको सुविधाएं नहीं दी जाए।
सवाल- नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद चौधरी ने इस बिल को लेकर सवाल खड़ा किया है। उनका कहना है कि इस लाने की जरुरत क्यों पड़ी, जबकि सरकारें पहले से ही हम दो हमारे दो को लेकर जागरुकता चला रही हैं ?
जवाब- हमने इस रिपेार्ट में भी जागरुकता अभियान का जिक्र किया है। हमने यह भी कहा है कि सरकार इसको लेकर लोगों के बीच सरकारी अभियान चलाए। इसके लिए आशा वकर्स और फील्ड लेवल के जो कार्यकर्ता हैं वो लोगों को समझा बुझाकर नसबंदी के लिए प्रेरित करें। यदि वो ऐसा करने में सफल होते हैं तो उन्हें मानदेय दिया जाए। जागरुकता तो फैल रही है फिर भी हमारी आबादी नियंत्रित नहीं हो रही है। देश में सत्तर हजार बच्चे प्रतिदिन पैदा होते हैं। क्या सरकार प्रतिदिन इतनी नौकरियां पैदा कर सकती है। मेरी समझ से नहीं कर सकती है।
सवाल- किसी महिला को एक बार में तीन या चार बच्चे पैदा हो जाते हैं जैसा कि इस तरह की घटनाएं सामने आती रहती हैं, उस दशा के लिए इस प्रावधान में क्या व्वयवस्था की गई है?
जवाब- रामगोविंद चौधरी से अनुरोध करुंगा कि जो रिपोर्ट हमने भेजी है वो उसका अध्ययन कर लें। हमने यह व्यवस्था दी है कि एक प्रसव के दौरान यदि एक से ज्यादा बच्चे होते हैं चाहे वो टि्वन हों या उससे भी ज्यादा हों तो उस स्थिति में उनकी संख्या एक ही मानी जाएगी। इसमें यह भी व्यवसथा है कि यदि एक बच्चा दिव्यांग या ट्रांसजेंडर है तो उसे तीसरा बच्चा पैदा करने की छूट प्रदान की गई है। अगर किसी एक बच्चे की डेथ हो जाती है तो उसे भी तीसरा बच्चा करने की छूट प्रदान की गई है।
सवाल- आयोग ने अपनी रिपोर्ट में दो से ज्यादा बच्चे होने पर लोगों को लोकल निकायों पर रोक लगाने की सिफारिश की है, लेकिन सवाल यह है कि आखिर लोकल निकाय ही क्यों, लोकसभा और विधानसभा क्यों नहीं ?
जवाब- आयोग ने आठ जुलाई 2021 को हमने अपना प्रस्ताव वेबसाइट पर डाला था, जिसमें 8500 से अधिक सुझाव आए थे। हमने सभी सुझावों का अध्ययन किया है। इसमें अधिकांश लोगों का मानना है कि ऐसे लोगों को लोकसभा एवं विधानसभा का चुनाव लड़ने से रोका जाना चाहिए। लेकिन हम लोग जो कानून बनात हैं वो संविधान के तहत होता है। संविधान में इस बात का उल्लेख है कि यह केंद्र सरकार का विषय है इसलिए राज्य सरकार इस पर कोई कानून नहीं बना सकती है।
सवाल- राज्य कर्मचारियों को लेकर इस रिपोर्ट में कहा गया है कि उन्हें शपथ पत्र देना होगा कि वो दो से ज्यादा बच्चे पैदा नहीं करेंगे
जवाब- सरकारी कर्मचारियों के लिए एक अंडरटेकिंग देनी होगी उसकी वर्तमान में कितने बच्चे हैं। उन्हें शपथ पत्र देना होगा कि वह इससे आगे परिवार नहीं बढ़ाएंगे। हालांकि इसे आप्शनल रखा गया है। हम जोर जबरदस्ती में विश्वास नहीं करते। लोगों को इसके लिए जागरुकता फैलाने की जरुरत है। इतिहास में गौर करें तो संजय गांधी ने नसबंदी अभियान चलाया था जो जबरन कराया गया था, इसके काफी दुष्परिणाम सामने आए थे। हमने इन सब बातों का ध्यान रखा है। आठ राज्यों ने पहले ही अपने यहां इस तरह का प्रतिबंध लगा रखा है कि उनके यहां दो से ज्यादा बच्चे होने पर पंचायत इलेक्शन लड़ने पर प्रतिबंध लगाया गया है।












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