आलाकमान से बगावत पर UDH मंत्री धारीवाल बोले-'एक लाइन का प्रस्ताव पास कराने आए थे खड़गे व माकन'
जयपुर, 26 सितम्बर। राजस्थान में सियासी घटनाक्रम तेजी से बदल रहा है। अशोक गहलोत के कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने से पहले ही उनके सीएम पद को लेकर घमासान मचा हुआ है। गहलोत गुट किसी भी सूरत में सचिन पायलट का अगला सीएम नहीं बनने देने के मूड में है। शायद यही वजह है कि अशोक गहलोत गुट के विधायकों ने कांग्रेस आलाकमान तक से बगावत कर डाली। रविवार शाम को बगावत का झंडा यूडीएच व संसदीय कार्यमंत्री शांति धारीवाल ने उठाया, जिस पर अब खुद धारीवाल ने अपनी सफाई भी दी है।

कांग्रेस के पास 108 विधायकों का समर्थन
हुआ यूं कि 200 विधायकों वाली राजस्थान विधानसभा में कांग्रेस के पास 108 विधायकों का समर्थन है। अशोक गहलोत की जगह अगला सीएम बनाने को लेकर विधायकों की रायशुमारी के लिए कांग्रेस आलाकमान ने रविवार को दिल्ली से केंद्रीय ऑब्जर्वर मल्लिकार्जुन खड़गे और अजय माकन को जयपुर भेजा। इन दोनों से मिलने से पहले ही गहलोत गुट के विधायकों ने बगावती तेवर दिखाए और सामूहिक इस्तीफे का खेल चला।

80 से ज्यादा विधायकों ने इस्तीफा सौंप दिया
केंद्रीय ऑब्जर्वर खड़गे और माकन जयपुर में कांग्रेस विधायकों के साथ शाम सात बजे बैठक करने वाले थे, मगर विधायक दल की बैठक से पहले ही यूडीएच व संसदीय कार्यमंत्री शांति धारीवाल के घर विधायकों की बैठक हुई और यहां से 80 से ज्यादा विधायकों ने एक साथ विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी के घर जाकर इस्तीफा सौंप दिया। विधायक सचिन पायलट को सीएम बनाए जाने की कोशिशें के खिलाफ थे।

अजय माकन ने नाराजगी जताई
अशोक गहलोत गुट के विधायकों के इस कदम पर केंद्रीय पर्यवेक्षक अजय माकन ने नाराजगी जताई और शांति धारीवाल के घर विधायकों की बैठक को अनुशासनहीनता माना। माकन के अनुशासनहीनता के बयान पर शांति धारीवाल ने भी मीडिया से बातचीत में पलटवार किया और कहा कि माकन का विचार कुछ और ही है। वे विधायकों से बात करना ही नहीं चाहते थे। वे तो सीएम का फैसला हाईकमान पर छोड़ने का एक लाइन का प्रस्ताव पास कराने आए थे। सारे विधायक यह मान रहे थे कि अगर माकन और खड़गे के साथ मीटिंग की तो उन लोगों को पुरस्कृत किया जाएगा जिन लोगों ने कांग्रेस की पीठ में छुरा घोंपा था। यह किसी भी विधायक को मंजूर नहीं था। इसलिए यह सबकुछ हुआ।

50 साल की राजनीति में कभी पार्टी के अनुशासन को नहीं तोड़ा
मीडिया से बातचीत में शांति धारीवाल ने यह भ कहा कि उन्होंने अपनी 50 साल की राजनीति में कभी पार्टी के अनुशासन को नहीं तोड़ा। हमेशा हाईकमान का फैसला मानते आए हैं। मेरे संसदीय कार्यमंत्री होने के नाते सारे विधायक अपनी बात कहने के लिए उनके घर आ गए। उन्होंने किसी को फोन करके नहीं बुलाया। जो भी विधायक आए वे अपने आप आए थे।

इसलिए सीपी जोशी के यहां इस्तीफा देने चले गए
धारीवाल का कहना है कि उनके घर मीटिंग में विधायकों ने यह तय किया था कि अगर उनकी बात नहीं सुनी गई तो वे इस्तीफा देंगे। जिन लोगों ने सरकार को गिराने की कोशिश की। हाईकमान उन्हें ही सीएम बनाने के प्रयास कर रहा था। यह किसी भी विधायक को मंजूर नहीं था। इसलिए सीपी जोशी के यहां इस्तीफा देने चले गए।












Click it and Unblock the Notifications