कांग्रेस-एनसी के बीच सबकुछ ठीक नहीं, राहुल गांधी को लेकर उमर अब्दुल्ला ने खुलकर कह दी ये बात
जम्मू कश्मीर में आज दूसरे चरण का मतदान हो रहा है। यहां कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस साथ मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं, लेकिन ऐसा लगता है कि यहां दोनों के बीच सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। एनसी के उपाध्यक्ष और गांदेरबाल व बडगाम से पार्टी के उम्मीदवार उमर अब्दुल्ला ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को सलाह दी है कि वह कश्मीर के बजाए जम्मू में अपनी पार्टी के चुनाव प्रचार पर ध्यान दें।
गौर करने वाली बात है कि जम्मू कश्मीर में एनसी 51 और कांग्रेस 32 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। दोनों दलों के बीच तकरीबन एक महीने तक चर्चा के बाद गठबंधन का ऐलान किया गया था।

उमर अब्दुल्ला ने कहा कि कश्मीर में कांग्रेस पार्टी की भूमिका बिल्कुल नगण्य है, लेकिन जम्मू में वो काफी अहम हो सकते हैं। लेकिन बावजूद इसके कांग्रेस पार्टी ने यहां बहुत ही कम ध्यान दिया है। कांग्रेस यहां गठबंधन की उम्मीदों पर खरा नहीं उतरी है।
उम्मीद है जम्मू पर ध्यान देंगे राहुल
उमर ने कहा कि मुझे उम्मीद है कि कश्मीर में प्रचार के बाद राहुल जम्मू पर भी ध्यान देंगे। कश्मीर में कांग्रेस क्या करती है यह मायने नहीं रखता है, कांग्रेस जम्मू में क्या करती है वह अहम है।
दुर्भाग्य से कांग्रेस ने जम्मू में कुछ खास नहीं किया, जैसा कि हमें उम्मीद थी। जम्मू में अधिकतर सीटें कांग्रेस को दी गई हैं, बावजूद इसके यहां कांग्रेस का अभियान शुरू नहीं हुआ है। यहां सिर्फ पांच दिन ही प्रचार के लिए बचे हैं।
विदेशी पर्यवेक्षकों पर विवाद
जम्मू-कश्मीर चुनावों में अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों की मौजूदगी ने विवाद को जन्म दिया है। अब्दुल्ला ने चुनावों की निगरानी के लिए विदेशी प्रतिनिधियों को आमंत्रित करने के भारत सरकार के फैसले की आलोचना की और इसे आंतरिक मामलों पर भारत के रुख के साथ असंगत बताया।
उन्होंने कहा, "मुझे नहीं पता कि विदेशियों को यहां चुनावों की जांच करने के लिए क्यों कहा जाना चाहिए। जब विदेशी सरकारें टिप्पणी करती हैं, तो भारत सरकार कहती है कि 'यह भारत का आंतरिक मामला है' और अब अचानक वे चाहते हैं कि विदेशी पर्यवेक्षक आएं और हमारे चुनावों को देखें।"
तीन चरण में मतदान
जम्मू-कश्मीर में 18 सितंबर से शुरू हुए विधानसभा चुनाव तीन चरणों में हो रहे हैं। दूसरे चरण के समापन के बाद, अंतिम चरण 1 अक्टूबर को होना है, जबकि मतगणना 8 अक्टूबर को होगी। ये चुनाव न केवल राजनीतिक दलों के लिए बल्कि जम्मू-कश्मीर के लिहाज से भी काफी अहम हैं। यहां कई वर्षों से कोई स्थायी सरकार नहीं है।












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