झारखंड का CM पद छोड़कर चंपई सोरेन कितने खुश, पार्टी लाइन से हटकर बयान क्यों? जानिए

झारखंड की राजनीति का वो 'टाइगर' जिसका लोहा विपक्षी भी मानते हैं, वो हैं चंपई सोरेन। ये झारखंड के ऐसे नेता हैं, जिन्होंने आदिवासी जीवन को सिर्फ देखा ही नहीं, बल्कि इसे जिया भी है। महज पांच महीने के कार्यकाल में उन्होंने जेएमएम नेतृत्व वाले संगठन की सरकार में ऐसी छाप छोड़ी जिसकी राज्य में चर्चा है। खासकर एक वर्ग उनकी ओर बड़ी उम्मीदों से देख रहा था, लेकिन हेमंत सोरेन को जमानत मिलने के बाद उन्होंने सीएम की कुर्सी छोड़ दी।

सीएम छोड़ने से पहले चंपई सोरेन ने अंतिम वक्त में कुछ अहम निर्णयों की अधूरी तैयारी को लेकर बयान दिया। उन्होंने अपने मन की बात कुछ ऐसे अंदाज में कही, जिससे जेएमएम के भीतर भी माहौल गर्म हो सकता है। दरअसल, झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चुपई सोरेन पद से इस्तीफा देने के बाद पहली बार अपने गृह जिला सरायकेला पहुंचे तो मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए चंपई सोरेन ने दावा किया झारखंड सरकार जल्द ही युवाओं को बड़े स्तर पर सरकारी नौकरी देने जा रही है।

Champai Soren about jobs

एक बयान में झारखंड के पूर्व सीएम ने कहा कि उन्हें पद की लालसा नहीं है। जनता के बीच रहकर ही जनता की सेवा करना चाहता हूं। कैबिनेट विस्तार के बारे में पूछे जाने पर कहा कि महागठबंधन जो भी निर्णय लेगा, मैं उसका स्वागत करूंगा। लोगों का प्यार देखकर चंपई भावुक भी हुए।

उन्होंने कहा कि हेमंत सोरेन सरकार में मंत्री बनने के सवाल पर चंपई ने कहा कि वे जनता के बीच रहकर ही जनता की सेवा करना चाहते हैं। कैबिनेट विस्तार के बारे में एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि महागठबंधन जो भी निर्णय लेगा, मैं उसका स्वागत करूंगा।

एक इच्छा नहीं हुई पूरी!
पांच महीने के कार्यकाल को अपर्याप्त बताया। हालांकि, उन्होंने राज्य के विकास कार्यों का जिक्र करत हुए कहा कि राज्य को विकास के पथ आगे बढ़ाने का पूरा प्रयास किया। इस अवधि में पुलिस भर्ती, शिक्षक भर्ती और रोज़गार से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्य शुरू किए गए। हालांकि चंपई ने कहा कि उन्हें तब संतोष होता जब वे अपने हाथों से खुद युवाओं को नियुक्ति पत्र देते। बता दें कि युवाओं को नियुक्ति पत्र खुद के हाथों से देने की तमन्ना थी, जो अधूरी रह गई।

चंपई के बयान का क्या होगा असर
जेएमएम नेता चंपई सोरने ने सीएम का पद छोड़ने के बाद कहा कि पांच महीने की सरकार के कार्यकाल में कुछ चीजें रह गईं, जिन्हें पूरी करने कि इच्छा थी। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या हेमंत सोरेन पूर्व की सरकार की योजनाओं पर काम नहीं करेगी? चंपई के इस बयान को गंभीरता से लेते हुए कहा कि काम करने वाले व्यक्ति की इच्छाएं कभी पूरी नहीं होती। हालांकि इस बयान के कई मायने निकाले जा रहे हैं। दावा किया रहा है कि इसको लेकर झारखंड मुक्ति मोर्चा के अंदर विरोध भी सकता है, हालांकि अब तक ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया है।

वहीं चंपई सोरेन के इस्तीफे के बाद से जेएएम पर अन्य राजनीतिक दलों के नेता तंज कर रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि जेल से आते ही जिस तरह चंपई सोरेन ने इस्तीफा दिया उससे तो यही लगता है कि जेएमएम आदिवासी समाज के प्रतिनिधित्व को नजरअंदाज कर रही है। बता दें कि सरायकेला के जिलिंगगोड़ा कस्बे के जुझारू चंपई सोरेन बुधवार को महागठबंधन विधायक दल के नेता चुने गए थे। अब उनके पास राज्य की कमान है। इस मुकाम तक पहुंचने की उनकी राह बेहद पथरीली रही है। चंपई जंगल और जमीन को मां मानते हैं। इसकी रक्षा करते-करते ठेठ किसान भी रहे, जो झारखंड की राजनीति में 'टाइगर' के नाम से जाने जाते हैं।

आदिवासी सीटों पर क्या होगा असर?
चंपई सोरेन के सीएम बनते ही राउरकेला समेत आदिवासी बाहुल क्षेत्रों में एक अलग तस्वीर दिखी। दावा किया गया कि झामुमो के इस फैसले से सूबे की चालीस से अधिक आदिवासी बहुल विधानसभा सीटों की तस्वीर बदल सकती है। माना ये भी जा रहा था कि चंपई भाजपा के आदिवासी चेहरे अर्जुन मंडा और बाबूलाल मरांडी के लिए चुनौती साबित हो सकते हैं। लेकिन सीएम पद से अचानक उनके हटने के बाद इस समीकरण में कुछ बदलाव भी आ सकते हैं।

सीता सोरेन ने क्यों कर दी खिंचाई
सीता सोरेन ने अपने देवर और सीएम हेमंत सोरेन को फिर से सीएम बनने की बधाई देने की बजाय कहा कि चंपई सोरेन (Hemant Soren) झामुमो के पुराने नेता हैं और कोल्हान में टाइगर के नाम से जाने जाते हैं। तीसरी बार मुख्यमंत्री बनने पर गुरुवार को प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि झामुमो में एक अलग संविधान है। कहा कि ये लोग जिनको जब चाहें उन्हें मुख्यमंत्री की सीट पर बैठा सकते हैं और इस सीट से उतार भी सकते हैं।

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