J&K: जम्मू और कश्मीर विधानसभा चुनाव में कैसे महबूबा मुफ्ती और उमर अब्दुल्ला का बदल रहा स्टैंड?

Jammu aur Kashmir Vidansabha Chunav: जम्मू और कश्मीर के लिए चुनाव तारीखों के एलान के साथ ही वहां की मुख्य क्षेत्रीय पार्टियों, खासकर पीडीपी और नेशनल कांफ्रेंस के नेताओं के सुर बदले-बदले नजर आ रहे हैं। लगता है कि महबूबा मुफ्ती और उमर अब्दुल्ला दोनों राज्य का दर्जा वापसी के मामले को लेकर अपना पुराना स्टैंड बदल रहे हैं।

जम्मू और कश्मीर में संभावनाओं के विपरीत चुनाव आयोग ने मात्र तीन चरणों में ही मतदान की घोषणा की है। लेकिन, इस एलान के बाद से राज्य की प्रमुख क्षेत्रीय दलों महबूबा मुफ्ती की पीडीपी और फारूक और उमर अब्दुल्ला की नेशनल कांफ्रेंस के शीर्ष नेताओं के रवैए में बदलाव नजर आ रहा है।

mehbooba mufti omar abdullah

राज्य का दर्जा मिलने वाले स्टैंड से पीछे हट रहे उमर और महबूबा!
दरअसल, हाल तक महबूबा मुफ्ती और उमर अब्दुल्ला की ओर से यही कहा जा रहा था कि जब तक जम्मू-कश्मीर को वापस से राज्य का दर्जा नहीं मिल जाता, वे विधानसभा चुनावों का हिस्सा नहीं बनेंगे।

2019 में मोदी सरकार ने जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल-370 को खत्म करके इसे एक केंद्र शासित प्रदेश बना दिया था। तब से इसे राज्य का दर्जा वापस देने की मांग हो रही है और केंद्र सरकार ने समय आने पर इसे बहाल करने का भरोसा भी दे रखा है।

तीन चरणों में होगा जम्मू और कश्मीर विधानसभा का चुनाव
चुनाव आयोग ने शुक्रवार को जम्मू और कश्मीर में तीन चरणों- 18 सितंबर, 25 सितंबर और 1 अक्टूबर को मतदान कराने की घोषणा की है। वोटों की गिनती हरियाणा विधानसभा चुनावों के साथ ही 4 अक्टूबर को होगी। हरियाणा में एक ही चरण में 1 अक्टूबर को चुनाव होगा।

महबूबा मुफ्ती भी चुनाव मैदान में उतर सकती हैं
दरअसल, पीडीपी के अंदर के लोगों ने संकेत दिए हैं कि महबूबा मुफ्ती भी चुनावों से दूर रहने वाले अपने पुराने स्टैंड पर कायम नहीं रह पाएंगी, क्योंकि उनकी पार्टी के कार्यकर्ता उनसे चुनाव मैदान में उतरने का दबाव बना रहे हैं। वहीं नेशनल कांफ्रेंस के सुप्रीमो फारूक अब्दुला ने पार्टी कार्यकर्ताओं से कहा है कि जमीनी आधार मजबूत करने पर जोर देना शुरू कर दें।

आइए! हम तैयार हैं- उमर अब्दुल्ला
वहीं, शनिवार को उमर अब्दुला ने मतदान के बाद सियाही वाली अपनी उंगली की तस्वीर एक्स पर लगाते हुए पोस्ट किया, 'हाल के चुनावों की स्याही का निशान अभी भी मिटा नहीं है और हम फिर से चुनावी मोड में आ गए हैं। आइए! हम तैयार हैं!'

हालांकि, फारूक चुनाव तैयारियों को लेकर सक्रिय हैं, लेकिन उमर अब्दुला उन्हीं की सेहत का हवाला देकर दावा कर रहे हैं कि उनकी वजह से उन्हें चुनाव मैदान में उतरने पर विचार करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा है, 'अगर विधानसभा चुनाव नहीं लड़ने की सोचता हूं तो चिंता है कि उनको (फारूक अब्दुल्ला) चुनाव लड़ना पड़ सकता है।' उनके मुताबिक पार्टी कार्यकर्ताओं के दबाव को वह टाल नहीं सकेंगे।

कश्मीर की सबसे बड़ी क्षेत्रीय पार्टियां हैं पीडीपी और नेशनल कांफ्रेंस
जम्मू और कश्मीर में कांग्रेस और बीजेपी के अलावा 40 से ज्यादा राजनीतिक दल किसी न किसी रूप में सक्रिय हैं और सबका अपना कुछ न कुछ जनाधार है। इनमें से पीडीपी और नेशनल कांफ्रेंस सबसे बड़ी क्षेत्रीय पार्टियां हैं।

इस साल लोकसभा चुनाव में उमर अब्दुल्ला खुद तो चुनाव हार गए थे, लेकिन उनकी पार्टी को दो सीटें मिली थीं। जबकि, इस केंद्र शासित प्रदेश की 5 सीटों में से जम्मू डिविजन की दोनों सीटों पर भाजपा ने अपना कब्जा बरकरार रखा है। एक सीट निर्दलीय इंजीनियर राशिद को मिली है, जिन्होंने उमर अब्दुल्ला को हराया है। महबूबा मुफ्ती को भी एक बार फिर से कश्मीर की जनता ने ठुकरा दिया है।

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