लोकसभा चुनाव: राजनीतिक दिग्‍गजों के बीच एक फक्‍कड़ प्रत्‍याशी

Tara Patkar: A candidate with no money
लखनऊ। भारतीय राजनीति की दिशा तय करने वाले सूबे उत्‍तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से एक लोकसभा उम्‍मीदवार जब नामांकन के लिये पहुंचा तो लोग हैरान रह गये। हैरान इसलिये क्‍योंकि उसके साथ ना ही मंहगी गाडि़यों का काफिला था और ना ही नारेबाजी करते हुए हजारों की भीड़। उसने चुनाव अयोग को जो संपत्ति का ब्‍यौरा दिया था उसमें एक अदद साइकिल और चंद रुपयों की जानकारी थी। अचल संपत्ति के नाम पर इस उम्‍मीदवार के पास कुछ भी नहीं है। अब आप सोच रहे होंगे कि भाजपा के राजनाथ सिंह, बसपा के नकुल दूबे, कांग्रेस की रीता बहुगुणा जोशी और सपा के अभिषेक मिश्र से सीधा मुकाबला करने वाला ये फक्‍कड़ उम्‍मीदवार कौन है?

इस उम्‍मीदवार का नाम है तारा पाटकर जो पिछले एक साल से लखनऊ को जाम व प्रदुषण से मुक्‍ति दिलाने के ना केवल खुद साइकिल से चलते हैं बल्कि लोगों को भी साइकिल से चलने की सलाह देते हैं। तारा पाटकर राज्‍य सरकार से 'साइकिल डे' घोषित करने की मांग कर रहे हैं। दो दशक तक पत्रकारिता के शिखर पर चमकने वाले पाटकर का मानना है कि जब तक राजनैतिक प्रदूषण के खिलाफ जंग नहीं छेडी जायेगी तब तक देश व प्रदेश को किसी भी प्रदूषण से मुक्ति नहीं मिलने वाली। विभिन्न राजनैतिक दलों के एजेण्डे में हाशिए पर डाल दिये गये पर्यावरण मुद्दे को ही पाटकर अपना सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा मानते हैं।

स्वस्थ लखनऊ, सुंदर लखनऊ व सुखी लखनऊ उनका नारा है। वह साइकिल से पूरे लोकसभा क्षेत्र का दौरा कर जनता से सीधे संवाद स्थापित करने का प्रयास कर रहे हैं। वह लखनऊ को प्रदूषण मुक्त, जाम मुक्त, गंदगी मुक्त, मच्छर मुक्त और बीमारी मुक्त बनाना चाहते हैं। साथ ही शहर के पर्यावरण प्रेमी नागरिकों को प्रोत्साहित करना चाहते हैं। वह दस पेड लगाने वाले को ग्रीन बोनस, अपने घर के बाहर नालियों व मुहल्ले को साफ सुथरा रखने वाले नागरिकों को क्लीन बोनस और सडक पर प्रदूषण व जाम को कम करने में योगदान देने वाले नागरिकों को स्ट्रीट बोनस दिलाना चाहते हैं।

पाटकर कहते हैं कि मिसाइल मैन के नाम से प्रसिद्ध पूर्व राष्‍ट्रपति एपीजे अब्‍दुल कलाम आजकल जहां भी जाते हैं लोगों से यही अपील करते हैं कि लोग दलगत की राजनीति से उपर उठकर कर्मठ व ईमानदार लोगों को चुनें और उन्‍हें संसद में भेजें। सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे तो देश भर में 50 निर्दल उम्मीदवारों के समर्थन में प्रचार करने के लिए जा रहे हैं। अपने अभियान की शुरूआत वे पूना से कर रहे हैं। संसद में देशभक्त और ईमानदार लोगों की जरूरत है न कि किसी पार्टी विशेष को बहुमत देने की। उत्तर प्रदेश में है तो बहुमत वाली अखिलेश सरकार। क्या कर रही है सब जानते हैं।

