Lucknow Mahotsava News: लखनऊ महोत्सव को लेकर सरकार ने उठाया ये बड़ा कदम, जानिए क्यों निराश हुए लोग
Lucknow News: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के लोगों को इस बार भी मायूसी हाथ लगी है क्योंकि लखनऊ में कला और संस्कृति का जश्न मनाने वाला बहुप्रतिक्षित उत्सव लखनऊ महोत्सव रद्द कर दिया गया है। हालांकि सरकार की तरफ से इसको लेकर कोई ठोस वजहें नहीं बतायी गई हैं। इस बड़े आयोजन के रद्द होने के बाद अब विपक्ष ने सरकार पर सवाल खड़ा करना शुरू कर दिया है।

लखनऊ महोत्सव अवध क्षेत्र और उससे आगे की कला और संस्कृति का जश्न मनाने वाला त्योहार जो पांच साल बाद वापसी करने के लिए पूरी तरह तैयार था लेकिन अब इसका आयोजन नहीं किया जाएगा।
इस सांस्कृतिक समारोह का आयोजन हर साल 25 नवंबर से 5 दिसंबर तक आशियाना में कांशीराम स्मृति उपवन में किया जाना था, लेकिन अज्ञात कारणों से इसे अनिश्चित काल के लिए बंद कर दिया गया है। पिछली बार महोत्सव का आयोजन 2018-19 में लखनऊ में किया गया था।
क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी कल्याण सिंह यादव ने कहा, "पर्यटन विभाग ने पहले स्टालों और अन्य चीजों के लिए निविदाएं जारी कर दी थीं, लेकिन अचानक चीजों को रोक दिया गया है।" वहीं प्रमुख सचिव पर्यटन एवं संस्कृति मुकेश मेश्राम ने कहा, ''कुछ अपरिहार्य परिस्थितियों के कारण इस वर्ष लखनऊ महोत्सव आयोजित नहीं किया जाएगा।''
राज्य सरकार के अंदर के सूत्रों ने कहा कि सरकार महोत्सव आयोजित करने की इच्छुक नहीं थी क्योंकि वह जनवरी के महीने में यूपी दिवस का आयोजन करती है। यदि महोत्सव का आयोजन हुआ भी तो यूपी दिवस के आसपास ही होगा।
समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता राजीव राय ने कहा, ''लखनऊ की असली संस्कृति को प्रदर्शित करने वाला कार्यक्रम पिछले पांच साल से आयोजित नहीं किया गया है। बीजेपी की ओर से साफ संकेत है कि जब तक वे सत्ता में हैं, तब तक लखनऊ की जनता जनता राजा या दीपोत्सव जैसे नाटक ही देख सकेगी। यह हर किसी को देखना है कि धन कहां खर्च किया जा रहा है और वे किसका प्रचार कर रहे हैं।''
राय ने कहा कि, "कोई नहीं पूछ रहा कि लखनऊ महोत्सव के लिए चिन्हित धनराशि लखनऊ में क्यों नहीं खर्च की जाती? जब टेंडर प्रक्रिया शुरू हो गई थी तो आयोजन क्यों नहीं हुआ? हम जो देख पा रहे हैं उसमें कुछ और भी है।"
कांग्रेस पार्षद और प्रवक्त सीपी राय ने कहा, "हम देख सकते हैं कि कोई भी कार्यक्रम जो वास्तविक कला, संस्कृति, भाषा और सद्भाव को बढ़ावा देता है, राज्य सरकार द्वारा आयोजित नहीं किया जाता है। पिछले पांच वर्षों से सांस्कृतिक और विकास गतिविधियां गोरखपुर और वाराणसी जैसे क्षेत्रों तक ही सीमित रही हैं।''












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