J&K के इस छोटे से गांव ने सिखाया, कैसे खत्म हो सकता है कोरोना
शोपियां, 10 जून: जम्मू-कश्मीर के शोपियां जिले का एक छोटा सा गांव हीरापुरा पिछले साल भयानक रूप से कोरोना वायरस की चपेट में आया था। लेकिन, उससे सबक लेकर गांव वालों ने दूसरी लहर में ऐसी सजगता दिखाई है कि यह जानलेवा वायरस इसबार वहां के स्थानीय लोगों को छू भी नहीं पाया है। इस वायरस के खिलाफ गांव वालों की यह सजगता तीसरी लहर की आशंका के मद्देनजर पूरे देश के लिए एक मिसाल बन सकती है। यह सब इसलिए हो पाया है, क्योंकि हीरापुरा के लोगों ने कोविड अनुकूल व्यवहार का पालन किया है और प्रशासन भी अपने स्तर पर वैक्सीनेशन को लेकर बहुत ही ज्यादा सक्रिय है।

पहली लहर में हॉटस्पॉट था, दूसरी लहर में बच गया
दक्षिण कश्मीर के सोपियां जिला का हीरापुरा गांव कोविड की पहली लहर में हॉटस्पॉट बना हुआ था। लेकिन, मंगलवार को स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया है कि दूसरी लहर जो कि ज्यादा भयावह थी, उससे यह गांव बिना किसी नुकसान के बच निकला है। शोपियां के चीफ मेडिकल ऑफिसर डॉक्टर अर्शिद हुसैन टाक ने कहा है, 'पिछले साल यह हॉटस्पॉट था लेकिन इस साल हमें कभी कभार ही केस देखने को मिले हैं, क्योंकि शुरुआत से लोगों ने काफी सावधानियां बरती हैं और कोविड-19 को रोकने के लिए सभी एसओपी (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसेड्योर ) फॉलो किए हैं।' लगभग 3,000 की आबादी वाला यह गांव राजधानी श्रीनगर से करीब 65 किलोमीटर दूर है। इस बस्ती में रहने वाले अधिकतर लोग या तो फलों की खेती करने वाले किसान हैं या फिर छोटे-मोटे कारोबारी हैं।

'यात्री पॉजिटिव मिल सकते हैं, गांव वाले नहीं।'
पिछले साल इस छोटे से गांव में 110 लोग कोरोना पॉजिटिव हो गए थे और इसे रेड जोन घोषित कर दिया गया था। लेकिन, इस साल पूरे देश में मची तबाही के बावजूद यहां अबतक सिर्फ 12 केस ही सामने आए हैं, वह भी इसलिए कि उनमें से अधिकतर लोग कहीं बाहर से यात्रा करके आए हैं; और काफी आक्रामक टेस्टिंग की मुहिम के चलते उनका तुरंत टेस्ट किया गया है। सीएमओ के मुताबिक, 'हम बहुत ही एग्रेसिव टेस्टिंग कर रहे हैं, फिर भी इस समय गांव में एक भी पॉजिटिव केस नहीं है। यह मुगल रोड पर है और कश्मीर के इस इलाके से गुजरने वाले सभी यात्रियों की जांच की जाती है। यात्री पॉजिटिव मिल सकते हैं, लेकिन गांव वाले नहीं। '

शोपियां में वैक्सीनेशन के काम में भी तेजी
दूसरी तरफ जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने भी इलाके में संक्रमण रोकने के लिए 45 से ऊपर की उम्र वालों के लिए वैक्सीनेशन कैंपेन पर पूरा जोर लगाया है। यह गांव पुंछ और राजौरी को जोड़ने वाले मुगल रोड पर स्थित है। टाक के मुताबिक गांव में 45 से ऊपर की श्रेणी में 600 लोग हैं और उन सबको इस उम्र वालों के लिए अप्रैल में शुरू हुए टीकाकरण अभियान के दो हफ्ते के अंदर ही पहली डोज लगा दी गई थी। उन्होंने कहा, 'केंद्र शासित प्रदेश में 45 से ऊपर की एज ग्रुप वाले में हम पहले हैं, जहां 100 फीसदी वैक्सीनेशन पूरा हो चुका है। दूसरी लहर में हमारी पॉजिटिविटी रेट 3 फीसदी से कम है, जबकि मृत्यु दर 0.1 फीसदी है।'

कश्मीर का सबसे कम प्रभावित जिला है शोपियां
कोविड संक्रमण और मौतों के मामले में शोपियां जम्मू-कश्मीर के 10 जिलों में सबसे कम प्रभावित है। 9 जून तक यहां कुल 5,466 केस सामने आए थे और 57 लोगों की मौत हुई थी। ऐक्टिव केस के मामले में भी बांदीपुरा के बाद यह दूसरे नंबर पर और इस समय यह संख्या सिर्फ 569 है। जबकि पूरे प्रदेश में कुल 1,87,000 मामले सामने आ चुके हैं और 2,118 मौत हुई है। (तस्वीरें-प्रतीकात्मक)












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