जम्मू कश्मीर में गैर स्थानीय लोगों को मतदान का अधिकार, भड़का विपक्ष, उमर बोले- इससे BJP को नहीं मिलेगी मदद
श्रीनगर, 18 अगस्त। जम्मू कश्मीर को लेकर चुनाव आयोग ने बड़ा फैसला लिया है। जम्मू कश्मीर के मुख्य चुनाव अधिकारी हृदेश कुमार ने ऐलान किया है कि अब जम्मू कश्मीर में रह रहे गैर स्थानीय लोग भी चुनाव में हिस्सा ले सकेंगे और मताधिकार कर सकते हैं। चुनाव आयोग के फैसले के बाद यहां रह रहे कर्मचारी, छात्र, मजदूर या फिर जो भी बाहर से जम्मू कश्मीर में काम के लिए आया है वह अपना नाम वोटर लिस्ट में रजिस्टर करवा सकता है और जम्मू कश्मीर के चुनाव में वोट कर सकता है।

महबूबा मुफ्ती ने कही ये बात
वहीं चुनाव आयोग के इस फैसले का पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने विरोध किया है। महबूबा मुफ्ती ने कहा कि भारत सरकार ने पहले जम्मू कश्मीर में चुनाव को स्थगित किया, इसे पहले भारतीय जनता पार्टी के पक्ष में झुकाने की दिशा में काम किया गया, गैर स्थानीय लोगों को वोट देना का अधिकार, स्पष्ट है कि यह चुनाव परिणामों को प्रभावित करेगा। इस फैसले का असल उद्देश्य स्थानीय लोगों की शक्ति को कम करना है, ताकि घाटी में सख्ती के साथ शासन को जारी रखा जा सके।

उमर अब्दुल्ला ने बोला हमला
वहीं पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि क्या भाजपा इतना असुरक्षित महसूस कर रही है उसे जम्मू कश्मीर के असल वोटर्स पर भरोसा नहीं है, आखिर उसे क्यों बाहर के लोगों को चुनाव में सीट जीतने के लिए यहां लाने की जरूरत पड़ रही है। ये सब चीजें भाजपा की मदद नहीं करेगी, अगर घाटी के असल वोटर्स को वोट करने की अनुमति मिले। माना जा रहा है कि घाटी में आने वाले समय में चुनाव कराए जा सकते हैं।

घर-घर जाकर प्रचार
मुख्य चुनाव अधिकारी हृदेश कुमार ने बताया कि 25 नवंबर तक मतदाता सूचि को तैयार कर लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह चुनौतीपूर्ण काम है। एक अक्टूबर 2022 या उससे पहले जिन लोगों की उम्र 18 वर्ष पूरी हो चुकी है, उन्हें वोट देने के लिए पंजीकृत किया जाएगा। तमाम त्रुणियों को खत्म करके मतदाता सूचि को 25 नवंबर तक पूरा कर लिया जाएगा। चुनाव आयोग ने घर-घर जाकर इसके लिए प्रचार की योजना बनाई है।












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