Jharkhand Chunav: बीजेपी के लिए कितनी 'सेफ' रह गई है रांची सीट, महुआ बनाम सीपी सिंह में इसबार कौन?

Jharkhand Chunav 2024: रांची विधानसभा सीट बीजेपी के लिए तब से सेफ मानी जाती रही है, जब बिहार का विभाजन भी नहीं हुआ था। लेकिन, पहली बार ऐसा लग रहा है कि पार्टी को झारखंड की राजधानी में सत्ताधारी जेएमएम उम्मीदवार से चुनौती मिल सकती है। क्योंकि पार्टी ने पूर्व मंत्री और पांच बार के भाजपा विधायक सीपी सिंह के मुकाबले फिर से राज्यसभा सांसद महुआ माझी को उतार दिया है।

रांची विधानसभा सीट 1990 के दशक से ही बीजेपी का गढ़ रही है। तब यह बिहार विधानसभा का हिस्सा थी। जब 2000 में बिहार से अलग होकर झारखंड बना और उसके बाद जितने भी चुनाव हुए भाजपा रांची में 'कमल' खिलाती रही है।

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भाजपा उम्मीदवार का पार्टी में भी हुआ विरोध
भारतीय जनता पार्टी ने इस बार भी इस सीट से 68 वर्षीय विधायक सीपी सिंह पर ही भरोसा जताया है। लेकिन, इस बार पार्टी को संगठन के अंदर ही इसके लिए विरोध का सामना भी करना पड़ गया। कुछ नेताओं ने पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार के खिलाफ नामांकन दाखिल कर दिया। अलबत्ता पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की पहल पर बागियों ने नामांकन वापस ले लिया।

महुआ माझी फिर से दे रही हैं सीपी सिंह को टक्कर
लेकिन, सीपी सिंह के सामने सिर्फ अपनों की चुनौती नहीं खड़ी हुई है। इस बार उनके खिलाफ झारखंड मुक्ति मोर्चा ने अपनी राज्यसभा सांसद महुआ माझी को ही फिर से उतारा है। उनका सियासी तौर पर प्रमोशन हो चुका है। वह अब दिल्ली में पार्टी का प्रतिनिधित्व करती हैं। अक्सर राष्ट्रीय मीडिया में विभिन्न मुद्दों पर पार्टी और इंडिया ब्लॉक का पक्ष रखते नजर आ जाती हैं।

दो चुनावों में हारीं महुआ, लेकिन दूसरी बार बहुत घट गया हार का अंतर
वैसे सीपी सिंह के लिए रांची सीट पर महुआ नई नहीं हैं। वे उन्हें यहीं से पिछले दो चुनावों में लगातार हरा चुके हैं। 2014 में सीपी सिंह महुआ के मुकाबले 58,000 वोटों से जीते थे। लेकिन, 2019 में उनकी जीत का अंतर मात्र 5,900 रह गया था, जो इस विधानसभा सीट के लिए सबसे कम मार्जिन है। इसलिए, अबकी बार यहां मुकाबला जबर्दस्त होने की संभावना बनी है।

सिंह को मालूम है कि उनकी चुनौती पार्टी में भी बढ़ चुकी है। हालांकि, वह कहते हैं कि उनके चुनाव लड़ने का फैसला पार्टी का है और वह जो फैसला करती है, उसके पालन के लिए वह प्रतिबद्ध हैं। वह चुनाव सभाओं में 30 वर्षों में अपनी ओर से करवाए गए कार्यों को भी गिनाते हैं।

अबकी बार बीजेपी प्रत्याशी ने रांची को मेट्रो सिटी बनाने का किया वादा
मसलन, शहर के डोरंडा इलाके में एक सभा में उन्होंने कहा कि उनकी ओर से तैयार किए गए कार्यों की योजना पर अमल नहीं हुआ, क्योंकि मौजूदा सरकार (हेमंत सोरेन सरकार) ने इसके खिलाफ साजिशें रचीं। उनका वादा है कि अगर वह फिर से चुने जाते हैं तो रांची को एक मेट्रो सिटी बनाएंगे।

रांची भाजपा का गढ़ बन चुकी है
डोरंडा इलाके में ही रविंद्र महतो नाम के एक शख्स ने ईटी को बताया कि 'हम बीजेपी समर्थक हैं और राज्य में रोजगार की कमी है। मेरा वोट बीजेपी के लिए है, सिंह के लिए नहीं, क्योंकि उन्होंने एमएलए के तौर पर कोई खास नही किया है।'

महुआ की प्रोफाइल बढ़ने से हाईप्रोफाइल बन चुकी है
वहीं महुआ माझी का कहना है, 'मेरी पार्टी ने मुझमें विश्वास जताया है और मैं फिर से चुनाव लड़ रही हूं। राज्यसभा में मेरा कार्यकाल अभी भी चार साल बचा है। लेकिन, मैंने इस सीट से जेएमएम को जिताने की चुनौती ली है।'

विधायक के खिलाफ एंटी-इंकंबेंसी रखेगी मायने!
भाजपा का इस शहर में इतना बड़ा जनाधार है कि दूसरी किसी भी पार्टी के लिए उसमें सेंध लगा पाना अबतक काफी मुश्किल रहा है। लेकिन, समय के साथ बदलाव के सुर भी फूटने लगे हैं। जैसे कांटाटोली इलाके के समरेश कुमार नाम के एक शख्स जो सरकारी नौकरी पाने की कोशिशों में जुटे हैं, वो कहते हैं, 'इसबार चेहरा बदलना चाहिए। रांची को एक नया विधायक मिलना चाहिए।'

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