जानिए, क्या होती है मटकोड़वा की रस्म, जिसके चलते हुआ Kushinagar wedding tragedy
कुशीनगर, 17 फरवरी: नौरंगिया गांव निवासी परमेश्वर कुशवाहा के घर खुशी का माहौल था। उनके बेटे अमित कुशवाहा की शादी का तैयारी चल रही थी। शादी से पहले पूर्वांचल की तरफ मटकोड़वा नाम की रस्म होती है। रस्म अदायगी के लिए महिलाएं बुधवार 16 फरवरी की देर शाम को गांव के कुएं के पास पहुंची थीं। रस्म के दौरान महिलाए और बच्चियां कुएं पर खड़ी हो गईं, अचानक कुएं का स्लैब टूट गया और 25 से अधिक महिलाएं, युवतियां व बच्चे भरभराकर कुएं में गिर गए। इस हादसे में 13 महिलाओं समेत 7 नाबालिग बच्चों की मौत हो गई।

क्या होती है मटकोड़वा की रस्म
मटकोड़वा की रस्म हल्दी के दिन या फिर उससे एक दिन पहले शाम ढलने के बाद पूर्वांचल के इलाके में होती है। इस रस्म के मुताबिक, शादी वाले घर की औरतें इस रस्म को निभाती हैं और इस दौरान औरतें आपसे में मजाक करती हैं और गाना-बजाना भी होता है। सदियों से चली आ रही मटकोड़वा या मटकोड़ा की रस्म प्रकृति से जुड़ी हुई मानी जाती है। यह वर और वधू दोनों ही पक्षों में निभाई जाती है। मान्यता है कि शगुन उठाने के बाद होने वाली इस रस्म के जरिये धरती से स्वस्थ, खुशहाल, धनधान्यपूर्ण गृहस्थ जीवन की याचना की जाती है। इस दौरान हल्दी की गांठ बांधी जाती है औऱ गुड़-चने की दाल दी जाती है। मिट्टी पर कलश स्थापित होता है। वहीं, महिलाएं मिट्टी खोदकर पूजा-अर्चना करती है। गांव में पोखरे या कुएं के पास या फिर शहरी इलाके में घर के आस-पास जहां थोड़ी मिट्टी मिले, वहां पर इस परंपरा को निभाया जाता है।

रस्म अदायगी के दौरान बढ़ती चली गई भीड़
पुलिस की मानें तो मटकोड़वा की रस्मा अदा करने महिलाएं बुधवार देर शाम गांव के कुएं पर गई थी। इस दौरान कुएं पर रस्म अदायगी का कार्यक्रम चल रहा था, जिसे देखने के लिए काफी संख्या में महिलाएं और बच्चियां पर कुएं पर इकट्ठा हो गई थीं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुएं में पानी से भरा हुआ था और बच्चियां, महिलाएं कुएं की मुंडेर पर बने चबूतरे पर पर बैठीं थीं। कहा जा रहा है कि कुएं का चबूतरा कमजोर होने की वजह टूट गया जिसकी वजह से यह हादसा हुआ। गांव के कुछ लोगों का कहना है कि कुएं के स्लैब पर चढ़ने के लिए मना भी किया जा रहा था, लेकिन कोई माना नहीं।

अस्पताल में मंजर देख कांप गए दिल
घटना के बाद गांव में मातम छा गया। शादी वाले घर में चीख-पुकार मच गई। वहीं, सूचना पर पहुंची पुलिस आसपास के लोगों के साथ मिलकर सबको कुएं से निकाला। गांव से जिला अस्पताल तक हाहाकार मचा रहा। इस दौरान हर कोई डॉक्टरों को घेरे था, सब बदहवास से थे और मन ही मन प्रार्थना कर रहे थे कि अब कोई और बुरी खबर न मिले। लेकिन हर प्रार्थना कहां कबूल होती है। आधे घंटे बाद ग्रामीणों को सूचित कर दिया गया कि अस्पताल में जो लो लाए गए, वह मृत अवस्था में ही जिला अस्पताल पहुंचे थे। सबके शव जिला अस्पताल की मोर्चरी के पास रखा गया है। यह देखकर हर कोई रोने लगा। एक साथ 13 शव देखकर सबकी रूह कांप गई।












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