राजस्थान में मंत्रियों और विधायकों के इस्तीफे के बावजूद बेधड़क चल रही सरकार, भाजपा नेताओं ने उठाए सरकार पर सवाल

जयपुर, 4 अक्टूबर। राजस्थान में पिछले दिनों विधायक दल की बैठक का बहिष्कार कर गहलोत समर्थक विधायकों के इस्तीफा देने के बाद गहलोत सरकार पर सवाल उठने शुरू हो गए हैं। भाजपा नेताओं ने गहलोत सरकार के अल्पमत में होने का दावा करते हुए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर हमला बोला है। कांग्रेस विधायकों के इस्तीफे मंजूर करने की मांग को लेकर बीजेपी नेताओं ने विधानसभा अध्यक्ष और प्रदेश सरकार पर प्रेशर बनाना शुरू कर दिया है। भाजपा नेताओं के मुताबिक प्रदेश में कांग्रेस की सरकार अल्पमत में है। ऐसे में सीएम को तत्काल अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। भाजपा नेताओं की टिप्पणी के बाद अब गहलोत सरकार पर सवाल उठने शुरू हो गए हैं। जब विधायक ही इस्तीफा दे चुके तो नैतिक रूप से उन्हें अपने पद का त्याग कर देना चाहिए। इस्तीफा देने के बाद सरकार के मंत्री और विधायक सरकारी सुविधाओं का भोग किस लिए कर रहे हैं।

ashok gahlot

देवनानी बोले मुख्यमंत्री हाईकमान के सगे नहीं हुए

देवनानी बोले मुख्यमंत्री हाईकमान के सगे नहीं हुए

पूर्व शिक्षा मंत्री और अजमेर उत्तर से विधायक वासुदेव देवनानी ने राजस्थान में कांग्रेस की सरकार को अल्पमत में बताया है। देवनानी ने कहा कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को सरकार चलाने का कोई नैतिक अधिकार नहीं रह गया है। उन्हें तत्काल रुप से राज्यपाल को अपने पद से इस्तीफा देकर विधानसभा भंग करने की सिफारिश करनी चाहिए। ताकि राज्य की जनता बेहतर तरीके से अपने नुमाइंदगी करने वाले राजनीतिक दल को चुन सकें। देवनानी ने कहा कि राजस्थान के मुख्यमंत्री और विधायक अपने हाईकमान के सगे नहीं हुए। वे जनता के सगे कभी नहीं हो सकते। ऐसे में मुख्यमंत्री को अपने पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। इतने बवाल के बावजूद उनका इस पद पर बने रहना हास्यास्पद और अचरज वाली बात है।

विधानसभा अध्यक्ष को इस्तीफे मंजूर करने चाहिए

विधानसभा अध्यक्ष को इस्तीफे मंजूर करने चाहिए

बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया ने कहा कि विधायकों ने इस्तीफे दे दिए। इसमें भी बड़ा विरोधाभास है। जब इस्तीफे दे दिए गए हैं तो उन्हें स्वीकार करना चाहिए। क्योंकि उन विधायकों की कोई मंशा रही होगी। अच्छी, भली-बुरी, राजनीति या जो भी व्यक्तिगत तौर पर हो। लेकिन मंशा तो थी। हैरानी इस बात की है कि कांग्रेस के मंत्री दफ्तरों को अभी भी एंटरटेन कर रहे हैं। बंगलों में भी काबिज हैं। उन्हें सुरक्षा भी मिली हुई है। वह सरकार की गाड़ियां भी तोड़ रहे हैं।तबादलों की सूची जारी कर रहे हैं तो यह कौन सा इस्तीफा है। सरकार यह बताए हैं कि या तो यह पाखंड है। अगर हकीकत है तो स्पीकर से इस बात के लिए अपील करनी चाहिए कि वह उनके इस्तीफे मंजूर करें।

सरकारी कार्यक्रमों में लगे हैं सरकार के मंत्री विधायक

सरकारी कार्यक्रमों में लगे हैं सरकार के मंत्री विधायक

राजस्थान में उप नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र सिंह राठौड़ ने कहा कि विधायकों के सामूहिक इस्तीफे के बाद विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीपी जोशी को उन्हें मंजूर करना चाहिए। जब ने दबिश दी विधायक और मंत्री ने इस्तीफा दे दिया है तो मुख्यमंत्री आपात बैठक बुलाकर विधानसभा भंग करने की घोषणा करें। क्योंकि इस्तीफा देने के बाद सरकार ने मानी जा रही है। आप गेंद विधानसभा अध्यक्ष के पाले में हैं। कांग्रेस विधायकों ने उपस्थित होकर उन्हें त्यागपत्र शॉप पर हैं। विधानसभा में नियमों और प्रक्रियाओं में साफ लिखा है कि अगर खुद विधानसभा सदस्य मौजूद रहकर परफोर्मा में त्यागपत्र देता है तो विधानसभा अध्यक्ष उसको उसे स्वीकार करना चाहिए। इस्तीफों के बावजूद मंत्री विधायक तबादलों से लेकर सरकारी कार्यक्रमों में लगे हुए जो उचित नहीं है। हम विधानसभा अध्यक्ष से मांग करेंगे कि इस मसले का निर्णय करें। इस्तीफों को पेंडिंग नहीं रखा जाए।

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