देश में आतंकियों तक पैसा पहुंचाने वाले 4 गिरफ्तार, यूपी के खीरी से टेरर फंडिंग पर बड़ा खुलासा

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में लखीमपुर खीरी का इलाका नेपाल से सटा है। खीरी जिले में 120 किलोमीटर तक की खुली सीमा पर आतंक को बढ़ावा देने वालों की नजर गई और उन्होंने इसको इस्तेमाल कर देश में आतंकियों तक पैसा पहुंचाने का रास्ता बना लिया। खुफिया एजेंसियों की नजरों से बचकर नेपाली रुपयों को भारतीय रुपयों में बदलकर टेरर फंडिंग के कारोबार में लगे चार लोगों की गिरफ्तारी जब खीरी जिले में हुई तो देश में आतंकी गतिविधियों के बारे में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए। खीरी क्राइम ब्रांच और निघासन इंस्पेक्टर दीपक शुक्ला की टीम ने ऐसे चार लोगों को गिरफ्त में लेने में सफलता पाई जो आतंकियों तक पैसे पहुंचाने के लिए लिंक का काम करते थे। एटीएस अब गिरफ्तार हुए उम्मेद अली, संजय अग्रवाल, समीर सलमानी और एराज अली से पूछताछ करने की तैयारी कर रही है ताकि इस आतंकी फंडिंग के आकाओं के बारे में और जानकारी मिल सके।

खीरी के तिकुनिया में बदलते थे करेंसी

खीरी के तिकुनिया में बदलते थे करेंसी

अब तक की जांच में पता चला है कि विदेशों से पैसा नेपाल के खातों में जमा किया जाता था और इसके बाद नेपाली करेंसी को खीरी के तिकुनिया में लाकर उसे भारतीय रुपयों में बदला जाता था। उसके बाद यह पैसा देश में आतंकी घटनाओं को अंजाम देने में लगे लोगों तक भेजा जाता था। गिरफ्तार उम्मेद अली बरेली का रहनेवाला है और टेरर फंडिंग के कारोबार में वह कई सालों से लगा है। उसका मामा मुमताज नेपाल में रहता है और वहीं से उसने हवाला का कारोबार शुरू किया जिसमें उम्मेद अली को भी शामिल कर लिया। उम्मेद अली खीरी के तिकुनिया से रकम लेकर दिल्ली पहुंचाता था और सालों से चल रहे इस आतंकी फंडिंग की भनक किसी खुफिया एजेंसी को नहीं लगी। मुमताज के नेटवर्क से और कौन-कौन जुड़ा है, इसकी तह तक पहुंचने के लिए एटीएस गिरफ्तार चारों अपराधियों से पूछताछ करेगी।

कैसे हुआ इस टेरर लिंक का खुलासा

कैसे हुआ इस टेरर लिंक का खुलासा

देश में हो रहे टेरर फंडिंग का पहला सुराग पुलिस के हाथ तब लगा जब नेपाल के कैलाली जिले में विजय शाह की गिरफ्तारी हुई जिसने स्वीकार किया कि वह विदेशे से आए पैसों को दिल्ली तक पहुंचाने के कारोबार में शामिल है। उसने बताया कि नेपाल के बैंक खातों को हैक कर उसने विदेशी पैसों को उसमें ट्रांसफर किया था। खीरी पुलिस और क्राइम ब्रांच ने सूचना मिलते ही इस मामले में छानबीन शुरू कर दी और सबसे पहले उनको संजय अग्रवाल के बारे में पता चला जो खीरी के तिकुनिया में नेपाली करेंसी को भारतीय रुपयों में बदलने का काम करता था।

गिरोह का हुआ भंडाफोड़

गिरोह का हुआ भंडाफोड़

खीरी पुलिस और क्राइम ब्रांच संजय अग्रवाल और उम्मेद सिंह तक पहुंची और इनके साथ दो और अपराधियों को गिरफ्तार कर टेरर फंडिंग गिरोह का भंडाफोड़ किया। खीरी एसपी पूनम का कहना है कि इस टेरर फंडिंग से जुड़े मुमताज समेत करीब एक दर्जन संदिग्धों की तलाश में पुलिस लगी है। डीजीपी ओपी सिंह ने कहा कि नेपाल सरकार से इस मामले में संपर्क किया जा रहा है। एटीएस भी इस मामले की छानबीन में लग गई है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि नेपाल के खातों में पैसा कहां से आता था और फिर इसे भारत में किन लोगों तक पहुंचाया जाता था?

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