Rajasthan : वो तीन रिश्वतखोर IAS अफसर जो बहाल होने के बाद प्रमोट भी हुए
वो तीन रिश्वतखोर आईएएस अफसर जो बहाल होने के बाद प्रमोट भी हुए
जयपुर, 15 नवंबर। घूस लेने वाले अफसरों के खिलाफ राजस्थान भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो कार्रवाई तो ताबड़तोड़ करता है। जेल भिजवाता है, मगर सभी भ्रष्ट अफसरों को सजा नहीं दिलवा पाता है।

कड़ी सजा नहीं मिली
राजस्थान में ऐसे अफसरों की कमी नहीं जो भ्रष्ट होने के बावजूद पदोन्नति पा गए। आईएएस नीरज के पवन, आईएएस निर्मला मीणा और रिटायर्ड आईएएस अशोक सिंघवी वो अफसर हैं, जिनके दामन पर भ्रष्टाचार का दाग लगा। फिर कड़ी सजा नहीं मिली और कुछ समय बाद न केवल बहाल हुए बल्कि उच्च पद पर पोस्टिंग भी पाई।

खान घूसकांड : रिटायर्ड आईएएस अशोक सिंघवी
राजस्थान में साल 2014 में महाघूसकांड सामने आया था। केंद्रीय खनन मंत्रालय ने राजस्थान में नए खान आवंटन पर रोक लगा दी थी। इसके बावजूद 2014 से 2015 के बीच 653 खनन पट्टों का आवंटन किया। इसी प्रकरण में रिटायर्ड आईएएस अशोक सिंघवी व अन्य अफसरों पर करीब ढाई करोड़ की रिेश्वत के आरोप लगे।
राजस्थान के महाघूसकांड में सिंघवी को 2015 में गिरफ्तार किया गया। 2017 तक सस्पेंड रहे। फिर इन्हें बहाल करके गांधी पंचायतीराज संस्थान के डायरेक्टर जनरल के पद पर पोस्टिंग दी गई।

गेहूं घोटाला : आईएएस निर्मला मीणा
मई 2019 में आईएएस अधिकारी निर्मला मीणा को एसीबी ने करोड़ों रुपए के गेहूं घोटाले में गिरफ्तार किया। जांच के दौरान एसीबी अफसरों ने निर्मला मीणा की बीस से भी ज्यादा बेनामी संपत्तियों को भी अटैच किया। फिर 8 अगस्त 2019 को सरकार ने इन्हें बहाल करके पंचायती राज संस्थाओं के जनप्रतिनिधियों को बेहतर गर्वनेंस का प्रशिक्षण देने वाले इंदिरा गांधी पंचायतीराज संस्थान के निदेशक पद पर पोस्टिंग दी।

NRHM घोटाला : IAS नीरज के पवन
नेशनल रूरल हेल्थ मिशन घोटाला केस में साल 2016 आईएएस अधिकारी नीरज के पवन जेल गए। तब स्वास्थ्य विभाग के प्रचार प्रसार से जुड़ी IIC विंग में दलाल के साथ मिलकर चहेती फर्म को गलत तरीके से टेंडर देने के मामले में भारी भ्रष्टाचार सामने आया था। इस मामले में ACB ने गिरफ्तार किया था। 17 मई 2016 से अप्रैल 2018 तक सस्पेंड रहे। जेल से बाहर आते ही सरकार ने प्रशासनिक सुधार विभाग में सचिव बना दिया।

आठ साल से प्रॉपर्टी जब्त नहीं
राजस्थान में भ्रष्ट अफसरों व कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के कई प्रावधान हैं। साल 2012 से रिश्वतखोरों की सम्पत्ति जब्त करने का कानून बना हुआ है। घूसखोरों की प्रॉपर्टी जब्त करना तो कई मामलों में सरकार की मंजूरी तक नहीं मिली। राजस्थान सरकार के पास 270 मामलों में सरकार की मंजूरी का इंतजार है। राजस्थान में घूसखोरों अफसरों की सजा व बचने का अनुपात 40:60 है।












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