दिल्ली से लखनऊ पहुंचने में लगा 24 घंटे का समय, वीडियो बनाकर रेलवे को की शिकायत
रेलवे आज भी आम लोगों के आवागमन का महत्वपूर्ण साधन है पर इसमें जिस तरह से लापरवाही की जाती है उसका ख़मियाजा सभी यात्रियों को भुगतना पड़ता है। उत्तर प्रदेश में हाल ही में एक वीडियो वायरल हुआ है जिसमे एक शक्श वीडियो बनाकर रेलवे प्रशासन के ऊपर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहता है कि 500 किलोमीटर के सफर को तय करने में 24 घंटों से अधिक हो चुके हैं और वह अपने छोटे बच्चे के साथ किस कदर परेशान हो चुका है। बच्चा भूका है और उसे तो अभी 500 किलोमीटर आगे बिहार जाना है।

बच्चे के लिए दूध की व्यवस्था करना पड़ा भारी
दरअसल यह आदमी दिल्ली से बिहार जाने के लिए दिल्ली टू छपरा वाली गाड़ी पर बैठा था। दिल्ली से बिहार के रास्ते में लखनऊ स्टेशन पड़ता है। दिल्ली से लखनऊ की दूरी महज 500 किलोमीटर ही है परन्तु इस शक्श के अनुसार जब इसने वीडियो बनाया तब 24 घंटे बीत चुके थे और ट्रैन अभी आधे रास्ते यानी लखनऊ ही पहुंची थी। यह सफर ट्रैन स्वरा अमूमन 12 से 14 घंटे में तय कर लिया जाना चाहिए। वीडियो में इसने यह भी बताया कि इसके साथ इसकी फैमिली है और एक मासूम बच्चा भी है। उसको दूध की व्यवस्था में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। और तो और अभी आगे का सफर तय करना बाकी है जो कि 500 किलोमीटर आगे यानी कि छपरा बिहार में जाना था। जिसको लेकर यात्री ने वीडियो बनाकर इसको वायरल किया और रेलवे प्रशासन के ऊपर लापरवाही का आरोप लगाया है। जब महत्वपूर्ण मार्गों पर चलने वाली ट्रेन का यह हाल है तो सवारी गाड़ियों की हालत का अंदाज़ा आसानी से लगाया ही जा सकता है।

राजनैतिक परिस्तिथियाँ भी रही हैं ज़िम्मेदार
भारतीय रेलवे की इस दुर्दशा का राजनैतिक परिस्थितियों को भी काफी हद तक ज़िम्मेदार माना जा सकता है क्योंकि जब भी रेल के सुधार की बातें शुरू हुई तो रेल कर्मचारियों से जुड़े हुए संगठनों ने ही सबसे अधिक विरोध करने की प्रवृत्ति सदैव ही बनाये रखी है जिससे वे आवश्यक सुधार भी कहीं रुक से गए जो समय के साथ भारतीय रेल के लिए जीवनदायी और आर्थिक रूप से बहुत प्रभावशाली भी हो सकते थे। खैर हम उम्मीद ही कर सकते है कि भविष्य में राजनीती के साथ साथ भारतीय रेल के विकास का कार्य हो सके।
साथ ही इस तरह के मामले में जिस तरह से सभी अपनी ज़िम्मेदारी दूसरों पर डालने के लिए ही तैयार दिखाई देते हैं उससे भी परिस्थिति और बिगड़ती जाती है। लापरवाह कर्मचारियों के खिलाफ भी सख्त कार्यवाही करने के बारे में भी सोचना शुरू करने का अब समय आ गया है क्योंकि केवल यात्रा टिकट और कैसी भी यात्रा करने के लिए अभिशप्त रेलयात्रियों की यात्रा को सुखद बनाने के लिए अब इस तरह के परिवर्तन की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

सोशल मीडिया बनता जा रहा है जागरूकता का बड़ा साधन
पिछले कुछ वर्षों में हमने देखा है की ऐसी कई घटनाए सामने आई हैं जिनमे सोशल मीडिया पर लोगों के वीडियो प्रशाशन की लापरवाही का विरोध करते हुए वायरल हुए हैं। और ये वीडियो केवल वायरल ही नहीं हुए बल्कि इसपर एक्शन लेते हुए कई बार प्रशाशन ने सुधर भी किया है। लेकिन जिस तरह से रेल मंत्री के ट्वीटर हैंडल से कई लोगों को सही समय पर उचित मदद मिलनी शुरू हो चुकी है उस परिस्थिति में अब इस व्यवस्था को और भी अधिक मज़बूत बनाये जाने की भी आवश्यकता है क्योंकि यदि रेलमंत्री के हैंडल पर इस तरह की शिकायतों की भरमार जो जाएगी तो आने वाले समय में उनके हैंडल से भी इसे सही तरह से नियंत्रित नहीं किया जा सकेगा।
ऐसे किसी भी मामले के लिए निश्चित तौर पर रेलवे के पास कोई व्यवस्था होगी पर संभवतः उसका अनुपालन नहीं किया जा रहा है जिससे भी आमतौर पर यात्रियों को इस तरह की समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। इनसे निपटने के लिए अब रेल मंत्रालय को कुछ नयी तरह से सोचने की भी आवश्यकता है क्योंकि बिना इसके स्टाफ पर दबाव नहीं बनाया जा सकता है। अभी तक जिस तरह से इन शिकायतों के लिए यात्री भी पहल नहीं करना चाहते हैं तो उस स्थिति में स्टाफ को और भी अधिक निरंकुश होने की छूट मिल जाती है.












Click it and Unblock the Notifications