अजमेर में इस बार सचिन पायलट या फिर सानवार लाल जाट
अजमेर। सूफी संत ख्वाजा मोइनउद्दीन चिश्ती की पवित्र दरगाह का घर अजमेर इस बार के लोकसभा चुनावों में राज्य कांग्रेस के प्रमुख और केंद्रिय मंत्री सचिन पायलट और यहां के प्रमुख जाट नेता और मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया के कैबिनेट में मंत्री सानवार लाल जाट के बीच होने वाली लड़ाई से मुखातिब होगा। 2014 के लोकसभा चुनावों में इस बार यहां की संसदीय सीट से कोई और प्रमुख नेता चुनाव मैदान में नहीं है। जाति आधारित समीकरणों के अलावा इस बार के चुनावों में दोनों उम्मीदवारों की पिछला प्रदर्शन और जनता के साथ उनका सीधा संवाद भी खासा असर डाल सकता है।
पढ़ें-2014 के शीर्ष उम्मीदवार
पिछले कुछ लोकसभा चुनावों से अजमेर बीजेपी के एक अहम गढ़ के तौर पर सामने आया है लेकिन साल 2009 में हुए लोकसभा चुनावों में सचिन पायलट यहां से एक बड़े विजेता साबित हुए थे। कांग्रेस पार्टी के लिए उन्होंने अजमेर की सीट को 76,000 से भी ज्यादा वोटों से जीता था। हालांकि यह बात भी गौर करने वाली है कि कांग्रेस पार्टी ने आठ विधानसभा चुनावों से अजमेर में शिकस्त का सामना करती आ रही है। अजमेर में रावत और जाट वोटर्स बीजेपी की जीत को पक्का करते आ रहे हैं।
वहीं पिछले लोकसभा चुनावों के दौरान यहां दो संसदीय क्षेत्र हो गए जिनमें बेवाड़ के रावत बेल्ट के आशिंक प्रभुत्व वाले क्षेत्र को राजसामंद लोकसभा क्षेत्र में विलय कर दिया गया और जयपुर के दुधु विधानसभा क्षेत्र को अजमेर में शामिल किया गया। विशेषज्ञों की मानें तो इस नए समीकरण से पिछले लोकसभा चुनावों में पायलट को अजमेर में खासा फायदा हुआ था। अजमेर लोकसभा क्षेत्र में 16 लाख से ज्यादा वोटर्स है।
इनमें से 3.85 लाख एससी एसटी वोटर्स, 2.10 लाख जाट वोटर्स, 2 लाख गुर्जर, 1.50 लाख रावत और करीब 2.60 लाख मुसलमान वोटर्स, एक लाचा राजपूत, 1.45 लाख वैश और बाकी समुदायों के मिले-जुले वोटर्स शामिल हैं। बीजेपी को उम्मीद है कि उसे जाट, वैश, रावत और ब्राहमणों के वोट हासिल हो सकते हैं तो कांग्रेस मुसलमान, गुर्जर और एससी एसटी वोटों से उम्मीद लगा रही है।
विशेषज्ञों की नजर में जिले के दुधु, किशनगढ़, केकरी और पाईसानगन क्षेत्रों में पायलट का पलड़ा भारी है जबकि सानवर जाट का यहां के भिनाई, नासिराबाद और मासुदा क्षेत्रों में दबदबा कायम है। पायलट को साल 2009 के चुनावों में केकरी, दुधु, नासीराबाद और पुष्कर इलाकों में फायदा मिला था। हालांकि सानवार जाट का मानना है कि वह इस बार गरीब किसानों की समस्याओं को दूर करने और आम जनता के लिए हर पल मुहैया रहने के मकसद से लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं।
यहां की एक मतदाता मुन्नी देवी कहती हैं कि सानवार जाट तक पहुंचना और उनके सामने अपनी समस्याओं को रखना काफी आसान है लेकिन पायलट से बात करना भी काफी मुश्किल है। वहीं अजमेर के ही एक और वोटर का मानना है कि पायलट काफी साफ छवि वाले नेता है और वह यहां के लोगों के साथ बराबर संपर्क बनाकर रखते हैं।
मतदाताओं की अलग-अलग राय देखकर यह कहना कि पायलट और जाट में से कौन इस बार के लोकसभा चुनावों का विजेता बनेगा काफी मुश्किल है लेकिन अजमेर की लड़ाई इस बार काफी मुश्किल होगी और सबकी नजरें इस पर लगी हुई हैं।
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