राशिद इंजीनियर की जमानत अर्जी पर सुनवाई पूरी, पटियाला हाउस कोर्ट 4 सितंबर को सुनाएगा फैसला

पिछले हफ़्ते दिल्ली की पटियाला कोर्ट ने जेल में बंद कश्मीरी सांसद राशिद इंजीनियर की ज़मानत याचिका पर राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) से जवाब माँगा था। दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने राशिद इंजीनियर की जमानत याचिका पर बंद कमरे में सुनवाई के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।

कोर्ट द्वारा 4 सितंबर को अपना फैसला सुनाए जाने की उम्मीद है।अगर उन्हें जमानत मिल जाती है तो इससे जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनावों पर काफी असर पड़ सकता है। राशिद की पार्टी अवामी इत्तेहाद पार्टी (एआईपी) ने राज्य की सभी 90 सीटों पर चुनाव लड़ने की योजना की घोषणा की है।

रशीद इंजीनियर की गिरफ्तारी और राजनीतिक जीत

शेख अब्दुल रशीद, जिन्हें आम तौर पर इंजीनियर रशीद के नाम से जाना जाता है, को 2017 के जम्मू-कश्मीर आतंकी फंडिंग मामले में हिरासत में लिया गया था। जेल में रहते हुए उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनावों के दौरान बारामुल्ला सीट पर जीत हासिल की। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ़्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला को हराया था।

रशीद इंजीनियर की जमानत याचिका पर अदालत के फैसले का बेसब्री से इंतजार किया जा रहा है। राशिद इंजीनियर की लीगल टीम को उम्मीद है कि अदालत उन्हें जमानत दे देगी। उन्हें अपने संसदीय कर्तव्यों को जारी रखने की अनुमति मिल जाएगी।

सभी की निगाहें 4 सितंबर को आने वाले इस हाई-प्रोफाइल मामले में दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट के फैसले पर टिकी हुई हैं। इंजीनियर रशीद के समर्थकों का तर्क है कि उनकी निरंतर नजरबंदी राजनीति से प्रेरित है, जबकि विरोधियों का मानना ​​है कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आवश्यक है।

रशीद इंजीनियर का राजनीतिक सफर

राशिद इंजीनियर, जिनका असली नाम शेख राशिद है, 2019 से जेल में हैं। वे बारामुल्ला से निर्दलीय सांसद हैं और उन्होंने 2024 के चुनाव में पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला को हराया था। राशिद उत्तरी कश्मीर की राजनीति में एक प्रमुख व्यक्ति हैं और केंद्र शासित प्रदेश के पूर्व विधायक हैं। वे पिछले पांच सालों से यूएपीए के तहत दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद हैं।

हंदवाड़ा के लाच मवार में जन्मे राशिद ने श्रीनगर में सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और करीब 25 साल तक इंजीनियर के तौर पर काम किया। 2003 के आसपास उन्होंने उर्दू साप्ताहिक अख़बार चट्टान के लिए राजनीतिक मुद्दों पर लिखना शुरू किया, जिससे वे चर्चा में आए। वे अपने परिवार से राजनीति में आने वाले पहले व्यक्ति हैं और उन्होंने हमेशा जम्मू-कश्मीर समस्या के शांतिपूर्ण समाधान की वकालत की है।

अवामी इत्तेहाद पार्टी की महत्वाकांक्षाएं

एआईपी के महासचिव प्रिंस परवेज ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोगों के पास एआईपी के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है। पार्टी का लक्ष्य आगामी विधानसभा चुनावों में सभी 90 सीटों पर उम्मीदवार उतारना है। इस घोषणा से क्षेत्र में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं।

राशिद जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के खिलाफ थे। उन्होंने इसके खिलाफ कई बार प्रदर्शन और धरने किए। 2008 में उन्होंने कुपवाड़ा के लंगेट से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। ​​2013 में उन्होंने AIP का गठन किया और 2014 के विधानसभा चुनाव में फिर से विधायक बने लेकिन 2014 के लोकसभा चुनाव में हार गए।

कानूनी परेशानियाँ और कारावास

एनआईए ने 2019 में गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत आतंकी फंडिंग से जुड़े आरोपों में राशिद इंजीनियर को गिरफ्तार किया था। उसका नाम कश्मीरी व्यवसायी जहूर वटाली से जुड़ी जांच के दौरान सामने आया था, जिस पर आतंकवादी समूहों और अलगाववादियों को फंडिंग करने का आरोप था। तब से राशिद तिहाड़ जेल में बंद है।

विधायक होने के बावजूद राशिद अक्सर अपनी छोटी कार में बिना सुरक्षा के यात्रा करते थे। 2015 में उन्हें जम्मू-कश्मीर विधानसभा के अंदर और दिल्ली प्रेस क्लब में हमलों का सामना करना पड़ा, जहां उन पर स्याही फेंकी गई थी।

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