काम करते-करते कुर्सी से गिरी HDFC बैंक की अधिकारी की मौत, अखिलेश यादव ने उठाए गंभीर सवाल
एक और कर्मचारी की ऑफिस में मौत का मामला सामने आया है। ताजा मामला यूपी की राजधानी लखनऊ में आया है, यहां एचडीएफसी बैंक की कर्मचारी की ऑफिस में ही मौत हो गई। जानकारी के अनुसार लखनऊ के गोमती नगर स्थित विभूति खंड में एचडीएफसी बैंक की कर्मचारी सदफ फातिमा की मौत हो गई है। सदफ फातिमा एचडीएफसी बैंक की विभूतिखंड शाखा में एडिशनल डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट के पद पर थीं।
मंगलवार की दोपहर तकरीबन 3 बजे जब सदफ ऑफिस में काम कर रही थीं तो अचानक से वह कुर्सी से नीचे गिर गईं और बेहोश हो गईं। जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उन्हें डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। सदफ की मौत के बाद उनके साथी कर्मचारियों का कहना है कि उनपर काम काफी दबाव था और वह तनाव में थीं।

मौत की वजह साफ नहीं
इस घटना के बाद पुलिस ने इसकी जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस का कहना है कि मौत की वजह अभी नहीं पता चल पाई है। पोस्टमार्ट की रिपोर्ट के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा। शुरुआती जांच में हार्ट अटैक की बात सामने आई है।
जिस तरह से वर्क लोड के चलते पिछले कुछ दिनों में कर्मचारियों की मौत का मामला सामने आया है, उसके बाद ऑफिस में वर्क प्रेशर को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी इस मामले में अपनी प्रतिक्रिया दी है।
अखिलेश यादव ने साधा निशाना
इस घटना को लेकर सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने मोदी सरकार पर निशाना साधा है। अखिलेश यादव ने कहा लखनऊ में काम के दबाव और तनाव के कारण एचडीएफ़सी की एक महिलाकर्मी की ऑफिस में ही, कुर्सी से गिरकर, मृत्यु का समाचार बेहद चिंतनीय है।
ऐसे समाचार देश में वर्तमान अर्थव्यवस्था के दबाव के प्रतीक हैं। इस संदर्भ में सभी कंपनियों और सरकारी विभागों तक को गंभीरता से सोचना होगा। ये देश के मानव संसाधन की अपूरणीय हानि है।
ऐसे आकस्मिक निधन काम के हालातों को सवालों के घेरे में ले आते हैं। किसी भी देश की असली तरक़्क़ी का पैमाना सेवा या उत्पाद के आँकड़े का बढ़ना नहीं होता बल्कि ये होता है कि व्यक्ति मानसिक रूप से कितना स्वतंत्र, स्वस्थ व प्रसन्न है।
भाजपा सरकार की नीतियों में दिक्कत
भाजपा सरकार की नाकाम आर्थिक नीतियों के कारण कंपनियों का काम-कारोबार इतना घट गया है कि अपने व्यापार-व्यवसाय को बचाने के लिए वो कम लोगों से कई गुना काम करवाती हैं।
ऐसी आकस्मिक मृत्यु के लिए जितनी भाजपा सरकार ज़िम्मेदार है उतने ही जनमानस को मानसिक रूप से हतोत्साहित करनेवाले भाजपाइयों के बयान भी। इस समस्या से उबरने के लिए कंपनियों और सरकारी विभागों को 'तत्काल सुधार' के लिए सक्रिय और सार्थक प्रयास करने चाहिए।
पुणे में भी हुई थी कर्मचारी की मौत
बता दें कि इससे पहले एर्न्स्ट एंड यंग की कर्मचारी की भी कथित तौर पर वर्क प्रेशर की वजह से मौत हो गई। पुणे में कार्यरत एना सेबास्टियन पेरयिल की मां ने कहा कि उनकी बेटी की मौत बहुत अधिक काम के दबाव के चलते हुई है। वह देर रात तक काम करती थी, उसे सांस लेने की भी फुर्सत नहीं थी।












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