J&K: सिर्फ एक साल में 66,000 करोड़ रुपए के निजी निवेश का प्रस्ताव, 1,455 यूनिट में काम शुरू
जम्मू-कश्मीर में औद्योगिक बदलाव और आर्थिक गतिविधि का विकास नजर आने लगा है। निजी निवेशक इस केंद्र शासित प्रदेश में निवेश के लिए दिल खोलने लगे हैं।

जम्मू-कश्मीर में बदलाव अब धरातल पर महसूस हो रहा है। कम से कम केंद्र शासित प्रदेश की सरकार जो आंकड़े दे रही है, उससे तो ऐसा ही लगता है। वैसे इस बात में कोई भी दो राय नहीं हो सकती कि पिछले तीन-चार वर्षों में प्रदेश की स्थिति बदली है और पहले से कहीं ज्यादा बेहतर हुई है। केंद्र शासित प्रशासन इस यूटी को देश के प्रमुख बिजनेस और इंडस्ट्रियल हब के रूप में विकसित करने की कोशिशों में जुटा नजर आ रहा है। जो आंकड़े सामने रखे जा रहे हैं, उससे इन बातों में काफी दम भी नजर आ रहा है।

एक साल में 66,000 करोड़ रुपए के निजी निवेश का प्रस्ताव
जम्मू-कश्मीर के इतिहास में पहली बार औद्योगिक क्रांति नजर आ रही है। सिर्फ एक साल के अंदर इस केंद्र शासित प्रदेश में 66,000 करोड़ रुपए के प्राइवेट निवेश का प्रस्ताव प्राप्त हुआ है। लेकिन, सिर्फ प्रस्ताव तक ही मामला सीमित नहीं है। 1,455 औद्योगिक यूनिट में काम शुरू भी हो चुका है। यह सब इस तरह के इकोसिस्टम में हो रहा है, जिसमें राज्य का भविष्य तो उज्ज्वल नजर आ ही रहा है, लोगों को जीविकोपार्जन का भी बेहतर अवसर मिल रहा है, शिक्षा की भी अच्छी व्यवस्था मिल रही है और कौशल विकास के साथ ही बेहतर गुणवत्ता वाला जीवन भी हासिल होने लगा है।

केंद्र सरकार ने 28,400 करोड़ रुपए का परिव्य मंजूर किया
जम्मू-कश्मीर प्रशासन की ओर जारी आधिकारिक बयान के मुताबिक केंद्र सरकार ने न्यू इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट स्कीम के तहत 28,400 करोड़ रुपए का परिव्य मंजूर किया है। यह यूटी के अंदर मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर में निवेश को प्रोत्साहन देने के इरादे से किया गया है। इसकी वजह से राज्य के आर्थिक विकास में सहायता मिलनी शुरू भी हो गई है। रोजगार सृजन से लेकर उद्यमशीलता बढ़ाने तक सरकार जम्मू-कश्मीर को एक मॉडल ऑफ इंडस्ट्री बनाने जा रही है, जो कि चौथी औद्योगिक क्रांति है।

'औद्योगिक परिवर्तन का बहुमुखी प्रभाव महसूस किया जाएगा'
सरकारी बयान में कहा गया है कि 'सरकार लगातार संस्थागत तैयारी को बढ़ावा देने के लिए काम कर रही है, ताकि उद्यमशीलता को बढ़ावा मिले और निवेश को आकर्षित किया जा सके। पूरे केंद्र शासित प्रदेश में इस औद्योगिक परिवर्तन का बहुमुखी प्रभाव महसूस किया जाएगा।' जम्मू-कश्मीर के लोग अब वही अधिकार और लाभों को लाभ उठा सकते हैं, जो पूरे भारत के लोग उठाते रहे हैं। न कि उन्हें कुछ ही अधिकारों और फायदों तक सीमित रहना है। इसके मुताबिक, 'जम्मू-कश्मीर पुनर्निमाण, पुनर्रचना और देश के तेजी से विकसित होने वाले क्षेत्र बनने के मिशन पर है, जिसका लक्ष्य आर्थिक विकास और रोजगार को बढ़ावा देना है।'

देश का नया बिजनेस हब बनेगा जम्मू-कश्मीर!
जम्मू-कश्मीर प्रशासन का लक्ष्य अब बिजनेस कंगलोमेरट के विश्वास को बढ़ाना है, उद्योग के लिए आधार तैयार करना है और सामाजिक-आर्थिक स्थायित्व को मजबूत करना है। राज्य में बिजनेस के लिए बेहतरीन इंसेंटिव दिया जा रहा है और विकसित बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे देश में नया कारोबार शुरू करने के लिए यह एक बेहतरीन डेस्टिनेशन के रूप में उभर रहा है। बिजनेस के माहौल के लिए जो भी आवश्यकता है, चाहे जमीन आवंटन में पारदर्शिता की नीति हो या प्राइवेट इंस्ट्रियल एस्टेट डेवलपमेंट या फिर ईज ऑफ डुइंग बिजनेस सरकार ज्यादा सक्रिय होकर कार्य कर रही है।
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'जम्मू-कश्मीर में डोमेस्टिक मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है'
यहां यह बताना जरूरी है कि औद्योगिक योजना के तहत जम्मू-कश्मीर में डोमेस्टिक मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे इस केंद्र शासित प्रदेश को आत्मनिर्भर बनने में मदद मिल सके। इस योजना से नए निवेश को प्रोत्साहन मिल रहा है, जिससे यहां उद्योगों का विस्तार भी हो रहा है और जो पहले से हैं, उन्हें और भी फलने-फूलने का अवसर मिल रहा है। सरकार की कोशिश है कि जो भी जम्मू-कश्मीर में निवेश करना चाहती है, उन्हें किसी भी स्थिति में बेवजह की परेशानियां ना उठानी पड़े। (इनपुट-एएनआई)












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