विकास दुबे की संपत्ति की जांच ED से कराने की एसआईटी ने की थी सिफारिश, अब योगी सरकार ने दी मंजूरी
लखनऊ। ED investigation in Vikas dubey property, 2 जुलाई की रात कानपुर जिले के बिकरू गांव में, जो हुआ वो किसी के जहन अभी तक निकल नहीं सका है। दरअसल, बिकरू गांव में विकास दुबे गैंग ने बिल्हौर सीओ देवेंद्र मिश्रा समेत आठ पुलिसकर्मियों की नृशंस हत्या कर दी थी। इस सामूहिक हत्याकांड मामले की जांच पड़ताल अभी जारी है। तो वहीं, अब प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ ने बड़ा फैसला लिया है।

सीएम ने इस घटना के मुख्य दोषी व दुर्दांत अपराधी विकास दुबे एवं उसके फाइनेंसरों की 147 करोड़ रुपए की संपत्तियों तथा उससे जुड़े लोगों की आय के विभिन्न स्रोतों की जांच प्रवर्तन निदेशालय से कराने का निर्णय लिया है। बता दें कि यह निर्णय विशेष जांच दल (एसआईटी) की सिफारिश के बाद लिया गया है। तो वहीं, राज्य सरकार के प्रवक्ता ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि अपर मुख्य सचिव संजय भूसरेड्डी की अगुवाई में गठित तीन सदस्यीय एसआईटी ने गैंगस्टर की अवैध तरीके से हासिल की गई 147 करोड़ रुपए की संपत्ति की प्रवर्तन निदेशालय से गहराई से जांच कराए जाने की सिफारिश की थी।
कहा कि, एसआईटी ने पिछले महीने के शुरुआत में सरकार को सौंपी गई अपनी जांच रिपोर्ट में कहा था कि दुबे और उसके फाइनेंसर सहित उससे जुड़े सभी अपराधियों के आय के स्रोत की जांच कराई जानी चाहिए। बता दें, अपर मुख्य सचिव संजय भूसरेड्डी अगुवाई में गठित तीन सदस्यीय एसआईटी ने 9 बिंदुओं को आधार बनाकर यह रिपोर्ट तैयार की थी, जिसमें करीब 3100 पन्ने है। 3100 पन्नों की रिपोर्ट में कहा कि विकास दुबे के साथ लगातार संपर्क में रहने और उसकी मदद करने के लिए इन अधिकारियों को भी दंडित किया जाना चाहिए।
क्या हुआ था 2 जुलाई की रात
बता दें, 2 जुलाई की मध्यरात्रि कानपुर के बिकरू गांव में विकास दुबे को गिरफ्तार करने पहुंची पुलिस टीम पर गैंगस्टर के साथियों ने ताबड़तोड़ गोलियां बरसाई थीं। जिसमें बिल्हौर सीओ देवेंद्र मिश्रा और एक थानाध्यक्ष समेत आठ पुलिसकर्मी मारे गए थे। तो वहीं, पांच पुलिसकर्मी, एक होमगार्ड और एक आम नागरिक इस गोली-बारी में घायल हो गए थे। घटना का मास्टरमाइंड विकास दुबे बीती 10 जुलाई को उज्जैन से कानपुर लाए जाने के दौरान एसटीएफ के साथ हुई मुठभेड़ में मारा गया था।












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