Jodhpur: दादा के मृत्युभोज में बिक गए थे मां के गहने, अब पिता की मौत पर बेटों ने दान किए 18 लाख रुपए
Mrityubhoj in Jodhpur Rajasthan : जोधपुर के नैनाराम सारण की मौत पर उनके बेटों ने मृत्युभोज की बजाय 18 लाख रुपए से समाज व शिक्षा के लिए करवाए जाने वाले कार्यों की सूची भी जारी की है।

सामाजिक कुरीति मृत्युभोज के खिलाफ राजस्थान के जोधपुर जिले के गांव देवगढ़ आगोलाई के सारण परिवार ने सराहनीय फैसला लिया है। यहां पिता की मौत पर बेटे मृत्युभोज करने की बजाय समाज-शिक्षा पर 18 लाख रुपए खर्च करेंगे। इस फैसले की हर जगह सराहना हो रही है।
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नैनाराम सारण, गांव देवगढ़ आगोलाई जोधपुर
जानकारी के अनुसार जोधपुर जिले के बालेसर तहसील के गांव देवगढ़ आगोलाई निवासी नैनाराम सारण का 26 जनवरी 2023 को निधन हो गया था। इसके बाद नैनाराम सारण के बेटे कर्नल डॉ. बलदेवसिंह चौधरी व उनके परिवार ने सामाजिक कुरीति मृत्युभोज का बहिष्कार करने का फैसला लिया।

1982 में हुई थी दादा की मौत
मीडिया से बातचीत में बलदेव सिंह चौधरी ने बताया कि नवंबर 1982 को दादा शेराराम की मौत हो गई थी। तब 12 दिन तक अफीम की मनुहार करनी पड़ी। फिर 12 से 24 गांवों के लोगों को मृत्युभोज के नाम पर भोजन करवाया। उस वक्त हमारा परिवार मृत्युभोज का खर्च वहन करने में सक्षम नहीं था, मगर परिवार के सामाजिक बहिष्कार के डर से मृत्युभोज के खिलाफ नहीं जा पाए। बलदेव सिंह चौधरी कहते हैं कि इस सामाजिक कुप्रथा मृत्युभोज को पूरा करने के लिए दादा की मौत पर मां आशीदेवी के सोने गहने बेचने पड़े। ब्याज पर कर्ज भी लिया। यहीं नहीं बल्कि खुद चौधरी की पढ़ाई छूट गई और दो बहनों का बाल विवाह भी करना पड़ा।

फौजी बनते ही लिया फैसला
दादा की मौत के समय चौधरी 9वीं कक्षा में पढ़ रहे थे। फिर जैसे तैसे करके 11वीं तक की पढ़ाई पूरी की। उसके बाद भारतीय सेना में भर्ती हो गए। फौजी बनने के साथ ही यह भी तय कर लिया था कि सामाजिक कुरीति मृत्युभोज को खत्म करना है। अब पिता की मौत पर मृत्युभोज नहीं करने का फैसला लिया।

12वें की रस्म पर सौंपेंगे चेक
नैनाराम सारण की मौत पर पांच फरवरी को 12वें की रस्म निभाई जाएगी। इसी दौरान समाज व शिक्षा के क्षेत्र में 18 लाख का चेक प्रदान किया जाएगा। इनमें 2-2 लाख रुपए देवगढ़ ग्राम विकास, देवगढ़ शमशान भूमि में शेड, पानी की टंकी निर्माण पर, एक-एक लाख रुपए मोहनपुरा बाईराम मंदिर में पुस्तकालय, आगोलाई गौशाला में एक ट्रक ईंट के लिए देंगे। इनके अलावा 51-51 हजार विभिन्न समाजों के बच्चों की शिक्षा पर खर्च करेंगे।
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