झांसी के महारानी लक्ष्मीबाई अस्पताल में लगी भीषण आग, 10 नवजात बच्चों की मौत, डिप्टी सीएम ने दिए जांच के आदेश

उत्तर प्रदेश के झांसी में दिल दहला देने वाला हादसा सामने आया है। यहां महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में लगी भीषण आग में 10 नवजात बच्चों की झुलसकर मौत हो गई। यह हादसा नियोनेटल इंटेसिव केयर यूनिट में हुआ है। झांसी के डीएम अविनाश कुमार ने कहा कि शुरुआती तौर पर लगता है कि आग शॉर्ट सर्किट से लगी है। वहीं झांसी के डीआईजी कलानिधि नैथानी ने कहा कि वॉर्ड में 54 बच्चे थे, जिसमे से 16 को हल्की चोटे आई हैं, 28 बच्चे सुरक्षित हैं।

जानकारी के अनुसार आग शुक्रवार की रात तकरीबन 10.30 बजे लगी है। जिसके बाद अस्पताल में अफरा-तफरी मच गई। हादसे के बाद मौके पर फायर ब्रिगेड की छह गाड़ियां पहुंची और आग को बुझाने का काम शुरू किया। आग को रात 12.30 बजे बुझा दिया गया था। सूत्रों की मानें तो सुरक्षा अलार्म समय पर नहीं बचा। चीफ मेडिकल सुप्रिटेंडेंट ने कहा कि ऑक्सीजन कंस्ट्रेंशन में आग की वजह से यह काफी तेजी से फैल गई।

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झांसी के कमिश्नर बिमल कुमार दुबे ने कहा कि बच्चों को सबसे अच्छी मेडिकल ट्रीटमेंट मुहैया कराई जा रही है, मुझे लगता है कि जल्द ही वो स्वास्थ्य लाभ प्राप्त करेंगे। वहीं भाजपा विधायक राजीव सिंह परीचा ने कहा कि यह घटना बहुत ही दुखद है। छोटे-छोटे बच्चे जो भर्ती थे, उनकी आयु बहुत कम थी, कोई 10 दिन का कोई 5 दिन का था। लगभग 10 बच्चे हताहत हुए हैं। 35 से अधिक बच्चे जिनका इलाज चल रहा था, उन्हें बचाया गया। जो बच्चे बचे हुए हैं उनका बेहतरीन इलाज किया जा रहा है। पूरी सरकार मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों के संपर्क में है। आग शॉर्ट सर्किट की वजह से लगी है। आग को ऑक्सीजन ने पकड़ लिया, जिसकी वजह से आग काफी तेजी से फैल गई।

हादसे के बाद उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक झांसी के मेडिकल कॉलेज पहुंचे। उन्होंने कहा कि 10 बच्चों की दुखद मृत्यु हई है। हम परिजनों के साथ मिलकर पर बच्चों की पहचान कर रहे हैं कि वह किनके हैं। घटना की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए गए हैं। पहली जांच शासन स्तर पर होगी, दूसरी जांच जिले स्तर पर होगी। तीसरी जांच मजिस्ट्रेट स्तर पर होगी। जो भी कारण होंगे, उसे लोगों के सामने हम रखेंगे। सबसे बड़ी बात है कि हम यह पता लगाने की कोशिश करेंगे कि हादसा किस वजह से हुई है। बच्चों के परिजनों के साथ पूरी सरकार खड़ी है। घटना की जानकारी मिलने के बाद हम जिला प्रशासन के संपर्क में हैं। हम पता लगाने की कोशिश करेंगे कि किसकी लापरवाही है। जो भी इसके लिए जिम्मेदार होगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। हमारे चिकित्सकों ने बहादुरी के साथ बच्चों को बचाने का काम किया है। हमारे सामने सबसे बड़ी चुनौती बच्चे घायल बच्चों को उच्च स्तरीय इलाज दें।

अस्पताल का फायर सेफ्टी ऑडिट हुआ है। जून माह में हमने यहां मॉक ड्रिल भी किया था। लेकिन यह घटना क्यों घटी, पूरी जांच रिपोर्ट आने के बाद हम कह पाएंगे। अभी जो वर्तमान स्थिति हैं, 17 बच्चे हमारे हॉस्पिटल में हमारे पास हैं। 4 बच्चे प्राइवेट में ले गए हैं, 3 मातृत्व ले गए हैं, एक ललितपुर ले गए हैं, 6 बच्चे यहीं अपनी माता के पास हैं। जिन 10 बच्चों की मौत हुई है, उसमे से 7 की पहचान हो गई है, बाकी की पहचान के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।

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