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TRF: क्या है लश्कर ए तैयबा की हिट स्क्वॉड 'द रजिस्टेंस फ्रंट'? जिसने ली पहलगाम हमले की जिम्मेदारी

The Resistance Front Lashkar-e-Taiba: जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले के पहलगाम में मंगलवार, 22 अप्रैल को आतंकवादियों ने पर्यटकों को अपना निशाना बनाया और बेकसूर लोगों की गोलियों से भून दिया। इस हमले में अब तक 25 से अधिक पर्यटकों के मारे जाने और 20 से ज्यादा लोगों के घायल होने की खबर है। इस हमले की जिम्मेदारी लश्कर-ए-तैयबा के द रेजिस्टेंस फ्रंट कोर ने ली है।

जम्मू-कश्मीर में सक्रिय ये आतंकवादी संगठन 'द रेजिस्टेंस फ्रंट' (TRF) पिछले कुछ वर्षों से घाटी में सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक आतंकवाद की दुनिया में एक नई चुनौती बनकर उभरा है।

TRF-Lashkar-e-Taiba

क्या है टीआरएफ?, कैसे करता काम करता है और इसका कश्मीर में कितना प्रभाव है? आईए विस्तार से जानते हैं...

TRF Lashkar-e-Taiba: क्या है 'द रेजिस्टेंस फ्रंट' ?

TRF यानी 'द रेजिस्टेंस फ्रंट' एक ऐसा संगठन है जिसके काम करने के तौर तरिके बिल्कुल अलग और नए हैं। दरअसल यह पाकिस्तान के लश्कर-ए-तैयबा (LeT) का एक नया अंग है जो उसके लिए ही काम करता है। इसे फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की कड़ी सख्ती के चलते एक 'स्वदेशी जन आंदोलन' की आड़ में पेश किया गया है।

TRF की स्थापना एक सोची समझी चाल है और इसके पीछे की रणनीति पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI की उस साजिश का हिस्सा है, जिसमें आतंकवाद को नया नाम, नया चेहरा देकर जम्मू कश्मीर में आतंक का नए अध्याय शुरू करने की कोशिश की जा रही है।

पहली बार TRF खुल कर तब सामने आया जब साल 2019 में भारत सरकार ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाकर राज्य का विशेष दर्जा समाप्त कर दिया। इसके बाद पाकिस्तान ने कश्मीर में उग्रवाद को बनाए रखने के लिए लश्कर-ए-तैयबा की ऑनलाइन यूनिट के रूप में TRF की नींव रखी।

मीडिया रिपोर्टस की मानें तो, मात्र छह महीनों में यह संगठन सोशल मीडिया पर लोकप्रिय हो गया और धीरे-धीरे यह तहरीक-ए-मिल्लत इस्लामिया और गजनवी हिंद जैसे आतंकी संगठनों के साथ मिलकर एक संगठन के रूप में काम करने लगा। इतना ही नहीं TRF ने कश्मीर में अपनी साख जमाने के लिए वहां होने वाले बड़े-छोटे सभी आतंकी हमलों की जिम्मेदारी लेने लगा।

The Resistance Front: लश्कर की ना-पाक चाल

FATF ने लश्कर, हिजबुल जैसे चरमपंथी संगठनों पर सख्ती करने लगा जिसके चलते लश्कर-ए-तैयबा को अपना नाम बदलने की जरूरत पड़ी। इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट बताती है कि लश्कर ने धार्मिक नामों की जगह अब 'रेजिस्टेंस' जैसे शब्दों का प्रयोग करना शुरू कर दिया ताकि यह आंदोलन स्वदेशी और वैचारिक लगे।

TRF को इसी रणनीति के तहत खड़ा किया गया। रिपोर्ट में एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से कहा गया है कि पाकिस्तान नहीं चाहता कि आतंकी संगठनों के नामों से धार्मिक पहचान जुड़ी हो, इसलिए उन्होंने 'द रेजिस्टेंस फ्रंट' जैसा नाम चुना ताकि यह एक स्थानीय विद्रोह जैसा लगे।

2020 से TRF ने घाटी में कई आतंकी हमलों की जिम्मेदारी लेना शुरू कर दी। चाहे हमला कहीं भी हो, उसका श्रेय TRF लेता रहा जबकि उसके पीछे लश्कर, जैश या हिजबुल के ही आतंकियों का हाथ रहता था। इन संगठनों का मकसद स्पष्ट था इन हमलों में पाकिस्तानी आतंकी संगठनों का नाम सामने न आए और अंतरराष्ट्रीय कड़ाई से बचा जा सके।

कैसे काम करता है लश्कर का ये नया 'ट्टू'?

