Ramniwas Jat : कभी टीचर के फर्जी साइन से बढ़ाए नंबर, फिर बने अफसर, अब 50 साल बाद पूरी कहानी वायरल
Ramniwas Jat : शिक्षक के फर्जी साइन से नंबर बढ़ाकर बने RAS अफसर, 50 साल बाद सोशल मीडिया पर वायरल हुआ किस्सा
स्कूल लाइफ के कुछ खास किस्से हमें ताउम्र याद रहते हैं। हम ही नहीं बल्कि उन्हें शिक्षक भी नहीं भूल पाते हैं। ऐसा ही एक मामला राजस्थान प्रशासनिक सेवा (RAS) के अफसर रहे रामनिवास जाट ने सोशल मीडिया पर शेयर किया है, जो खूब वायरल हो रहा है। पूरा किस्सा 50 साल पुराना है। जब 'गुरु-चेला' मिले तो पांच दशक पुरानी यादें फिर जवां हो गई।

इसी साल रिटायर हुए हैं रामनिवास जाट
हम बात कर रहे हैं इसी साल 31 जुलाई को चूरू जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पद से रिटायर हुए आरएएस अफसर रामनिवास जाट की। इन्होंने 7 नवम्बर 2022 को अपने स्कूल के शिक्षक जवाहर गिठाला के साथ मुलाकात की जानकारी अपनी फेसबुक प्रोफाइल पर शेयर की और दोनों के बीच 50 साल पहले शिक्षक के हस्ताक्षरों की नकल करके कॉपी में नंबर बढ़ाने वाला किस्से को लेकर हुई बातचीत भी बयां की।

कॉपी में नंबर बढ़ाने पर हुई थी पिटाई
रिटायर्ड आरएएस अधिकारी रामनिवास जाट ने अपनी फेसबुक पोस्ट में लिखा कि 'आज लोकाचार के दौरान सन 1975-76 में छठी व सातवीं क्लास में हिन्दी पढ़ाने वाले 91 वर्षीय गुरुजी जवाहर जी गिठाला के चरणों मे बैठने का का सौभाग्य मिला। गुरुजी के हस्ताक्षरों की नकल कर कॉपी में नम्बर बढ़ाने की गलती पकड़ में आने पर गुरुजी द्वारा पिटाई का घटना का जिक्र किया तो 50 वर्ष पहले की पढ़ाई के कई प्रसंग याद आए'

जवाहर गिठाला ने तीन पीढ़ियों को पढ़ाया
रामनिवास जाट अपनी पोस्ट में आगे लिखते हैं कि 'उस वक्त गुरुजी की पिटाई से ज्यादा डर इस गुस्ताखी की जानकारी दादाजी पिताजी को होने का था। जवाहर जी जागीरदारी सिस्टम खत्म होने के बाद काश्तकार कौम से आने वाली पहली शिक्षित पीढ़ी के प्रतिनिधि हैं। वे 22 साल की उम्र में सरकारी शिक्षक बन गए थे। 38 साल सरकारी स्कूल व बाद में 18 साल संस्था की स्कूल में कुल 56 साल अध्यापन कार्य किया। इन्होंने तीन पीढ़ियों को पढ़ाया'

गुरुजी को बार बार नमन
रामनिवास जाट ने अपने हिंदी के टीचर जवाहर गिठाला के बारे में लिखा कि 'गुरुजी ने जागीरदारी सिस्टम के दौरान काश्तकारों के बच्चों को पढ़ाई में आने वाली मुश्किलों से संबंधित कई प्रसंग सुनाए जिन पर आज की पीढ़ी विश्वास ही नहीं करेगी। 91 साल की उम्र में गुरुजी पूर्णतः स्वस्थ हैं। किसी भगवान या अदृश्य शक्ति के बजाय खुद की क्षमता पर विश्वास रखते हैं। गुरुजी को बार बार नमन'

पूर्व आरएएस रामनिवास जाट का इंटरव्यू
वन इंडिया हिंदी से बातचीत में रामनिवास जाट बताते हैं कि वे मूलरूप से नागौर जिले की लाडनूं तहसील के गांव आसोटा के रहने वाले हैं। वर्तमान में सीकर जिला मुख्यालय की नवलगढ़ रोड पर घर बनाकर रह रहे हैं। 91 वर्ष के हो चुके शिक्षक जवाहर गिठाला लाडनूं तहसील में जसवंतगढ़ के पास के गांव कुसुंबी के रहने वाले हैं। जवाहर गिठाला 50 साल लाडनूं के राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय में हिंदी पढ़ाया करते थे।

पांच बार के प्रयास में बने आरएएस अफसर
साल 1985 में रामनिवास जाट का चयन राजस्थान प्रशासनिक सेवा की अधिनस्थ सेवा में हुआ। सहकारिता विभाग में रामनिवास जाट ने 13 साल नौकरी की। इस दौरान आरएएस भर्ती परीक्षा में पांच बार भाग्य आजमाया और साल 1998 में 28वीं रैंक पाकर आरएएस अफसर बने और बतौर आरएएस पहली पोस्टिंग जैसलमेर में एसीएम के पद पर मिली।

इन जगहों पर एसडीएम व सीईओ रहे रामनिवास जाट
आरएएस बनने के बाद रामनिवास जाट मेड़ता, डूंगरपुर, शाहबाद बारां, मालपुरा टोंक, राजगढ़ चूरू व उदयपुर में एसडीएम पद पर सेवाएं दी। इसके अलावा चूरू, झुंझुनूं, हनुमानगढ़, नागौर और सीकर जिला परिषद में आठ बार मुख्य कार्यकारी अधिकारी पद पर रहे। झुंझुनूं में कुछ समय के लिए कार्यकारी जिला कलेक्टर के पद पर सेवाएं दीं।












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