Rajasthan News: राजस्थान में वसुंधरा राजे की भूमिका पर चर्चाओं का दौर जारी, जानिए क्या लगाए जा रहे हैं कयास

Rajasthan News: राजस्थान में वसुंधरा राजे की भूमिका को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है। प्रदेश में वसुंधरा राजे की भूमिका पर कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। सियासी गलियारों के वसुंधरा राजे को लेकर जितने मुंह है उतनी बातें हो रही है। कोई वसुंधरा राजे के हनुमान बेनीवाल की पार्टी आरएलपी से तो कोई उनके अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी के साथ गठबंधन कर प्रदेश में चुनाव लड़ने की बात कहते हैं। इन सबके बीच वसुंधरा राजे के समर्थक भी दावे करते हैं कि वसुंधरा राजे भाजपा छोड़कर कहीं नहीं जाने वाली हैं। समर्थकों का दावा है कि वसुंधरा राजे के राजनीतिक विरोधी पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व के आगे उन्हें कमजोर करने के लिए इस तरह की अफवाहें उड़ा रहे हैं।

राजे को लेकर जितने मुंह उतनी बात

राजस्थान में वसुंधरा राजे दो बार मुख्यमंत्री रह चुकी हैं। प्रदेश में दो बार सत्ता में रहने के दौरान उन्होंने पार्टी के कार्यकर्ताओं के बीच गहरी पकड़ बनाई है। लेकिन इस दौरान राजस्थान की सियासत में उनके विरोधी भी सक्रीय हो गए। अब जब पार्टी का शीर्ष नेतृत्व वसुंधरा राजे की भूमिका को लेकर कोई फैसला नहीं कर रहा तो वसुंधरा विरोधी खेमा सक्रिय हो गया। इससे राजस्थान में भाजपा में भारी गुटबाजी हो गई है। वसुंधरा राजे से जुड़े लोग बताते हैं कि विधानसभा चुनाव को लेकर पार्टी की रणनीति पर वसुंधरा राजे कुछ नहीं बोल रही। ना ही वे प्रदेश में संगठन में किसी पद से जुडी हैं। ऐसे में उनके समर्थक दावा करते हैं कि वे गुटबाजी कैसे फैला रही हैं। समर्थक कहते हैं कि उनका ऐसा प्रचार उनके राजनीतिक विरोधियों द्वारा किया जा रहा है।

vasundhara raje

वसुंधरा राजे के आम आदमी पार्टी से गठबंधन की भी चर्चा

प्रदेश के सियासी गलियारों में वसुंधरा राजे की सियासत को लेकर अलग-अलग चर्चाओं का दौर जारी है। राजनीतिक जानकारों की मानें तो वसुंधरा राजे के आम आदमी पार्टी के साथ गठबंधन कर चुनाव मैदान में उतरने की चर्चा है। लेकिन वसुंधरा समर्थक नेताओं की मानें तो वे इसे सिरे से खारिज करते हैं। उनका दावा हैं कि भाजपा ने वसुंधरा राजे को भरपूर अवसर दिए हैं। वे भाजपा से इतर कुछ नहीं सोचती हैं। समर्थक कहते हैं कि वसुंधरा राजे की माता विजयाराजे सिंधिया की जनसंघ और भाजपा में अहम भूमिका रही है। ऐसे में वसुंधरा राजे पार्टी छोड़कर कहीं नहीं जाने वाली। आपको बता दें पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की माता और ग्वालियर राजघराने की पूर्व राजमाता विजयाराजे सिंधिया भाजपा की संस्थापक सदस्यों में शामिल रही हैं।

राजस्थान की दो बार मुख्यमंत्री रह चुकी वसुंधरा

वसुंधरा राजे राजस्थान में दो बार मुख्यमंत्री रह चुकी हैं। इस दौरान उन्होंने प्रदेश में अपनी गहरी पकड़ बनाई है। वसुंधरा राजे को अब भी प्रदेश में भाजपा का प्रभावशाली चेहरा माना जाता है। राजस्थान में इसी साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में राजस्थान में भाजपा का चुनाव में चेहरा कौन होगा। इसे लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। कांग्रेस और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को भाजपा की इस देरदारी का फायदा मिल रहा है। भाजपा प्रदेश में चुनावी रणनीति को लेकर जितनी देर कर रही है। प्रदेश में कांग्रेस और अशोक गहलोत उतने ही मजबूत होकर उभर रहे हैं। भाजपा ने ज्यादा देर की तो प्रदेश में विधानसभा चुनाव में भाजपा का पार पाना मुश्किल हो जाएगा। राजनीति के जानकार कहते हैं कि पार्टी वसुंधरा राजे को मुख्यमंत्री बनाएं या ना बनाएं। यह पार्टी का अंदरूनी मसला है। लेकिन राजस्थान में वसुंधरा राजे के बगैर चुनाव जीतना पार्टी के लिए टेढ़ी खीर होगा। साथ ही जानकार वसुंधरा राजे के किसी अन्य दल के साथ गठबंधन की संभावनाओं को खारिज भी करते हैं।

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