  • कुपवाड़ा और सोपोर जैसे इलाकों से TRF के ओवरग्राउंड वर्कर्स सक्रिय रुप से काम कर रहे हैं और इस नए संगठन के लिए घाटी के युवाओं की भर्ती कर रहे हैं।
  • TRF को स्थानीय आंदोलन के रूप में प्रचारित किया गया, जबकि इसके प्रमुख नेता साजिद जट्ट, सज्जाद गुल और सलीम रहमानी-सभी लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े रहे हैं।
  • वैसे तो TRF की कोई स्पष्ट नेतृत्व संरचना नहीं है लेकिन इसकी लश्कर-ए-तैयबा के साथ नजदीकियां काफी गहरी हैं।
  • हिट एंड रन अटैक: TRF छोटे समूहों में काम करती है और त्वरित हमले करती है।
  • सोशल मीडिया का प्रयोग: यह संगठन सोशल मीडिया पर अपने पोस्ट, वीडियो और स्टेटमेंट के माध्यम से युवाओं को कट्टरपंथी विचारों से जोड़ने का प्रयास करता है।
  • प्लाजिबल डिनायबिलिटी (Plausible Deniability): TRF जैसे नए नामों का उपयोग करके पाकिस्तान आतंकी गतिविधियों से सीधा संबंध होने से इनकार कर सकता है।

TRF की टारगेट किलिंग, गैर-मुस्लिम निशाने पर

TRF को लश्कर-ए-तैयबा के हिट स्क्वाड के तौर पर भी देखा जाता है पिछले कुछ वर्षों में जम्मू-कश्मीर में टारगेट किलिंग की घटनाओं में इजाफा हुआ है, जिसमें TRF की भूमिका प्रमुख रही है। संगठन ने कश्मीरी पंडितों, गैर-मुस्लिम नागरिकों, स्थानिय नेताओं, पंचायत सदस्यों और सुरक्षाकर्मियों को निशाना बनाया है।

2022 में जम्मू-कश्मीर पुलिस के अनुसार, मारे गए आतंकियों में सबसे ज्यादा TRF और लश्कर से जुड़े थे। इसके अलावा आतंक के रास्ते पर चलने वाले 100 युवाओं में से 74 ने TRF जॉइन किया। ये संगठन सरकार से रुष्ट घाटी के नौजवानों को बरगला कर उन्हें दहशत फैलाने की ट्रेंनिग देता है।

2023 की शुरुआत में भारत सरकार ने TRF को गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम-UAPA के तहत प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया। यह कदम इस संगठन की बढ़ती गतिविधियों और देश की आंतरिक सुरक्षा को देखते हुए उठाया गया। इसके बावजूद, TRF पाकिस्तान के समर्थन और ISI की मदद से अपनी मौजूदगी बनाए रखने की कोशिश करता रहा है।

The Resistance Front Lashkar-e-Taiba: कश्मीर में आतंक की काली परछाईं

द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) पाकिस्तान की एक साजिश का हिस्सा है जो लश्कर, जैश और हिजबुल जैसे खूंखार आतंकी संगठनों का ही नया नाम है। भारत सरकार और सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता और सख्ती से TRF की साजिशों पर रोक लगाने की कोशिशें लगातार जारी है, लेकिन इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि आतंक अब नए चेहरे और नए नाम के साथ सामने आ रहा है।

TRF का स्वरूप अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी चिंता का विषय बना हुआ है। संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रत्यक्ष रूप से TRF को आतंकी संगठन घोषित नहीं किया गया है और आतंकी समूह नए नामों और स्थानीय प्रतिरोध को मुखौटे की तरह इस्तेमाल करके अंतरराष्ट्रीय दबाव से बच रहे हैं।

भले ही दहशत की दुनिया में TRF एक नया नाम हो सकता है लेकिन इसकी जड़ें पुराने और घातक आतंकी नेटवर्क में मौजूद हैं। इसका मकसद भारत में अस्थिरता फैलाना और कश्मीर घाटी में आतंक को एक "लोकल मूवमेंट" के रूप में पेश करना है। भारत की सुरक्षा एजेंसियाँ और खुफिया तंत्र इसके नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं, लेकिन इसकी सोशल मीडिया उपस्थिति और स्थानीय युवाओं को गुमराह करने की रणनीति चिंता का विषय बनी हुई है।

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