Monika Sain: गैंगस्टर एनकाउंटर के बाद मरते-मरते बचीं IPS मोनिका सैन, अब राजस्थान में मिली बड़ी जिम्मेदारी
Monika Sain IPS Rajasthan: राजस्थान की भजनलाल शर्मा सरकार ने भारतीय पुलिस सेवा के 65 अफसरों के तबादले किए हैं।
इन आईपीएस अधिकारियों में एक महिला पुलिस अफसर ऐसी हैं, जिनका मौत से सामना हो चुका है। नाम है आईपीएस मोनिका सैन।

राजस्थान कैडर में साल 2014 बैच की आईपीएस अधिकारी मोनिका सैन को जालोर पुलिस अधीक्षक पद से जोधपुर में डीसीपी (यातायात) पद पर लगाया गया है।
10 अक्टूबर 1986 को जन्मी आईपीएस मोनिका सैन मूलरूप से उत्तर प्रदेश की रहने वाली हैं। ये राजस्थान पुलिस में जयपुर एसओजी, सीआईडी सीबी, एससीआबी, झालावाड़ में पुलिस अधीक्षक पद पर सेवाएं दे चुकी हैं।
आईपीएस मोनिका सैन का मौत से सामना और खाकी वर्दी पर राजपूती ड्रेस पहनने की कहानी साल 2017 की है। तब 24 जून 2017 में राजस्थान पुलिस ने फरार चल रहे कुख्यात गैंगस्टर आनंदपाल सिंह चूरू जिले के रतनगढ़ उपखंड के गांव मालासर में एनकाउंटर किया था।

आनंदपाल सिंह के एनकाउंटर के बाद उसका शव नागौर जिले के लाड़नूं के पास पैतृक गांव सांवराद लाया गया। शव पर खूब राजनीति हुई। 12 जुलाई 2017 को राजपूत समाज ने श्रद्धांजलि सभा रखी थी। राजपूत समाज आनंदपाल के एनकाउंटर को फर्जी बताकर CBI जांच की मांग कर रहा था।
श्रद्धांजलि सभा में एक लाख लोगों की भीड़ आई थी, जिसने खूब उपद्रव भी मचाया। उस समय बतौर ट्रेनी आईपीएस मोनिका सैन भी गांव सांवराद में तैनात थीं।
उस समय इंडिया टुडे को दिए एक इंटरव्यू में मोनिका सैन ने बताया था कि सांवराद में भीड़ बेकाबू हो गई थी। एसपी के गैनमैन, चालक व अन्य पुलिसकर्मियों पर भीड़ ने हमला कर दिया।
ट्रेनी आईपीएस के रूप में मोनिका सैनी मौके पर ही तैनात सब कुछ इनकी आंखों के सामने ही हो रहा था। भीड़ ने एसपी के गाड़ी महावीर पर मिट्टी का तेल छिड़क दिया था। पुलिस की गाड़ी को आग के हवाले कर दिया।
बेकाबू भीड़ ने आईपीएस मोनिका सैन पर भी हमला कर दिया। लोगों ने इन्हें अपनी तरफ खींचना शुरू कर दिया था। जैसे-तैसे ये बचकर पास ही स्थित एक घर में घुस गई और उन्हें पूरी बात बताई। उच्चाधिकारियों को भी सूचित किया।
फिर उस परिवार के लोगों ने आईपीएस मोनिका सैन को पहनने के लिए राजपूती ड्रेस थी, जो उन्होंने खाकी वर्दी पर ही पहन ली। वो इसलिए कि ताकि भीड़ को लगे कि वे पुलिस अफसर की बजाय राजपूत महिला ही समझा जाए। फिर भीड़ शांत होने पर वे वहां से निकलीं।












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