नरेंद्र मोदी की रैली में रह गईं ये 6 बड़ी कमियां
लखनऊ। भाजपा के पीएम पद के प्रत्याशी नरेंद्र मोदी किस संसदीय सीट से लोक सभा चुनाव लड़ेंगे इस पर सबकी नजर है। लेकिन जिस प्रकार लखनऊ रैली में अव्यवस्था रही, उससे यह साफ है कि भाजपा के कई बड़े नेता नहीं चाहते हैं कि मोदी लखनऊ की संसदीय सीट से चुनाव लड़ें। लखनऊ संसदीय सीट भाजपा के लिए मुफीद मानी जाती है। आखिर क्यों न हो, यहां से अटल बिहारी वाजपेयी सांसद जो रहे हैं।
इस बात की खबर थी कि अमीत शाह ने लखनऊ में फ्लैट ले लिया है और शायद मोदी लखनऊ से चुनाव लड़ें नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण में उत्तर प्रदेश और लखनऊ की तारीफों के पुल बाँधे, लेकिन लखनऊ की जनता की रैली में कोर्इ खास भागीदारी नहीं होने से यह स्पष्ट हो गया है कि मोदी राजधानी से चुनाव नहीं लड़ेंगे। और भी कई कारण हम आपको दिखायेंगे रैली की तस्वीरों के साथ, जिन्हें आप इस रैली की कमियों के रूप में देख सकते हैं।

मुसलमानों की भागीदारी
रैली में मुसिलम युवक भाजपा के झंडे उठाये खड़े थे। सम्भवत: उन्हीं को देखकर मोदी ने गुजरात में मुसलमानों के लिए किए गए अपने कार्यों का ब्यौरा देना उचित समझा। हालंकि उन्होंने पतंग के कारोबार और गुजरात में उस कारोबार को बढ़ाने में अपनी भूमिका बतार्इ पर लखनऊ के चिकन जरदोजी का जिक्र नहीं किया। इससे भी उनके लखनऊ से चुनाव लड़ने के कयास पर विराम लग गया।

गोरखपुर, बस्ती, गांडा से आये लोग
वैसे तो यह रैली अवध क्षेत्र के लिए बुलायी गयी थी पर इसमें पशिचम एवं गोरखपुर क्षेत्र के काफी भाजपा समर्थक नजर आये। पशिचम गन्ना किसान हाथ में गन्ना लिये हुये थे। शायद नरेंद्र मोदी की नजर उन पर नहीं पड़ी। इसीलिए उन्होंने अपने भाषण में गन्ना किसानों का जिक्र नहीं किया। इन किसानों की बड़ी रकम चीनी मिलों पर में बकाया है।

अटल की कर्म भूमि लखनऊ
अटल की कर्मभूमि भाषण करते हुए संकोच में नजर आये वह विवादित मुद्दों का जिक्र करने से मोदी पूरी तरह बचते हुए दिखाई दिये। उन्हेांने वंशवाद का भी जिक्र नहीं किया। इसका एक कारण यह था कि रैली में कर्इ बड़े नेताओं के पुत्र मौजूद थे। वह अवध क्षेत्र में राम मनिदर मुद्दे का जिक्र करने से बचे।

मुरली मनोहर जोशी
रैली में डा. मुरली मनोहर जोशी मोदी का स्वागत करने में शामिल थे। जोशी की 1991 में कन्याकुमारी से कश्मीर की एकता यात्रा के मोदी प्रबन्धक और सरथी थे। उसी यात्रा के बाद मोदी दिल्ली में पार्टी के संगठन में बड़े पद पर आये। और अपनी मार्केटिंग की बदौलत निरन्तर ऊँचाइयाँ चढ़ते गये।

नहीं दिखे आदित्य नाथ
गोरखपुर क्षेत्र के योगी आदित्य नाथ के बैनर और पोस्टर तो रैली में लगे थे पर वे दिखे नहीं। हालांकि गोण्डा के ब्रजभूषण शरण सिंह रैली में थे। बजभूषण शरण सिंह अपने आचरण से विवादित रहें हैं।

लखनऊ में मोदी
ट्रेन से पहुंचे लोगों के लिये रैली स्थल तक बसें नहीं, हैरान परेशान घूमते रहे लाखों लोग। यही नहीं लखनऊ के तमाम लोग भी रैली स्थल तक इसलिये नहीं पहुंच पाये, क्योंकि कम थे, क्योंकि सुरक्षा कारणों से कई किलोमीटर पहले ही वाहनों की आवाजाही बंद कर दी गई थी।












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