J&K Elections: निर्दलीय उम्मीदवारों ने कैसे उड़ा दी है NC नेता उमर अब्दुल्ला की नींद?
Jammu Kashmir Chunav: जम्मू और कश्मीर में इस बार निर्दलीय उम्मीदवारों और छोटी-छोटी पार्टियों के प्रत्याशियों की भरमार लगी है। अप्रत्याशित रूप से निर्दलीय प्रत्याशियों और अनजान दलों को देखकर नेशनल कांफ्रेंस और पीडीपी नेताओं की बौखलाहट बढ़ती जा रही है। अब्दुल्ला तो इसका ठीकरा भारतीय जनता पार्टी पर फोड़ने लगे हैं।
नेशनल कांफ्रेंस नेता उमर अब्दुल्ला का दावा है कि निर्दलीयों के अलावा कुछ अन्य छोटे दलों के साथ बीजेपी ने 'डील' कर रखी है। अब्दुल्ला का कहना है कि बीजेपी को लगता है कि ये लोग सरकार बनाने के दौरान उसके काम आ सकते हैं। अपने परिवार के गढ़ माने जाने वाले जिस गांदरबल सीट से उमर चुनाव लड़ रहे हैं, वहां भी उनके मुकाबले सात निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं।

बारामूला वाला हाल की सोचकर डरे उमर उब्दुल्ला?
उमर खासकर जेल में बंद अलगाववादी नेता सरजन अहमद वागे उर्फ सरजन बरकती को अपने खिलाफ गांदरबल में चुनाव लड़ता देखकर हैरान हैं। क्योंकि, बारामूला लोकसभा चुनाव में अपनी करारी हार उनको अभी तक चुभ रही है। वहां वे निर्दलीय प्रत्याशी इंजीनियर राशिद से ही चुनाव हारे थे और वह भी जेल में ही बंद रहकर चुनाव लड़े।
उमर ने अमित शाह पर भी उठाए सवाल
एक रैली में नेशनल कांफ्रेंस नेता ने कहा, 'वे सर्फ एक व्यक्ति को टारगेट करना चाहते हैं.....गांदरबल में नेशनल कांफ्रेंस के उम्मीदवार को।' इन सब वजहों से उमर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह पर भी सवाल उठा रहे हैं।
उनका कहना है कि हाल ही में जम्मू में भाजपा के घोषणापत्र जारी करने के दौरान शाह अपनी पार्टी और पीपुल्स कॉन्फ्रेंस पर 'चुप' क्यों रहे, जबकि अन्य दलों पर निशाना साधते दिखे। दावा किया जाता है कि अपनी पार्टी और पीपुल्स कॉन्फ्रेंस का बीजेपी के साथ समझौता है।
पहले दो चरणों में 44% निर्दलीय और लगभग दो दर्जन छोटे दल लड़ रहे चुनाव
जम्मू कश्मीर विधानसभा चुनाव के पहले दो चरणों में कुल 145 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं, जो कुल 330 उम्मीदवारों का 44% है। निर्दलीयों के अलावा जम्मू-कश्मीर में इस बार एक नया ट्रेंड ये दिख रहा है कि करीब दो दर्जन ऐसे छोटी-छोटी पार्टियां भी मैदान में हैं, जिनके बारे में कम ही लोग जानते हैं और उनमें से भी कई इस केंद्र शासित प्रदेश से बाहर रजिस्टर्ड हैं।
कई छोटे दलों का रजिस्ट्रेशन है जम्मू-कश्मीर से बाहर
मसलन, अनारक्षित समाज पार्टी कम से कम दो सीटों पर चुनाव लड़ रही है और यह यूपी के फर्रुखाबाद में रजिस्टर्ड है। जाति व्यवस्था के खिलाफ लड़ाई को अपना मुख्य एजेंडा बताने वाली इस पार्टी ने उमर के खिलाफ भी उम्मीदवार उतारा था, लेकिन उसका नामांकन ही खारिज हो गया।
चन्नापुरा सीट पर भाजपा प्रत्याशी का बेटा निर्दलीय उम्मीदवार
अनारक्षित समाज पार्टी ने चन्नापुरा सीट से मेहराज हिलाल वानी को टिकट दिया है। इसी सीट पर इनके पिता हिलाल अहमद वानी बीजेपी प्रत्याशी हैं, जिनके नाम की घोषणा होते ही भाजपा के चन्नापुरा अध्यक्ष समेत 40 सदस्यीय उनकी टीम ने इस्तीफा दे दिया था। हिलाल अहमद कांग्रेस से बीजेपी में आए हैं।
इनके खर्चे कौन उठाता है-पीडीपी नेता
इसी तरह से संपूर्ण भारत क्रांति पार्टी नई दिल्ली के विकासपुरी में रजिस्टर्ड है तो नेशनल लोकतांत्रिक पार्टी का पता कानपुर का है। जबकि, जम्मू-कश्मीर में 'पंजीकृत गैर-मान्यताप्राप्त' दलों की संख्या तो और भी ज्यादा है। इनमें एक गरीब डेमोक्रेटिक पार्टी भी है, जिसने लोकसभा चुनावों में पीडीपी सुप्रीमो महबूबा मुफ्ती के खिलाफ अनंतनाग-राजौरी सीट पर उम्मीदवार उतारा था, जिसे 2,700 वोट मिले थे। मुफ्ती भी हार गई थीं।
पीडीपी नेता नईम अख्तर ने अनजान दलों के चुनावों में मौजूद होने को लेकर इंडियन एक्सप्रेस से कहा है, 'पहले यह शायद वोट प्रतिशत बढ़ाने के लिए किया गया था। लेकिन, अब ये बहुत ज्यादा इस्तेमाल किया जाने वाला उपकरण बन चुका है, और लोग इसे पहचान चुके हैं।' उनका सवाल है कि इनके खर्चे कौन उठाता है।












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