क्या यूपी में संभल बन रहा है दूसरा आजमगढ़?
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में आजमगढ़ को भटकल के शहर के तौर पर जाना जाता है, लेकिन कुछ इसी तर्ज पर संभल भी अगला आजमगढ़ बनने की राह पर है। हालांकि किसी भी शहर के नाम को आतंक से जोड़ना गलत है लेकिन हाल फिलहाल में जो घटनायें संभल में हुई है वह इस ओर ही इशारा करते हैं।
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यूपी के संभल के बारे में बात करते समय कुछ बातों को याद रखना बेहद जरूरी है। संभल दिल्ली से 172.7 किलोमीटर दूर है। अल कायदा के चीफ असीम उमर जोकि आईएसआईएस का सदस्य है। उसके कई साथी 1994 में यहां से गिरफ्तार हुए थे।
आईबी की रिपोर्ट की मानें तो केरल के रास्ते यहां पर सऊदी से काफी रुपया लाया जा रहा है। एक साल के भीतर एक्यूआईएस ने अपने नये मुखिया को चुना तो यह बात निकलकर सामने आयी कि वह उत्तर प्रदेश का है। आसिफ उमर और शेख उमर को भारत में नियुक्तियों को बढ़ाने का जिम्मा सौंपा गया था। जो तथ्य सामने आया उसमें यह बात निकलकर सामने आयी कि उमर ने 15 साल पहले संभल छोड़ पाकिस्तान चला गया था।
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एक्यूआईएस ने इस नियुक्ति को रणनीति के तौर पर किया था। जबकि उसका भारत से कनेक्शन और यूपी का जुड़ाव इस नियुक्तु में काफी अहम था। संभल से पहले भी काफी तत्व इस तरह के निकले हैं जिन्होंने अपराध की दुनिया में अपना नाम किया है। वाराणसी में 2006 में ब्लास्ट की जांच में पता चला कि इसके पीछे संभल का कनेक्शन है। यही नहीं लाल किले पर ब्लास्ट में भी संभल के ही कनेक्शन का तथ्य सामने आया था।
खुफिया विभाग की मानें तो गल्फ देशों से काफी पैसा यहां भेजा जाता है। कई लोगों के पास विदेशी मुद्रा भी पायी गयी थी। तकरीबन 40 जगहों पर यह पैसा बरामद किया गया था। आईबी के अधिकारियों का कहना है कि विदेशे से पैसा आना अच्छा संकेत नहीं है। पैसे का सबसे ज्यादा इस्तेमाल विचाराधारा को लोगों में फैलाने के लिए किया जाता है।












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