J&K हेलीकॉप्टर हादसा: 8 दिन बाद भी पायलटों का नहीं लगा पता, लगाई गईं स्पेशल टीमें
नई दिल्ली, 10 अगस्त। जम्मू-कश्मीर के कठुआ में रणजीत सागर डैम में 3 अगस्त को सेना के दुर्घटनाग्रस्त हेलीकॉप्टर का आठ दिन बाद भी पता नहीं चल पाया है। सेना ने मंगलवार को बताया है कि दुर्घटनाग्रस्त हेलीकॉप्टर को खोजने के लिए विशेषज्ञ दल, विशेष उपकरण और गोताखोर उतारे गए हैं। इसके साथ ही गहरे पानी में सर्च ऑपरेशन चलाने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहायता भी मांगी गई है।

सेना ने एक बयान में कहा है कि बारिश के मौसम में पानी में 50 मीटर से कम दिखाई दे रहा है जिसके चलते सर्च ऑपरेशन चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। सोनार और दूसरे सेंसर के भी काम करने पर असर पड़ रहा है। हालांकि सेना से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहायता लेने के बारे में अधिक कुछ नहीं बताया है।
3 अगस्त मंगलवार को कठुआ के रणजीत सागर बांध में सेना का हेलॉकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। हेलीकॉप्टर दुर्घटना के बाद से आर्मी एविएशन कोर के दो पायलट लापता हैं।
लगाई गईं अतिरिक्त टीमें
सेना ने जानकारी दी है कि खोज अभियान में तेजी लाने के लिए नौसेना की तीन अतिरिक्त डाइविंग टीमों को कोच्चि से बुलाया गया है और बांध के दुर्घटनास्थल पर काम में लगाया गया है। हेलीकॉप्टर के मलबे से ध्वनि तरंग परावर्तन के आधार पर 60 वर्गमीटर के क्षेत्र की पहचान की गई है। हालांकि, मलबे की गहराई का अभी पता नहीं चल पाया है।
सेना के प्रवक्ता ने कहा भारतीय सेना के दो अधिकारियों, चार जेसीओ और 24 अन्य रैंकों की टीम भारतीय नौसेना के गोताखोरों की टीम के साथ समन्वय कर रही है। चंडीगढ़, दिल्ली, मुंबई और कोच्चि से लाए गए मल्टी-बीम सोनार, साइड स्कैनर, दूर से चलने वाले वाहन और अंडरवाटर मैनिपुलेटर्स को दुर्घटनास्थल पर पहले ही कार्रवाई में लगा दिया गया है।
रणजीत सागर बांध 25 किमी लंबा और 8 किमी चौड़ा है। इसकी गहराई 500 मीटर है। सेना ने कहा कि खराब मौसम और बारिश के बावजूद तलाशी अभियान जारी है। देश भर से सेना, नौसेना, भारतीय वायुसेना, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, गैर सरकारी संगठनों, राज्य पुलिस, बांध प्राधिकरण और निजी फर्मों के विशेषज्ञ और उपकरण कार्रवाई में हैं।












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