यूपी के चुनावी दंगल में भगवान राम के नाम पर सियासी पार्टियों में अखाड़ा शुरु
भाजपा और सपा की राम के नाम पर राजनीति के बाद बसपा सुप्रीमों भी इस रेस में पीछे नहीं रहना चाहती है। सूत्रों की मानें तो जल्द ही मायावती भी राम जन्मभूमि पर बड़ा ऐलान कर सकती हैं।
लखनऊ। जिस तरह से उत्तर प्रदेश चुनाव से पहले एक बार फिर से भगवान राम राजनीति के शीर्ष पर आए हैं उसने प्रदेश मे तमाम मुद्दों को दरकिनार कर दिया है। एक बार फिर से भाजपा, सपा और बसपा इस मुद्दे पर चुनावी माहौल तैयार करने की कोशिशों में जुट गई हैं।


मायावती भी कर सकती है बड़ा ऐलान
भाजपा और सपा की राम के नाम पर राजनीति के बाद बसपा सुप्रीमों भी इस रेस में पीछे नहीं रहना चाहती है। सूत्रों की मानें तो जल्द ही मायावती भी राम जन्मभूमि पर बड़ा ऐलान कर सकती है। मायावती इस ऐलान के लिए अयोध्या की जमीन को चुन सकती हैं।

सवर्णों के लिए पार्टी का दरवाजा खोला
बसपा के सूत्रों के अनुसार मायावती यूपी की राजनीति को ध्यान में रखते हुए भगवान राम को लेकर कोई बड़ा ऐलान कर सकती हैं। माना जा रहा है कि जिस तरह से उन्होंने ब्राह्मण और सवर्ण वर्ग के लोगों के लिए पार्टी के दरवाजे खोले हैं वह इस ओर इशारा करती है।

सपा भी कर चुकी है थीम पार्क का ऐलान
मायावती से पहले सपा ने सोमवार को अपनी कैबिनेट की बैठक में अयोध्या में अंतर्राष्ट्रीय थीम पार्क बनाने का ऐलान किया था, इस थीम पार्क पर कैबिनेट में अपनी मुहर भी लगा चुकी है।

भाजपा बनाएगी रामायण म्यूजियम
जबकि भारतीय जनता पार्टी अयोध्या में रामायण म्यूजियम बनाने जा रही है, इसके लिए ना सिर्फ जमीन के चयन का काम शुरु हो चुका है बल्कि बजट का भी आवंटन हो चुका है। खुद पर्यटन मंत्री ने इस जगह का दौरा किया और इस बाबत जानकारी दी है।

महेश शर्मा ने किया जमीन का मुआयना
महेश शर्मा ने अयोध्या पहुंचकर वहां सरयू नदी पर पूजा अर्चना के बाद संत नृत्यगोपाल दास से मुलाकात की। उन्होंने बताया कि रामायण सर्किट के लिए हमारी सरकार ने 225 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया है। उसमें से आधे से अधिक 151 करोड़ रुपये की धनराशि केवल अयोध्या के विकास पर खर्च की जाएगी।

कांग्रेस भी कूद सकती है मैदान में
ऐसे में प्रदेश में राम मंदिर के मुद्दें पर प्रदेश की सभी सियासी पार्टियों ने कमर कस ली है। हालांकि इस रेस से कांग्रेस ने अभी दूरी बना रखी है। लेकिन जिस तरह से किसान यात्रा के दौरान राहुल गांधी ने तमाम मंदिरों में माथा टेका और पहली बार गांधी परिवार के ऐसे सख्श बने जिन्होंने अयोध्या का दौरा किया था।

राहुल खेल चुके हैं सॉफ्ट हिंदुत्व का कार्ड
राहुल गांधी की यूपी किसान यात्रा पर नजर डालें तो इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि पार्टी सॉफ्ट हिंदुत्व के मुद्दे को प्रदेश चुनाव में दरकिनार नहीं करना चाहती है। हालांकि पार्टी की ओर से इस बाबत कोई बयान नहीं आया है कि राम मंदिर के निर्माण में उनका क्या रुख है।

क्या होगा अयोध्या के लोगों का
बहरहाल यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या एक बार फिर से भगवान राम के नाम पर तमाम सियासी पार्टी सियासत की उंचाइयों पर पहुंच पाती हैं, या एक बार फिर से प्रदेश की जनता राम के नाम छला महसूस करती है।












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