Love Story: 7 साल छोटे व्यक्ति से इश्क कर बैठी थीं महबूबा, जानिए कौन था 'महबूब'?
Mehbooba Mufti Love Story Hindi: जम्मू कश्मीर में इस वक्त सियासी पारा चरम पर है, यहां दस साल बाद चुनाव हो रहे हैं। जोर-शोर से यहां पर नेताओं की रैलियां हुईं, जिसमें एक-दूसरे पर जमकर आरोप लगाए गए।
एक चुनावी रैली में जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस नेता उमर अब्दुल्ला ने पूर्व सीएम और पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती पर जमकर निशाना साधा और उन्हें भाजपा की B-टीम बता दिया।

हालांकि जब भाजपा के खिलाफ मोर्चा खोलना होता है तब उमर अब्दुल्ला और महबूबा एक हो जाते हैं। फिलहाल इन्हीं चुनावी सरगर्मी के बीच हम आपको बताते हैं कि महबूबा मुफ्ती के जीवन की कुछ निजी बातें, जिनके बारे में ज्यादा किसी को पता नहीं है।
महबूबा की शुरुआत में राजनीति में कोई भी दिलचस्पी नहीं थी
कश्मीर की वादियों में विरोधियों के सामने एक चट्टान की तरह खड़ी रहने वाली महबूबा मुफ्ती को शुरुआत में राजनीति में कोई भी दिलचस्पी नहीं थी।हालांकि उनकी परवरिश एक सियासी खानदान में हुई।
वीपी सिंह की सरकार में होम मिनिस्टर थे सईद
उनके पिता स्व. मुफ्ती मोहम्मद सईद तो वीपी सिंह की सरकार में होम मिनिस्टर थे। 22 मई 1959 को नोपाड़ा में जन्मीं महबूबा ने यूनिवर्सिटी ऑफ कश्मीर से लॉ किया है और वो एक वकील के तौर पर करियर में आगे बढ़ना चाहती थीं लेकिन किस्मत में उनका अपने पिता के नक्शेकदम में चलना लिखा था।
महबूबा की शादी 1984 में जावेद इकबाल शाह हुई
आजाद ख्याल की मल्लिका महबूबा की शादी 1984 में जावेद इकबाल शाह हुई थी, जो कि रिश्ते में उनके चाचा लगते थे और उनसे उम्र में सात साल छोटे थे। आपको बता दें कि वो मुफ्ती मोहम्मद के फर्स्ट कजिन थे। महबूबा उस वक्त लॉ की छात्रा थीं और शाह ने भी उसी वक्त विवि ज्वाइन किया था। यूनिवर्सिटी में ही दोनों की मोहब्बत परवान चढ़ी थी।
प्यार के खातिर ना तो उम्र की परवाह की और ना ही रिश्ते की
दोनों ने प्यार के खातिर ना तो उम्र की परवाह की और ना ही रिश्ते की। इन दोनों ने अपने घर में शादी की बात बताई तो हंगामा मच गया। कहते हैं कि मुफ्ती मोहम्मद सईद नहीं चाहते थे कि ये शादी हो लेकिन बेटी की जिद के आगे उनकी एक ना चली और फिर दोनों का निकाह हुआ।
महबूबा ने मुझे प्रपोज किया था: जावेद इकबाल
कुछ साल पहले कोलकाता के अंग्रेजी दैनिक द टेलिग्राफ को दिए गए इंटरव्यू में जावेद इकबाल ने कहा था कि 'महबूबा ने उन्हें प्रपोज किया था', शादी के बाद दोनों लोग दिल्ली में रहने लगे लेकिन परियों की प्रेम कहानी की तरह शुरू हुई इस लवस्टोरी से मोहब्बत के रंग जल्दी ही गायब हो गए और उसकी जगह तनाव और कलह ने ले ली।