हम नागरिकों को सोचना होगा कि आखिर किसे और क्यों वोट दे रहे हैं, कहीं हम देश से दगा तो नहीं कर रहे। उन्होंने कहा कि ऐसी क्या बात है कि नक्सल प्रभावित इलाकों में भय के बावजूद 65 फीसदी मतदान होता है लेकिन नवाबों के इस शहर में मतदान का प्रतिशत 50 फीसदी भी नहीं हो पाता। सन 2009 में हुए लोकसभा चुनाव में तो लखनऊ में 35 फीसदी से कम मतदान हुआ था। मतदान के प्रति लोगों की ये उदासीनता भारी चिंताजनक है। हकीकत तो यह है कि 60 फीसदी से ज्यादा नागरिक तो किसी भी दल को वोट ही नहीं देना चाहते।

गर्मी बढ रही है, ऐसे में लोगों को घरों से निकालना बडी चुनौती है। मैं लोगों को ये समझाने की कोशिश कर रहा हूं कि मतदान ही असली महादान है। अगर आपने रक्तदान, नेत्रदान आदि नहीं किया तो कोई बात नहीं लेकिन मतदान अवश्य करिये। इससे आप अपना, मुहल्ले का, शहर का, प्रदेश और देश का कल्याण कर सकते हैं। जिस तरह से चुनाव में ड्यूटी करने वाले कर्मचारियों को सरकार भत्ता देती है, उसी तरह नागरिकों को वोटिंग बोनस देना चाहिए। देश से राजनैतिक प्रदूषण खत्म करने के लिए चुनावी महायज्ञ में आहुति देनी जरूरी है। बातचीत में उन्होंने अपने पत्रकारिता जीवन, सामाजिक सरोकार, पर्यावरण आंदोलन व हजारों किमी की साइकिल यात्रा के साथ-साथ वर्तमान राजनीति पर भी बेबाकी से अपनी राय रखी और कहा कि हमें मिल-जुल कर लखनऊ को देश का सबसे खूबसूरत शहर बनाना है।

लोकसभा चुनाव भले ही राष्ट्रीय मुद्दों पर लडा जाता हो लेकिन उन स्थानीय समस्याओं को कैसे नजरअंदाज किया जा सकता है जो कैंसर जैसी बीमारी बनकर हमारे लिए नासूर बनती जा रही हैं। वह लखनऊ को मच्छरमुक्त बनाना चाहते हैं। इसके लिए वह नगर निगम के सहयोग पूरे शहर में बिना भेदभाव के युद्धस्तर पर फागिंग करवायेंगे। जन सहयोग से विशेष सफाई अभियान चलवायेंगे। स्कूलों में, मुहल्लों में नियमित रूप से स्वास्थ्य शिविर लगवायेंगे। गोमती नदी, शहर की सांस्कृतिक व ऐतिहासिक विरासतों को संजोने के लिए कार्य करेंगे।

बुजुर्गों व महिलाओं के लिए सीनियर सिटीजन क्लब व महिला क्लब खुलवायेंगे जिसमें समाचार पत्र, पत्रिकाएं, इंडोर गेम्स आदि के साथ उनकी मदद के लिए डाक्टर व वकील भी होंगे। सभी बाजारों में महिला व पुरूष टायलेट बनवायेंगे जिनकी सभी जगह बेहद कमी है। पटरी दुकानदारों को पुलिस व नगर निगम की तानाशाही से मुक्त करायेंगे। गरीबी का मजाक उडाने वाली न्यूनतम आय की सीमा रेखा को बदलवाने के लिए संघर्ष करेंगे। ग्रामीण व शहरी इलाकों के लिए निर्धारित यह सीमा रेखा क्रमशः 26 व 32 रूपये को क्रमशः 300 व 400 रूपये प्रतिदिन करवायेंगे।

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