Kashmir Pahalgam Terror Attack: क्या है हमले के पीछे का सच? रिटायर्ड BSF ADG ने बताए 3 बड़े कारण और 3 मकसद
Kashmir Pahalgam Terror Attack: कश्मीर के पहलगाम में आतंकियों ने 22 अप्रैल 2025 को निहत्थे पर्यटकों पर हमला कर दिया। अब तक की जानकारी के मुताबिक, 20 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है और कई घायल हैं। इस हमले की जिम्मेदारी लश्कर-ए-तैयबा की सहयोगी इकाई TRF ने ली है। लेकिन, इस बार सवाल सिर्फ सुरक्षा व्यवस्था पर नहीं है, बल्कि उन रणनीतिक मकसदों पर है, जो इस हमले के पीछे छिपे हैं।
Oneindia से खास बातचीत में बीएसएफ के रिटायर्ड एडीजी पीके मिश्रा ने एक इंटरव्यू में तीन मुख्य कारण, तीन उद्देश्य और दो कड़े उपायों की बात कही है, जिन्हें गंभीरता से समझना बेहद जरूरी है। आइए विस्तार से समझें...

हमले के पीछे के 3 बड़े कारण - क्या सच में इंटेलिजेंस फेल हुआ?
1. पूर्ण खुफिया विफलता
आतंकियों का ग्रुप इतनी संवेदनशील जगह तक पहुंचा, ट्रैकिंग जोन में घुसा और खुले में फायरिंग कर भाग गया - ये दर्शाता है कि इंटेलिजेंस नेटवर्क पूरी तरह फेल रहा।
2. लश्कर के स्लिपर सेल अब भी एक्टिव
मिश्रा का मानना है कि लश्कर-ए-तैयबा के स्लिपर सेल आज भी घाटी में सक्रिय हैं, खासतौर से पीर पंजाल रेंज और अनछुए इलाकों में। ये नेटवर्क धीरे-धीरे फिर से जाग रहा है।
3. पहलगाम जैसे अहम पॉइंट पर सुरक्षा तैनाती की चूक
पहलगाम सिर्फ टूरिस्ट पॉइंट नहीं है, ये अमरनाथ यात्रा रूट का हिस्सा भी है। लेकिन राज्य सरकार की ओर से वहां प्रिवेंटिव सिक्योरिटी नहीं दिखाई दी।
हमले के 3 मकसद - कश्मीर को फिर से दुनिया की निगाहों में लाना
1. अमेरिका को संदेश देना - 'यहां सब ठीक नहीं'
हमले के दिन ही अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भारत में थे। ये हमला उसी समय किया गया ताकि इंटरनेशनल मीडिया का ध्यान कश्मीर पर जाए।
2. भारत में सांप्रदायिक तनाव बढ़ाना
मंजूनाथ नामक व्यक्ति को नाम पूछकर गोली मारना, और उसकी पत्नी से 'जाओ मोदी को बता देना' जैसे शब्द कहना दर्शाता है कि इसका उद्देश्य हिंदू समुदाय को टारगेट करना और देश में तनाव फैलाना था।
3. आशीर मुनीर के भाषण से लिंक
पीके मिश्रा के अनुसार, पाकिस्तान में हाल ही में ISI समर्थित संगठनों ने भड़काऊ भाषण दिए, और ये हमला उसी भाषण के तुरंत बाद आया - यानी सोची समझी रणनीति का हिस्सा।
2 कड़े उपाय - अब और ढिलाई नहीं
1. राजनीति को किनारे रखकर राष्ट्रीय सुरक्षा को प्राथमिकता दें
ये वक्त राजनीतिक बयानबाज़ी का नहीं, बल्कि सुरक्षा और खुफिया सुधार का है। हर पार्टी को मिलकर काम करना होगा।
2. पूरे पीर पंजाल रेंज में सघन ऑपरेशन
TRF, लश्कर और जैश के स्लिपर सेल्स और जिहादी ट्रेनिंग कैंप्स को चिन्हित कर ऑपरेशन ऑलआउट 2.0 जैसे अभियान चलाए जाएं।
ये सिर्फ हमला नहीं, भारत को दी गई खुली चुनौती है
पहलगाम में हुआ ये हमला भारत की आत्मा - टूरिज्म, सहिष्णुता और बहुलता - पर सीधा वार है। इससे पहले कि घाटी फिर किसी 90s के दौर की ओर बढ़े, सरकार और सुरक्षा एजेंसियों को सामूहिक, निर्णायक और बिना देरी के कार्रवाई करनी होगी।












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