सैकड़ों ट्वीट किए, दूतावास से मांगी मदद, Ethiopia से लौटे शख्स ने बताई दर्द भरी Story, जानें पूरा मामला
Jaunpur News: विदेश में नौकरी करने और अच्छा पैसा कमाने के लालच में लोग किस तरह दलालों के चंगुल में फंस जाते हैं और उन्हें अपने देश में वापस लौटने में काफी परेशानी उठानी पड़ती है। ऐसा ही एक मामला उत्तर प्रदेश के जौनपुर से सामने आया है।
दरअसल, जौनपुर निवासी विपिन सिंह वर्ष 2021 में काम करने के लिए अफ्रीकी महाद्वीप के इथोपिया गए थे। उन्हें वहां नौकरी तो मिल गई लेकिन कंपनी की ओर से उन्हें वेतन नहीं दिया गया। विपिन के साथ कुल एक दर्जन लोगों को कंपनी ने बंधक बना लिया था।

काफी प्रयासों के बाद विपिन बुधवार को वापस लौटे और परिवार से मिलने के बाद अपना दर्द बयां करते हुए उनकी आंखें भर आईं। विपिन ने मीडिया को बताया कि वे साल 2012 में इथोपिया में रोजगार के सिलसिले से एक शख्स के माध्यम से गए थे।
विपिन ने बताया कि वहां पर काम के दौरान स्टील की एक कंपनी में उनकी मुलाकात कंपनी के मैनेजर से हुई। हालांकि उस समय वे इथोपिया में कुछ दिन काम करने के बाद वापस लौट आए। फिर साल 2021 में वह मैनेजर उनसे संपर्क किया।
मैनेजर ने उन्हें फिर से इथियोपिया में नौकरी देने के लिए बुलाया। विपिन का कहना है कि 23 अगस्त 2021 को मैनेजर के कहने पर वह फिर से इथियोपिया गए। वहां जाकर उन्हें नौकरी मिल गई। काफी समय तक सब कुछ ठीक चला लेकिन करीब नौ माह से मैनेजर ने सैलरी देना बंद कर दिया।
विपिन के अलावा एक दर्जन और लोग भी थे और कंपनी ने उन सभी के साथ एक जैसा रवैया अपनाया। विपिन ने बताया कि पैसे न मिलने की वजह से उन्हें खाने में दिक्कत होने लगी। खाने में उन्हें दाल, चावल और रोटी मिलती थी और नाश्ते में उन्हें ब्लैक टी के साथ रोटी मिलती थी।
एक हजार से ज्यादा ट्वीट कर मांगी मदद
विपिन ने बताया कि जब उन्हें परेशानी हुई तो उन्होंने वहां से निकलने के लिए ट्विटर (अब एक्स) का सहारा लिया। उन्होंने भारतीय विदेश मंत्रालय को एक हजार से ज्यादा बार ट्वीट किया लेकिन लोकसभा चुनाव के चलते उन्हें कोई मदद नहीं मिली।
चुनाव के बाद विदेश मंत्रालय ने मामले को गंभीरता से लिया और भारतीय दूतावास से संपर्क कर मदद के लिए दबाव बनाया गया। उसके बाद दूतावास वालों ने संपर्क किया और वापसी की बात तय हुई। फिर घरवालों ने टिकट के पैसे भेजे जिससे विपिन वापस आ सके। वापस लौटने के बाद विपिन अपने परिवार के साथ हैं। विपिन कहते हैं कि वापसी की उम्मीद खत्म हो गई थी लेकिन विदेश मंत्रालय ने भी काफी मदद की जिसके लिए विपिन और उनके परिवार वाले सरकार का शुक्रिया अदा कर रहे हैं।












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