मेरे पास (नामांकन पत्र में) 'मां' है!

पूर्व केंदीय मंत्री त्रिवेदी ने बैरकपुर सीट से अपना नामांकन भरा है। साल 2009 के चुनाव के शपथपत्र में भी त्रिवेदी ने पिता के नाम का काॅलम खाली छोड़ते हुए मां के नाम को ही तवज्जो दी थी।
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हालांकि उनके विरोधियों ही नहीं, बल्कि समर्थकों भी यह बात जानने की इच्छा है कि अपने पिता के बारे में खुलकर जानकारी क्यों नहीं देते। यही राजनीति है, कोई अपनी निजी जि़न्दगी से बच नही पा रहा है तो कांग्रेस की 'स्टार' नगमा जैसे प्रत्याशी अपनी सार्वजनिक जि़न्दगी से तंग है। नामांकन में नरेंद्र मोदी से लेकर कई नेताओं का पेंच फंस चुका है।
ऐसे में निजी जिन्दगी का लेखा-जाोखा देना तमाम नेताओं की सार्वजनिक छवि पर भारी पड़ रहा है। बीते दिनों राम विलास पासवान ने भी अपनी पहली पत्नी का नाम नहीं दिया था। मामले ने तूल पकड़ा तो उन्होंने तलाक के कागज़ात लगाकर चर्चा को विराम दिया।












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