Jharkhand Chunav: चंपाई के BJP में जाने से भी क्यों परेशान नहीं हैं हेमंत सोरेन?
Jharkhand Vidan Sabha Chunav: चंपाई सोरेन के भाजपा में शामिल होने से न तो पार्टी के लोकल कैडर और स्थानीय नेताओं में बहुत ज्यादा उत्साह दिख रहा है और ना ही झारखंड मुक्ति मोर्चा और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के कैंप में कोई आफत नजर आ रही है। बल्कि, जेएमएम के अंदर के लोगों की ओर से तो ये संकेत दिया जा रहा है कि इससे हेमंत का काम और आसान हुआ है।
जिस दिन झारखंड के 67 वर्षीय पूर्व सीएम चंपाई सोरेन रांची के धुर्वा मैदान में अपने समर्थकों के साथ बीजेपी में शामिल हो रहे थे, उसी दिन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने उनके उसी कोल्हान क्षेत्र के नेताओं और विधायकों का जमावड़ा जुटाया था और अपनी सरकार की कल्याणकारी योजनाओं को नई धार देने में लगे हुए थे।

कोल्हान में जेएमएम का दबदबा बनाए रखना चाहते हैं हेमंत
एक तरफ चंपाई कमल थामने का जश्न मनाने में लगे थे तो दूसरी तरफ उनकी जगह पर हेमंत घाटशिला के पार्टी एमएलए रामदास सोरेन को मंत्री पद का शपथ दिलवाने में लगे हुए थे। इंडियन एक्सप्रेस ने सूत्रों के हवाले से एक रिपोर्ट दी है कि हेमंत किसी भी कीमत पर कोल्हान क्षेत्र में जेएमएम का दबदबा कम नहीं होने देना चाहते, जिसमें चंपाई की सीट सराईकेला और घाटशिला भी शामिल हैं।
भाजपा को चंपाई के दम पर कोल्हान में बेहतर करने की उम्मीद
कोल्हान बेल्ट में 14 विधानसभा सीटें हैं, जहां 2019 में भाजपा का सफाया हो गया था। 11 जेएमएम जीती थी और 2 पर उसकी सहयोगी कांग्रेस को कामयाबी मिली थी। एक सीट निर्दलीय के खाते में गई थी। बीजेपी को चंपाई के आने से इस क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करने की उम्मीद है।
चंपाई की कमजोरियों को तलाशने में जुटा जेएमएम
लेकिन, हेमंत समर्थकों को लगता है कि आदिवासी वोटर दलबदलुओं पर यकीन नहीं करते। जेएमएम के एक नेता के मुताबिक, 'गीता कोड़ा जैसी लोकप्रिय नेता भी बीजेपी में जाकर हालिया लोकसभा चुनाव हार गईं। 2019 के विधानसभा चुनाव में कुणाल सारंगी जैसे उभरते नेता बीजेपी में गए और जेएमएम से हार गए।'
जेएमएम के एक और नेता के मुताबिक, 'सराईकेला से चंपाई आमतौर पर 1,000-2,500 वोटों के अंतर से जीतते हैं। 2019 में 15,000 से अधिक वोटों से जीते, क्योंकि हेमंत की लहर थी। वह 2019 में लोकसभा चुनाव लड़ने गए थे, लेकिन 3 लाख से ज्यादा वोटों से हारे। इस बार के लोकसभा चुनाव में भी चंपाई के उम्मीदवार समीर मोहंती जमशेदपुर में करीब 2.60 लाख वोटों से हार गए।'
सीएम हेमंत सोरेन के एक करीबी सूत्र का कहना है, 'हेमंत की गैरमौजूदगी में लोकसभा चुनावों में चंपाई ने कोल्हान क्षेत्र में अपने उम्मीदवारों के माध्यम से जननेता बनने की कोशिश की थी, लेकिन कई वजहों से सफल नहीं हुए। चंपाई जोबा मांझी को चाईबासा लोकसभा चुनाव में अपनी सराईकेला विधानसभा क्षेत्र में बढ़त नहीं दिलवा सके। चाईबासा लोकसभा में सिर्फ यही क्षेत्र रहा, जहां जेएमएम पिछड़ा। इसलिए अभी हम बिल्कुल ही परेशान नहीं हैं।'
'चंपाई के जाने से हेमंत को युवाओं को तरजीह देने का मिलेगा मौका'
एक वरिष्ठ जेएमएम नेता ने कहा, '2021 के आखिर से हमारी सरकार डोलड्रम में है। लेकिन, हर संकट के बाद हेमंत मजबूत बनकर उभरे हैं। उन्हें गिरफ्तार किया गया, लेकिन उनकी पत्नी कल्पना ने मशाल उठाया और जेएमएम कैडर को उत्साहित किया। चंपाई का बीजेपी में शामिल होना पार्टी के लिए एक वरदान की तरह है, क्योंकि अब हेमंत को विधानसभा चुनावों से पहले युवा नेताओं की मदद से पार्टी को पुनर्गठित करने और उसमें नई जान फूंकने की और ज्यादा आजादी की गुंजाइश मिलेगी।'
चंपाई को जेएमएम के कैडर अबतक कोल्हान टाइगर बुलाते रहे हैं। 28 अगस्त का मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने यहां अपनी सरकारी की नई योजना 'मैंईयां सम्मान योजना' को लेकर एक कार्यक्रम आयोजित किया, जिसे मुख्यालय चाईबासा की जगह सराईखेला में आयोजित किया गया।
इसे भी पढ़ें- Jharkhand Politics: चम्पाई सोरेन की बगावत पर क्यों खामोश हैं हेमंत सोरेन?
एक जेएमएम सूत्र के मुताबिक, 'सराईखेला को सोच-समझकर चुना गया। हेमंत को सुनने के लिए एक लाख से ज्यादा लोग जुटे थे। यह टाइगर (चंपाई) के लिए संदेश था कि शेर (हेमंत) कोल्हान पहुंच चुका है।'












Click it and Unblock the Notifications