झारखंड चुनाव से पहले BJP ने क्यों खेला 'कुर्मी कार्ड', विद्युत वरण महतो बन सकते हैं मोदी के मंत्री!
Jharkhand Chunav 2024: झारखंड में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने राज्य में 'कुर्मी कार्ड' खेला है। भाजपा ने कुर्मी समुदाय को साधने की रणनीति के तहत ये कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अगले मंत्रिमंडल विस्तार में झारखंड से एक कुर्मी नेता को केंद्रीय मंत्री बनाया जाएगा। खुद प्रदेश भाजपा चुनाव प्रभारी शिवराज सिंह चौहान ने इस बात की जानकारी दी है।
शिवराज सिंह चौहान ने 21 सितंबर को रांची में कहा कि झारखंड से कुर्मी सांसद केंद्र जल्द मंत्री बनने वाले हैं। हालांकि उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया लेकिन भाजपा के पास एक ही इकलौते कुर्मी सांसद हैं, वो हैं जमशेदपुर से सांसद विद्युत वरण महतो। संभावना है कि विद्युत वरण महतो जल्द ही केंद्रीय मंत्री बनाए जाएंगे।

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जमशेदपुर सांसद विद्युत वरण महतो को विधानसभा चुनावों में भी अहम जिम्मेजारी देते हुए उन्हें चुनावों के लिए अभियान समिति का समन्वयक नियुक्त किया गया है। ये दिखाता है कि महतो पर पार्टी का ध्यान है और उनकी क्षमताओं पार्टी को भरोसा भी है।
जिस तरह से भाजपा विद्युत वरण महतो को आगे बढ़ा रही है, उससे पता चलता है कि पार्टी में उनकी हालिया जिम्मेदारियों को देखते हुए, वे मंत्री पद के लिए सबसे बेहतर उम्मीदवार हैं। महतो की भूमिका, खास तौर पर विधानसभा चुनाव अभियान समिति में उनके नेतृत्व पर जोर, उनके मंत्री पद पर नियुक्ति की संभावना को बढ़ाता है।
ऐसे में ये सवाल उठता है कि आखिर विधानसभा चुनावों से पहले भाजपा ने कुर्मी समुदाय को साधने की कोशिश क्यों की है? असल में झारखंड में आदिवासियों के बाद कुर्मी जाति का भी प्रभाव है। आइए जानें झारखंड में कुर्मी जाति का कहां-कहां प्रभाव है? कुर्मी कितने प्रतिशत मतदाता हैं?
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झारखंड की राजनीति में कुर्मी जाति का कितना दबदबा?
झारखंड में कुर्मी जाति एक सामाजिक और राजनीतिक समूह है। उनकी संख्या और प्रभाव ने राज्य के राजनीतिक परिदृश्य में एक अहम जगह बना ली है। आदिवासी समुदाय के बाद झारखंड में कुर्मी जाति का राजनीति में खासा दबदबा है।
कुर्मी जाति, जो मुख्यत किसानी और खेती आधारित व्यवसायों में सक्रिय है, राज्य के विकास और सामाजिक संरचना में भी अहम भूमिका निभाते हैं। झारखंड में कुर्मी समुदाय खासकर रांची, धनबाद, हजारीबाग, देवघर और सिमडेगा जैसे जिलों में फैला हुआ है।
कुर्मी जाति का सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव: कुर्मी जाति के लोगों की सामाजिक स्थिति मजबूत है और उनका राजनीतिक प्रतिनिधित्व भी बढ़ता जा रहा है। कई कुर्मी नेता विभिन्न राजनीतिक पार्टियों में अहम पदों पर हैं, जिससे उनकी राजनीतिक शक्ति में बढ़ी है। विनोद बिहारी महतो, निर्मल महतो, शिवा महतो से लेकर जगरनाथ महतो, टेकलाल महतो और मथुरा प्रसाद महतो जैसे नेताओं ने झारखंड की राजनीति में कुर्मी जाति का दबदबा बनाए रखा है।
कुर्मी मतदाता प्रतिशत: झारखंड में अनुसूचित जनजाति की आबादी लगभग 26 से 30 फीसदी है। वहीं कुर्मी जाति की आबादी लगभग 16 फीसदी है। हालांकि कुर्मी जाति के मतदाताओं का प्रतिशत 10-12% के बीच आंका जाता है। यह संख्या चुनावी समीकरणों में अहम भूमिका निभाती है। कुर्मी समुदाय की एकजुटता और प्रभावी नेतृत्व उन्हें चुनावी राजनीति में एक निर्णायक ताकत बनाता है।
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झारखंड विधानसभा चुनाव 2019 के दौरान कुर्मी समाज से बीजपी की दूरिया बढ़ गई थी। ऐसे में इस चुनवा में भाजपा ये गलती दोबारा नहीं दोहराना चाहेगी। कुर्मी समाज की अनदेखी किसी भी राजनीतिक दल के लिए मुश्किल पैदा कर सकती है। कुर्मी समाज की सामाजिक एकता आदिवासियों की अपेक्षा ज्यादा मजबूत है।












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