ये हैं रियल लाइफ बंटी-बबली : पति-पत्नी ने 20 लोगों से ठगे करोड़ों रुपए, 6 साल बाद यूं आए पकड़ में
जोधपुर, 6 जून। साल 2005 में आई बॉलीवुड फिल्म बंटी और बबली की तर्ज पर एक दंपती रियल लाइफ में लोगों से ठगी कर रहा था। चौंकाने वाली बात तो यह है कि इन्होंने 20 से ज्यादा लोगों से करोड़ों रुपए ठग लिए और छह साल से पुलिस इन्हें पकड़ नहीं पाई। अब अपने एक साथी की वजह से पकड़े गए तो इनके कई राज खुले हैं।

कहानी की शुरुआत जोधपुर से साल 2016 के अप्रैल से
राजस्थान में रियल लाइफ इस बंटी बबली की जोड़ी की कहानी की शुरुआत जोधपुर से साल 2016 के अप्रैल से होती है। आरोपी मुकुल और मेघना ने खुद को मेल्स स्क्वायर प्राइवेट लिमिटेड कंपनी का डायरेक्टर व गुजरात के वडोदरा निवासी बताकर कपड़ों के शोरूम की फ्रेंचाइजी दिलाने के नाम पर जोधपुर के रातानाडा के डिफेंस लैब रोड स्थित उम्मेद हैरिटेज निवासी सन्नी चेटवानी से 42.50 लाख रुपए ठगे।

उदयमंदिर पुलिस थाने में मामला दर्ज करवाया
आरोपियों ने 19 अगस्त 2016 से फ्रेंचाइजी तो शुरू कर दी, मगर इसके बाद माल नहीं भेजा। पीड़ित ने सन्नी चेटवानी ने जोधपुर के उदयमंदिर पुलिस थाने में मामला दर्ज करवाया। पुलिस ने बंटी-बबली मुकुल व मेघना को पकड़ पाती इससे पहले ही दोनों ने ठिकाना बदल लिया और इस बार अपना शिकार जयपुर की रेखा वर्मा को बनाया। उससे कम्पनी के डायरेक्टर दंपती ने फ्रेंचाइजी देने के नाम पर 8 लाख रुपए ठगे। इसी तरह से कई लोग इनका शिकार बने।

मुकुल अपना नाम पिंटू भाई बताता
इस बंटी बबली की जोड़ी को पकड़ने वाले जोधपुर पुलिस कांस्टेबल सुरजाराम के अनुसार साल 2016 से दोनों की तलाश की जा रही थी। इन्होंने आधार कार्ड से लेकर दूसरे एग्रीमेंट पर सबकुछ फर्जी बनवा रखे थे। मुकुल अपना नाम पिंटू भाई बताता। पुलिस भी पिंटू भाई के नाम पर ढूंढ रही थी। जब पकड़ में आए तो उसके असली नाम पता चला। ये अपने साथी शशिकांत की वजह से पकड़ में आए हैं। शशिकांत ने अपना जोधपुर स्थित मकान बेचा तो बेचाननामे से उसके पिता का आधार कार्ड नम्बर मिल गया। पुलिस ढूंढती हुई शशिकांत को बेंगलुरु से पकड़ लाई।

पुलिस को देखा तो ठग दंपती भी चौंक गए
जोधपुर पुलिस की पूछताछ में शशिकांत ने बताया कि दोनों अभी वड़ोदरा में है। वडोदरा में भी जिस फ्लैट का एड्रेस मिला था उससे दस फ्लैट आगे दोनों रह रहे थे। सुबह दबिश देकर दोनों को पकड़ा। जब पुलिस को देखा तो ठग दंपती भी चौंक गए। ये ठगी कर शहर छोड़ देते थे। नाम, पहचान सब बदल लेते थे। जिस शहर में जाते वहां किसी न किसी को अपने जाल में फंसा लेते थे। पकड़े जाने के डर से दोनों ने असली आधार कार्ड तक नहीं बनवाया। जिस फ्लैट में रहते, वहां दस साल पहले का फर्जी एड्रेस देते थे। हमेशा किसी दूसरे नाम की सिम यूज करते थे ताकि पकड़ में नहीं आ पाए।












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