ममता सरकार के लिए गले की हड्डी बनीं महिला सेक्‍स वर्कर

Tough time for Mamata Banerjee
कोलकाता। पश्चिम बंगाल की मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी और उनकी सहयोगी साक्षी पंजा के लिए 'महिला सेक्‍स वर्करों की पुनर्वास योजना' मुश्किल बन गयी है। यह ध्‍यान देने योग्‍य है कि प्रदेश की सरकार 50 साल से अधिक उम्र की महिला सेक्‍स वर्करों के लिए कोलकाता में 'मुक्तिर अलो' नाम से एक दक्षिणी कोलकाता में एक कालोनी का निर्माण करना चाहती है, जिसे लेकर आसपास के निवासियों ने विरोध प्रदर्शन किया है। मध्‍यमवर्गीय स्‍थानीय निवासियों के अनुसार यहां पर ऐसे लोगों को बसाने से समाज पर बुरा प्रभाव पड़ेगा।

अब ममता सरकार के सामने सवाल है कि अगर वह महिला सेक्‍स वर्करों की मदद करती हैं तो उन्‍हें जनविरोध का सामना करना पड़ेगा जो कि आगामी चुनाव को देखते हुए उनके लिए अच्‍छा नहीं है, वहीं समाज के हाशिये पर पड़े एक वर्ग की भी लोकतंत्र में उपेक्षा नहीं की जा सकती है। ममता बनर्जी ने हमेशा ही आम आदमी के पक्ष में आवाज उठाई है और उनकी छवि एक 'मास लीडर' की रही है। अत: अब ममता सरकार के लिए यह एक मुश्किल फैसला बन गया है, हालांकि बताया जा रहा है, अभी सिर्फ सौ महिला सेक्‍स वर्करों के ही पुनर्वास की ही योजना है, जिनके नाम का चुनाव क्रमरहित ढंग से किया जाएगा।

भारत के लोकतांत्रिक समाज में सेक्‍स वर्करों को 'नेसेसरी इविल' के रूप में देखा जाता है और सरकार ऐसे मुद्दों पर कोई कड़ा फैसला भी नहीं कर पाती है। जबकि राजतंत्र में सत्‍ता पक्ष के लिए ऐसे पेचीदा मुद्दों पर फैसला करना आसान हो जाता है। इन मामलों पर समाज के अन्‍य लोगों का भी दोहरा रवैया रहता है।

यह मुद्दा ममता सरकार के लिए तो मुद्दा है ही साथ ही बुद्धजीवियों के लिए भी एक मुद्दा है।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+