खौफनाक साजिश: प्रधान पति को फ़साने के लिए खुद की पत्नी को मारी थी गोली, अब कर लिया सुसाइड
एक 70 साल के बुजुर्ग ने अपने गाँव के प्रधान परिवार को फंसाने के लिए ऐसी साजिश रची जिसने पहले उसकी पत्नी की जान ली और फिर उसे अपनी जान से भी हाथ धोना पड़ा। मगर शुरुवात में पुलिस भी इस 70 वर्षीय आरोपी के झांसे में आ गई थी।

उत्तर प्रदेश के झाँसी में एक 70 वर्षीय व्यक्ति ने अपनी 65 साल की पत्नी सुखमारी की हत्या कर दी। फिर अपने कंधे पर खुद गोली मारकर लूट और हत्या की झूठी कहानी गढ़ दी। पुलिस ने शुरू में नारायण की कहानी पर यकीन भी कर लिया। हालांकि, पुलिस ने जल्द ही आरोपी की साजिश का पर्दाफाश कर दिया। जिसके बाद आरोपी ने वारदात के 10 दिन बाद झांसी मेडिकल कॉलेज की तीसरी मंजिल से कूदकर जान दे दी।
10 दिन पहले चली थी गोली, पत्नी की हुई थी मौत
दरअसल, इस साजिश की शुरुवात 26 मई को हुई एक घटना से होती है। उस दिन रात करीब 10 बजे लारौन गांव में आरोपी नारायण की पत्नी सुखमारी राजा (65) की गोली लगने से मौत हो जाती है। वहीं आरोपी नारायण के कंधे पर गोली लगती है। जब पुलिस को घटना की जानकारी मिलती है तो आरोपी पुलिस को बताता है कि प्रधान परिवार के गोपाल सिंह, सुरेंद्र सिंह और आदित्य घर पर आए थे। पंचायत के बहाने वे उन्हें प्रधान के घर ले गए। वहां पहुंचते ही उन्होंने 22 लाख रुपयों से भरा बैग छीना और विरोध करने पर गोली चला दी। इसमें पत्नी सुखमारी की मौत हो गई।
पुलिस को किया गुमराह, रची खतरनाक साजिश
आरोपी ने अपनी बनाई गई कहानी को पुख्ता करने के लिए पुलिस को यह भी बताया कि उसने 2012 में पड़ोसी प्रीतम सिंह और बल्लन खरे से 4.90 लाख रुपए का कर्ज लिया था। इसके बदले में अपनी जमीन गिरवी रखी थी। लेकिन उन लोगों ने धोखे से 18 बीघा जमीन अपने नाम करा ली। अब वे जमीन जोतने की बात कह रहे थे। हमारा परिवार विरोध कर रहा था। इसको लेकर कई बार पंचायत हो चुकी थी। लेकिन मामला नहीं निपट पाया। जिसके चलते उन्होंने इस घटना को अंजाम दिया है।

ऐसे हुआ साजिश का पर्दाफाश
वहीं जब इस मामले की जांच आगे बढ़ी तो पुलिस को नारायण पर शक होने लगा। SSP राजेश एस. ने बताया, क्राइम लोकेशन और साक्ष्य नारायण की बताई कहानी से मिल नहीं रहे थे। नारायण ने पुलिस को बयान दिए थे कि हत्याकांड के बाद 3 लोगों ने उसे संभाला। जबकि तीनों गवाह में से दो उस दिन गाँव में ही नहीं थे और तीसरा इस बात से मुकर गया।
वहीं जब उससे पूछा गया कि 22 लाख रुपए कहां से लेकर आए थे तो जिन लोगों के नारायण ने नाम बताए उनमें से किसी ने भी नारायण सिंह को पैसे नहीं दिए। साथ ही पुलिस को छानबीन में पता चला कि मुख्य आरोपी घटना के समय गांव से दूर मऊरानीपुर में था। वह हत्या के समय मऊरानीपुर के एक CCTV में भी नजर आ रहा था।
जांच जब थोड़ी और आगे बढ़ी तो मालूम चला कि नारायण ने कुछ दिनों पहले ही मऊरानीपुर निवासी एक युवक से तमंचा खरीदा था। पुलिस ने उस युवक से पूछताछ की तब उसने भी नारायण से जुड़े कई राज उगल दिए।
पकडे जाने के डर से दे दी जान
इसके बाद पुलिस द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, सोमवार को नारायण के डिस्चार्ज होने के साथ उसे गिरफ्तार करके जेल भेजने की तैयारी थी। इसकी नारायण को भनक लग गई। खुद को बचाने के लिए उसने छत से छलांग लगाकर सुसाइड कर लिया। आपको बताते चलें कि नारायण सिंह कटेरा थाने का पुराना हिस्ट्रीशीटर था। उसके ऊपर 1998 में अपहरण कर हत्या करने का केस दर्ज हुआ था। इसके अलावा, गुंडा एक्ट, चोरी, हत्या की कोशिश, आर्म्स एक्ट समेत अन्य धाराओं में आधा दर्जन से अधिक केस दर्ज थे।
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