सुषमा स्वराज के निधन पर पाक का यह परिवार भी हुआ दुखी, बेटी बोली-'सुषमा जी को रोजाना करती हूं याद'
जयपुर। भाजपा की कद्दावर नेता व पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की बुधवार शाम चार बजे दिल्ली में राजकीय सम्मान से अंत्येष्टि कर दी गई। 6 अगस्त 2019 को दिल्ली एम्स में सुषमा स्वराज का 67 साल की उम्र में निधन हो गया था। सोशल मीडिया जरिए भी लोगों की मदद करने को हर वक्त तैयार रहने वालीं सुषमा स्वराज के भारतीय ही नहीं बल्कि पाकिस्तानी भी मुरीद हैं।

इन्हीं में एक है पाकिस्तान की मशल माहेश्वरी, जो इन दिनों राजस्थान के जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल से एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही है। मशल का कहना है कि आज भी वह मेडिकल की पढ़ाई करती है तब एक बार जरुर दिलों जेहन में सुषमा स्वराज जी का चेहरा नजर आता है। मशल उन्हें रोजाना याद करती है। इसकी वजह यह बताती है कि डॉक्टर बनने के मशल के सपनों को पूरा करने वाली सिर्फ और सिर्फ सुषमा स्वराज जी थीं। उनके निधन से मशल और उसका परिवार बेहद आहत है।

परिवार 2014 में धार्मिक वीजा लेकर जयपुर आ गया
मशल माहेश्वरी की कहानी छह साल पहले उस समय शुरू हुई जब उसने पिता की राह पर चलते डॉक्टर बनने की ठानी। माता पिता पेशे से पाकिस्तान के हैदराबाद में निजी हॉस्पिटल में डॉक्टर थे। पाकिस्तान में पढ़ाई करना संभव नहीं होने पर वह और उसका परिवार वर्ष 2014 में धार्मिक वीजा लेकर जयपुर आ गया था।

मशल के ख्वाब में आड़े आ गई नागरिकता
जयपुर में मशल माहेश्वरी ने निजी स्कूल में बॉयोलोजी विषय में एडमिशन लेकर 12 वीं कक्षा की पढ़ाई पूरी की। वह बोर्ड परीक्षा में 96 प्रतिशत मार्क्स लेकर पास भी हुई। लेकिन जब उसने मेडिकल कॉलेज का फॉर्म भरना चाहा तो उसकी नागरिकता आड़े आ गई। तब वह एमबीबीएस का फॉर्म भर नहीं पा रही थी। क्योंकि विदेशी राष्ट्रीयता से संबंधित कोई रिक्वारमेंट एप्लीकेशन में नहीं थी। उस फार्म में इंडियन नेशनल व एनआरआई ही आवेदन कर सकते थे। ऐसे में उसके लिए यह फॉर्म भरना मुश्किल बात हो रही थी।

मशल ने ट्वीट कर सुषमा स्वराज से मांगी मदद
जयपुर के मेडिकल कॉलेज में दाखिला नहीं मिलने से परेशान होकर मशल ने 29 मई 2016 को सुषमा स्वराज को ट्वीट कर दाखिले में मदद की गुहार लगाई थी। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने तुरंत ट्वीट कर कहा, था 'मेरी बच्ची निराश होने की जरूरत नहीं है। मैं मेडिकल कॉलेज में प्रवेश के तुम्हारे मामले को निजी तौर पर देखूंगी'
बाद में सुषमा के ऑफिस से मशल माहेश्वरी को उसके प्रवेश के लिए जरूरी कागजात जमा कराने के लिए कहा गया था। एक कोटा क्रिएट किया गया। माहेश्वरी को पहले कर्नाटक में सीट मिली थी। लेकिन, उसने गुजरात या राजस्थान के लिए आग्रह किया था। माहेश्वरी ने 22 सितंबर 2016 को SMS मेडिकल कॉलेज में दाखिला ले लिया है। मशल ने कहा कि यदि तब सुषमा जी ने मेरी मदद नहीं की होती तो मैं मेडिकल के बजाए इंजीनियरिंग कर रही होती।

हमारी बच्ची को अपनी बच्ची का सा स्नेह दिया
मशल के पिता ने कहा कि जब हम माइग्रेट होकर आए। जितनी समस्याएं हम समझ रहे थे। उससे ज्यादा सुविधाएं हमें मिली। मैं अपने बच्चों के लिए कैरियर के लिए चिंतित था। उन्हीं के सपनों को पूरा करने के लिए मैं यहां आया था। तब सुषमा स्वराज मैडम ने परिवार का हिस्सा बनकर हमारी समस्या को हल किया। आज भी उनकी याद हम भुला नहीं सकते। उन्होंने जो मेरी बच्ची के साथ व्यवहार किया। वो एक मां के जैसे किया।












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