मायावती ने कहा- सड़कों पर प्रवासी मजदूरों की मौतें हृदयविदारक, सरकारें कारगर कदम उठाएं

लखनऊ। लॉकडाउन का सबसे बुरा असर गरीब मजदूरों और कामगारों पर पड़ रहा है। काम बंद हो गया, जेब खाली हो गईं। हजारों-लाखों की संख्या में ये श्रमिक अपने घरों की ओर लौटने को मजबूर हैं। इस दौरान ये लोग सड़क दुर्घटनाओं का भी शिकार हो रहे हैं। इन्हीं घटनाओ्ं को लेकर बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने मांग की है कि केंद्र और राज्य की सरकारें इस स्थिति से निपटने के लिए कारगर व्यवस्था तत्काल लागू करें।

bsp chief mayawati tweeted on plight of migrant labourers

मायावती ने शुक्रवार को ट्वीट किया, ''देश की सड़कों पर घर वापसी करते लुटे/लाचार लाखों प्रवासी मजदूर व उनके बिलकते परिवारों की भूख, बदहाली व रास्ते में हो रही मौतों के टीवी दृश्य हृदयविदारक व अति-दुःखद. ऐसे में केन्द्र/राज्य सरकारों द्वारा आज की उनकी जिन्दगी-मौत की लड़ाई से निपटने के लिए कारगर व्यवस्था तत्काल लागू हो।'' उधर, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी सरकार को घेरते हुए ट्वीट किया, ''श्रमिकों को काम पर लाने के लिए तो सरकार उद्योगपतियों को पास दे रही है पर घर लौट रहे उन बेबस मजदूरों के लिए कोई इंतजाम नहीं जो सड़कों पर भूखे-प्यासे मरने पर मजबूर हैं। अब सब जान गये हैं कि ये सरकार अमीरों के साथ है और मज़दूर, किसान, गरीब के खिलाफ है। भाजपा की कलई खुल गई है।

इससे पहले मायावती ने ट्वीट किया था, ''अभूतपूर्व कोरोना लाॅकडाउन के कारण देश की चरमराई स्थिति, अव्यवस्था व ध्वस्त अर्थव्यवस्था में थोड़ी सुधार के लिए केन्द्र ने जो भी कदम उठाए हैं उसपर विश्वास करते हुए बीएसपी का यही कहना है कि इसको जमीन पर ईमानदारी से लागू करने की जी-जान से कोशिश तत्काल शुरू कर देनी चाहिए।''मायावती ने कहा था कि लाचार/मजलूम करोड़ों प्रवासी मजदूरों के लिए जो 1,000 करोड़ रु की घोषणा की गई है वह यूपी जैसे अति-प्रभावित राज्यों को सीधे मिलनी चाहिए ताकि यह उन्हें उनके अपने पांव पर खड़े होने का वास्तविक सहारा बन सके व गरीबों/मजदूरों को आगे पलायन करने हेतु विवश न होना पड़े।

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