MP Assembly Election 2023: कटनी का बहोरीबंद विधानसभा क्षेत्र, लोधी वोट बैंक की बड़ी भूमिका, बीजेपी का दबदबा
MP assembly election 2023: मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव की सुगबुगाहट तेज है। जिले की महत्वपूर्ण विधानसभा में शामिल बहोरीबंद (94) विधानसभा की बात अगर की जाए तो इसका विस्तार बहोरीबंद और रीठी तहसील,ढीमरखेड़ा तहसील क्षेत्र आते है।
बहोरीबंद एसडीएम कार्यालय, बहोरीबंद जनपद पंचायत, रीठी जनपद पंचायत है। स्लीमनाबाद तहसील का 75 फीसदी हिस्सा भी बहोरीबंद विधानसभा के अंतर्गत आता है। यह विधानसभा, जबलपुर जिले की सिहोरा तहसील से लगी हैं। जिसके मुकाबले यहां विकास वोटर्स की चुनाव दर चुनाव महत्वकांक्षाएं बढ़ती चली गई।

जाति आधारित विधानसभा
विधानसभा क्षेत्र में कुल मतदाताओं की संख्या लगभग 2 लाख 30 हजार है। इस विधानसभा में करीब 296 सौ पोलिंग बूथ हैं। क्षेत्र में 50 फीसदी पिछड़ा वर्ग के मतदाता है, जिसमें लोधी पटैल मतदाता सबसे अधिक हैं। अनुसूचित जाति वर्ग के मतदाता करीब लगभग 15 फीसदी हैं। इसी तरह से 15 फीसदी अनुसूचित जनजाति भी शामिल है। सामान्य वर्ग के मतदाता करीब 20 फीसदी हैं। ओबीसी और सामान्य वर्ग के अलावा करीब 6 फीसदी मुस्लिम वोटर भी है। इस विधानसभा में निर्णायक मत लोधी पटैल का ही माना जाता है।
भाजपा का गढ़
बहोरीबंद विधानसभा में वर्तमान में भाजपा के प्रणय पांडेय विधायक है। उनके पिता स्वर्गीय प्रभात पांडेय भी इसी विधानसभा से विधायक रह चुके हैं। 2014 में उनका निधन हो गया था। जिसके बाद उनके बेटे प्रणय पांडेय ने 2014 में हुए उपचुनाव में भाजपा की टिकट से विधानसभा से चुनाव लड़ा, लेकिन कांग्रेस के प्रत्याशी सौरभ सिंह से हार गए थे। इसके बाद 2018 में फिर इसी विधानसभा से भाजपा की टिकट से प्रणय पांडेय चुनाव लड़े और लगभग 16 हजार मतों से जीत हासिल की।
बतौर विधायक उन्होंने रीठी में सरकारी काॅलेज और सरकारी आईटीआई का संचालन शुरु कराया। स्लीमनाबाद और बहोरीबंद सरकारी काॅलेज अपग्रेड कराएं। गांव से शहर को जोड़ने के लिए सड़कों का निर्माण करवाया । विधायक की जनता के बीच क्षबि साफ-सुथरी है। लेकिन इस क्षेत्र में पिछले कुछ दिनों से जातिवाद की राजनीति हावी हो रही है। सामान्य वर्ग से आने के कारण नुकसान भी उठाना पड़ रहा है। राजनीति में विधायक प्रणय पांडेय को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान के करीबी विधायकों में माना जाता है।
हो सकते है ये चुनावी मुद्दे- बहोरीबंद विधानसभा के आगामी चुनाव में सबसे बड़ा मुद्दा नर्मदा नदी का पानी बहोरीबंद क्षेत्र में पहुंचाना है। जिसमें सबसे बड़ी बाधा डोहली से खिरहनी तक बनाई 12 किलोमीटर की टनल है। पिछले 11 साल से बनाई जा रही है, लेकिन अब तक पूरी नहीं हो पाई है। इस विधानसभा के बहोरीबंद और रीठी तहसील में सबसे बड़ा मुद्दा पानी है। गर्मी के मौसम भीषण जलसंकट की स्थिति रहती है।
चर्चित उम्मीदवार
भाजपा से प्रणय पांडेय, कांग्रेस से सौरभ सिंह, निशिथ पटैल, गुमान सिंह, राकेश लोधी सहित दूसरे अन्य उम्मीदवार भी अपनी किस्मत आजमा सकते हैं।
पिछले चुनाव के समीकरण
2014 के उपचुनाव कांग्रेस से हारने के बाद भी प्रणय पांडेय क्षेत्र की राजनीति में सक्रिय रहे। यही वजह है कि साल 2018 के विधानसभा चुनाव भाजपा की टिकट से चुनाव लड़कर जीत हासिल की। क्षेत्र में कांग्रेस के हारने का मुख्य कारण विधायक की क्षेत्र में निष्क्रियता और कांग्रेस कार्यकर्ताओं में असंतोष था।
विधानसभा चुनाव की रणनीति
आगामी चुनाव में भाजपा की टिकट से प्रणय पांडेय अपने पांच साल के विकास कार्यों के मुद्दे पर चुनाव लड़ेंगे। जबकि कांग्रेस सरकार की नाकामियों जैसे जलसंकट, मंहगाई, बिजली कटौती, बढ़े बिजली के बिलों को मुद्दा बनाएगी।
चुनाव का संभावित परिणाम
मौजूदा विधायक प्रणय पांडेय का कोई प्रबल विरोध नही हैं, लेकिन क्षेत्र में जातिवाद हावी होने के कारण नुकसान उठाना पड़ सकता है। इस क्षेत्र में कांग्रेस एकजुट होकर चुनाव लड़ेगी तो उसके भी जीतने के अवसर है। दोनों ही प्रमुख राजनीतिक दलों के प्रत्याशियों की जीत का निर्णायक वोट ओबीसी वर्ग का ही रहेगा। क्षेत्र में ओबीसी महासभा का प्रभाव ज्यादा दिखाई दे रहा है जो चुनाव में असर दिख सकता है।
संवाद सूत्र- सत्येंद्र गौतम, कटनी, मध्यप्रदेश
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