Jharkhand Liquor Scam: ACB ने किया IAS विनय चौबे को गिरफ्तार, आखिर कैसे खुली झारखंड शराब घोटाले की पोल?
Jharkhand Liquor Scam: झारखंड में शराब घोटाले से जुड़ी जांच ने एक नया और गंभीर मोड़ ले लिया है। एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने मंगलवार, 20 मई को IAS विनय कुमार चौबे को इस घोटाले के सिलसिले में गिरफ्तार कर लिया है।
इससे पहले विनय चौबे को रांची स्थित उनके आवास से पूछताछ के लिए ACB कार्यालय लाया गया था, जिसके बाद उन्हें हिरासत में ले लिया गया। न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक, चौबे की गिरफ्तारी छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले से जुड़े कनेक्शन के आधार पर की गई है, जो अब झारखंड में भी जड़ें जमा चुका था।

Jharkhand Liquor Scam: छत्तीसगढ़ से झारखंड तक फैला शराब सिंडिकेट का जाल
दरअसल, यह शराब घोटाला केवल झारखंड तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी जड़ें सीधे छत्तीसगढ़ से जुड़ी हुई हैं। जहां पर पहले ही स्टेट मार्केटिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड के अधिकारी और कई बड़े शराब कारोबारी जांच के घेरे में आ चुके हैं। छत्तीसगढ़ में इस मामले की शुरुआत आर्थिक अपराध शाखा (EOW) की जांच से हुई थी, जिसे बाद में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अपने हाथ में लिया।
ईडी की जांच में यह सामने आया कि छत्तीसगढ़ में सक्रिय शराब सिंडिकेट ने ही झारखंड में भी समान रणनीति के तहत नई उत्पाद नीति लागू करवाई थी। इस नीति के तहत उसी तरह के अवैध शराब के लाभ झारखंड में भी उठाए जा रहे थे।
इस संदर्भ में IAS विनय चौबे की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही थी, जो उस समय झारखंड के उत्पाद सचिव के पद पर कार्यरत थे। बता दें कि विनय कुमार चौबे 1999 बैच के IAS ऑफिसर हैं जो 2024 तक झारखंड राज्य में पंचायती विभाग में बतौर प्रिंसिपल सेक्रेटरी थे।
Jharkhand Liquor Scam: कैसे खुली घोटाले की पोल?
ईडी ने 2024 में छत्तीसगढ़ और झारखंड के बीच बनी इस संदिग्ध सांठगांठ के आधार पर ईसीआईआर (ECIR) दर्ज कर मामला आगे बढ़ाया। अक्टूबर 2024 में ईडी की टीम ने झारखंड में कई स्थानों पर छापेमारी की, जिसमें विनय चौबे का आवास भी शामिल था।
इससे पहले सितंबर 2024 में छत्तीसगढ़ की आर्थिक अपराध शाखा द्वारा एक प्राथमिकी दर्ज की गई थी, जिसमें विनय चौबे को मुख्य आरोपी बनाया गया। इसी आधार पर झारखंड ACB ने भी राज्य सरकार की अनुमति से एक प्रारंभिक जांच (Preliminary Enquiry PE) दर्ज कर जांच शुरू की।
Jharkhand Liquor Scam: विनय चौबे की मुश्किलें बढीं
2024 में एसीबी की पूछताछ के दौरान विनय चौबे ने खुद को निर्दोष बताते हुए कहा था कि झारखंड में लागू की गई नई उत्पाद नीति पूरी तरह से राज्य सरकार की मंजूरी से बनी थी और वे केवल अपनी प्रशासनिक जिम्मेदारियां निभा रहे थे।
हालांकि जांच एजेंसियों को इस बात के पुख्ता संकेत मिले हैं कि छत्तीसगढ़ का वही शराब सिंडिकेट झारखंड में भी नीति निर्माण से लेकर शराब वितरण के हर स्तर पर सुनियोजित ढंग से भ्रष्टाचार फैला रहा था। चौबे पर आरोप है कि उन्होंने इस नीति को आगे बढ़ाने में सहायक भूमिका निभाई।
Jharkhand Liquor Scam: भ्रष्टाचार पर कसा शिकंजा, लेकिन जांच अभी जारी
जांच एजेंसियों का मानना है कि यह घोटाला केवल प्रशासनिक स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें संभवतः राजनीतिक संरक्षण भी शामिल रहा है। इसी वजह से एसीबी और ईडी इस मामले को और गहराई से खंगाल रही हैं। आगे चलकर और बड़े अधिकारियों और कारोबारी चेहरों की गिरफ्तारी संभव है।
IAS अधिकारी की गिरफ्तारी से साफ हो गया है कि झारखंड में शराब घोटाले में सरकारी तंत्र किस तरह से संलिप्त था जिसकी परतें अब खुलने लगी हैं। यह कार्रवाई राज्य की नौकरशाही में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ा संकेत मानी जा रही है। अब देखना होगा कि आने वाले दिनों में जांच एजेंसियां किन-किन बड़े नामों को घेरे में लेती हैं।
यह पूरा मामला यह भी दर्शाता है कि छत्तीसगढ़ और झारखंड जैसे राज्यों में एक ही सिंडिकेट किस तरह प्रशासन के सहयोग से नीतियों को अपने पक्ष में मोड़कर करोड़ों का घोटाला करने में सक्षम हुआ। अब देखना यह होगा कि ACB और ED की जांच किस-किस को अपने शिकंजे में लेती है और जांच प्रक्रिया किस ओर रुख करती है।












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