पीएम मोदी के इस दावे पर अखिलेश यादव ने उठाया सवाल, कहा- अगर ये सच है तो...

लखनऊ। पीएम मोदी ने राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में लॉकडाउन पार्ट-2 का ऐलान कर दिया है। प्रधानमंत्री ने तीन मई तक के लिए लॉकडाउन बढ़ा दिया है। पीएम मोदी ने कहा है कि 3 मई तक हम सभी को, हर देशवासी को लॉकडाउन में ही रहना होगा। पीएम मोदी के संबोधन के बाद समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सवाल उठाया है। अखिलेश यादव ने कहा कि जब सार्थक काम होंगे, तब ही सच में देश का भला होगा। अखिलेश यादव ने मंगलवार को ट्वीट करते हुए कहा, 'दावा है कि जब कोरोना के केस नहीं थे तब ही विभिन्न एअरपोर्ट्स पर स्क्रीनिंग शुरू कर दी गई थी, लेकिन सवाल ये है कि वो कितनी गंभीर और सार्थक रही। अगर ये सच है तो फिर ये बताया जाए कि कोरोना हमारे देश में पहले पहल कैसे आया।'

पीएम मोदी के इस दावे पर अखिलेश ने उठाया सवाल

पीएम मोदी के इस दावे पर अखिलेश ने उठाया सवाल

अखिलेश यादव ने ये सवाल पीएम मोदी के संबोधन में कही गई उस बात पर उठाया है जिसमें उन्होंने कहा, 'जब हमारे यहां कोरोना के सिर्फ 550 केस थे, तभी भारत ने 21 दिन के संपूर्ण लॉकडाउन का एक बड़ा कदम उठा लिया था. भारत ने समस्या बढ़ने का इंतजार नहीं किया, बल्कि जैसे ही समस्या दिखी उसे तेजी से फैसले लेकर उसी समय रोकने का प्रयास किया।' अखिलेश यादव ने कहा, 'अगर ये सच है तो फिर ये बताया जाए कि कोरोना हमारे देश में पहले पहल कैसे आया।' अखिलेश ने कहा कि जब सार्थक काम होंगे, तब भी सच में देश का भला होगा।

देश में 3 मई तक के लिए बढ़ाया गया लॉकडाउन

देश में 3 मई तक के लिए बढ़ाया गया लॉकडाउन

बता दें, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को कोरोना वायरस पर एक बार फिर से देश को संबोधित किया। पीएम नरेंद्र मोदी ने इस दौरान बड़ा ऐलान करते हुए मंगलवार यानि आज रात 12 बजे खत्म हो रहे लॉकडाउन को 3 मई तक के लिए बढ़ा दिया है। 24 मार्च को देश में 21 दिनों के लॉकडाउन की घोषणा की गई थी। पीएम मोदी ने कहा, 'आज पूरे विश्व में कोरोना वैश्विक महामारी की जो स्थिति है, आप उसे भली-भांति जानते हैं। अन्य देशों के मुकाबले, भारत ने कैसे अपने यहां संक्रमण को रोकने के प्रयास किए, आप इसके सहभागी भी रहे हैं और साक्षी भी।'

मायावती ने केंद्र सरकार से की ये अपील

मायावती ने केंद्र सरकार से की ये अपील

उधर, बसपा सुप्रीमो मायावती ने कहा, लॉकडाउन के दौरान राज्य सरकारों द्वारा दलितों और गरीबों की उपेक्षा की गई। सरकारों ने इनके लिए कोई व्यवस्था नहीं की। इस वजह से इस तबके के लोगों ने अपने-अपने घरों के लिए पलायन करना उचित समझा। इसके बाद सरकारों ने उन्हें ट्रकों और बसों से शेल्टर होम पहुंचाया। मायावती ने कहना है कि कोरोना की वजह से दलितों और गरीबों की स्थिति दयनीय हो गई है। मायावती ने केंद्र सरकार से अपील की कि लॉकडाउन के दौरान मजदूरों का ख्याल केंद्र सरकार रखे।

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