मुफ्ती के कहने से महबूबा सियासत में दिलचस्पी लेने लगी थीं
कहते हैं कि पापा मुफ्ती के कहने से महबूबा सियासत में दिलचस्पी लेने लगी थीं क्योंकि मुफ्ती के बेटे को राजनीति में दिलचस्पी नहीं थी। ऐसे में सईद अपने उत्तराधिकारी के तौर पर महबूबा को आगे बढ़ाना चाहते थे, यही बात जावेद इकबाल को पसंद नहीं थी और इस कारण दोनों में झगड़े होने लगे।
साल 1989 में छोटी बहन रुबैया सईद का अपहरण हुआ
लेकिन साल 1989 में कुछ ऐसा हुआ जिसने महबूबा की पूरी लाइफ को बदल दिया। इसी साल उनकी छोटी बहन रुबैया सईद का अपहरण कर लिया गया था। इस घटना ने ना केवल देश की राजनीति में भूचाल लाया बल्कि सईद परिवार में भी हलचल पैदा कर दी थी।
कठिन परिस्थिति में परिवार के लिए ढ़ाल बनी थी 'महबूबा'
आपको बता दें कि ये घटना तब हुई जब मुफ्ती मोहम्मद सईद को वीपी सिंह सरकार में गृहमंत्री बने मुश्किल से पांच दिन हुए थे। इस कठिन परिस्थिति में परिवार के लिए ढ़ाल बनी थी 'महबूबा'। इसके बाद हर रैली और पार्टी मीटिंग में वो अपने पिता के साथ दिखने लगीं और लोगों के बीच काफी चर्चित हो गईं।
महबूबा ने सांसद अपना पहला चुनाव 2004 में जीता था
साल 1996 के चुनाव के ठीक पहले उन्होंने राजनीति में कदम रखा। महबूबा ने पिता के साथ मिलकर पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी बनाई, 2002 के विधानसभा चुनाव में महबूबा ने जमकर कैम्पेन चलाया और पीडीपी को 16 सीटें दिलाईं। महबूबा ने बतौर सांसद अपना पहला चुनाव 2004 में जीता था। जैसे-जैसे महबूबा सियासी सीढ़ियां चढ़ रही थीं, वैसे-वैसे उनके परिवार में कलह बढ़ रहा था।

शादी से दो बेटियां इर्तिका और इल्तिजा हैं
इस शादी से उन्हें दो बेटियां इर्तिका और इल्तिजा हैं लेकिन तनाव बढ़ने पर महबूबा ने जावेद को तलाक दे दिया और अपने पिता के पास वापस लौट आईं। उनके साथ ही उनकी दोनों बेटियां रहती हैं और इस बार के चुनाव में उनकी बेटी इल्तिजा भी मैदान में उतरी हैं।
बीजबेहाड़ा विधानसभा क्षेत्र लड़ा चुनाव
वो काफी पढ़ी लिखी हैं और यूके कि विवि से स्नातक किया है। अपने चुनावी हलफनामे में उन्होंने खुद को लेखक बताया है। उन्होंने इस बार बीजबेहाड़ा विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा है। आपको बता दें कि यह वही सीट है जहां से 1996 में महबूबा मुफ्ती ने पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ा था।
बड़ी बेटी इर्तिका लंदन में सीनियर एडमिनिस्ट्रेटिव अफसर हैं
जबकि महबूबा की बड़ी बेटी इर्तिका लंदन में सीनियर एडमिनिस्ट्रेटिव अफसर हैं। दोनों बेटियां अपनी मां को अपना रोल मॉडल मानती हैं। अपने पिता के प्रति इनका भी रूख ठंडा ही है।
'सियासत के पथ पर आगे बढ़ने पर रिश्ता टूटेगा ही...'
कुछ वक्त पहले जावेद इकबाल शाह ने 'द टेलीग्राफ' को दिए इंटरव्यू में कहा था कि 'जिस वक्त वो महबूबा से मिले थे, उस वक्त उनकी उम्र कम थी, वो रिश्ते की गहराई को समझ नहीं पाए थे और उन्हें पता था कि सियासत के पथ पर आगे बढ़ने पर रिश्ता टूटेगा ही और वो टूट गया। 'जावेद इकबाल शाह खुदी पीडीपी के बहुत बड़े आलोचक हैं और घाटी की दुर्दशा के लिए वो उसे जिम्मेदार ठहराते हैं।












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